Priyanka Chopra की मां ने लगवाए बोटॉक्स के इंजेक्शन, वीडियो देख चौंके फैंस
Madhu Chopra Video: ग्लोबल आइकन और बॉलीवुड की जानी-मानी एक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा जोनस का परिवार हमेशा से शिक्षा, अनुशासन और प्रोफेशनल उपलब्धियों के लिए जाना जाता रहा है. उनके पिता अशोक चोपड़ा भारतीय सेना में डॉक्टर थे, जबकि उनकी मां मधु चोपड़ा एक अनुभवी ENT (कान, नाक और गले) विशेषज्ञ हैं.
डॉ. मधु चोपड़ा कई सालों से मेडिकल फील्ड में एक्टिव हैं और आज भी अपनी प्रैक्टिस जारी रखे हुए हैं. मुंबई के जुहू इलाके में उनका अपना क्लिनिक है, जिसका नाम Aesthetique है. इस क्लिनिक में वह स्किन और एस्थेटिक ट्रीटमेंट से जुड़े कई मॉडर्न ट्रीटमेंट करती हैं. इसके अलावा वह सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव रहती हैं और अक्सर अपने फॉलोअर्स के साथ हेल्थ, स्किन केयर और एस्थेटिक ट्रीटमेंट से जुड़ी उपयोगी जानकारी साझा करती रहती हैं.
खुद पर करके दिखाया बोटॉक्स का प्रोसेस
हाल ही में डॉ. मधु चोपड़ा ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक दिलचस्प वीडियो साझा किया, जिसमें उन्होंने अपने चेहरे पर बोटॉक्स इंजेक्शन लगाने की पूरी प्रक्रिया दिखाई. इस वीडियो की खास बात यह रही कि उन्होंने यह ट्रीटमेंट किसी दूसरे डॉक्टर से नहीं कराया, बल्कि खुद अपने ऊपर ही करके दिखाया.
वीडियो में उन्होंने बहुत ही सरल और समझने योग्य तरीके से बताया कि बोटॉक्स क्या होता है, यह कैसे काम करता है और किन लोगों को इसकी जरूरत पड़ सकती है. उन्होंने यह भी समझाया कि कई लोग बोटॉक्स के नाम से घबरा जाते हैं, जबकि सही तरीके से किया जाए तो यह एक सुरक्षित और प्रभावी कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट हो सकता है.
चेहरे के इन हिस्सों पर लगाए इंजेक्शन
वीडियो में सबसे पहले डॉ. मधु चोपड़ा अपने चेहरे पर छोटे-छोटे डॉट बनाकर उन जगहों को मार्क करती हैं, जहां बोटॉक्स इंजेक्शन लगाया जाता है. इसके बाद वह सावधानीपूर्वक माथे, आंखों के ऊपर और चिन के पास इंजेक्शन लगाती हुई नजर आती हैं. उन्होंने बताया कि बोटॉक्स की प्रक्रिया उतनी दर्दनाक नहीं होती, जितना आमतौर पर लोग समझते हैं. अधिकतर मामलों में मरीज को हल्का-सा चुभन महसूस होती है और पूरा प्रोसेस कुछ ही मिनटों में पूरा हो जाता है. उनके अनुसार इस ट्रीटमेंट का असर आमतौर पर 3 से 4 दिनों के भीतर दिखने लगता है और धीरे-धीरे चेहरे की झुर्रियां और फाइन लाइन्स कम नजर आने लगती हैं.
बोटॉक्स से जुड़ी गलतफहमियों को किया दूर
डॉ. मधु चोपड़ा ने अपने वीडियो के जरिए बोटॉक्स से जुड़ी कई आम गलतफहमियों पर भी बात की. उन्होंने कहा कि लोगों के मन में सबसे बड़ा भ्रम यह होता है कि बोटॉक्स कराने के बाद चेहरा पूरी तरह फ्रीज हो जाता है या प्लास्टिक जैसा दिखने लगता है. उनके मुताबिक ऐसा तभी होता है जब यह प्रक्रिया किसी अनुभवहीन व्यक्ति द्वारा गलत तरीके से की जाए. अगर किसी योग्य और अनुभवी डॉक्टर द्वारा सही मात्रा में बोटॉक्स लगाया जाए, तो चेहरे के एक्सप्रेशन नेचुरल रहते हैं और त्वचा पहले से ज्यादा फ्रेश और स्मूद दिखाई देती है.
लोगों को दी खास सलाह
डॉ. मधु चोपड़ा ने अपने फॉलोअर्स और आम लोगों को यह सलाह भी दी कि चेहरे से जुड़े किसी भी कॉस्मेटिक या एस्थेटिक ट्रीटमेंट को लेकर जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए. ऐसे उपचार हमेशा अनुभवी और प्रमाणित डॉक्टर से ही कराना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया या विज्ञापनों के प्रभाव में आकर सस्ते या अनट्रेंड लोगों से ट्रीटमेंट कराना कई बार खतरनाक साबित हो सकता है. इसलिए हमेशा सही डॉक्टर और भरोसेमंद क्लिनिक का चुनाव करना बेहद जरूरी है.
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बांग्लादेश में हिंसा के बढ़ते आंकड़ों के बीच भारत ने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर जताई चिंता
ढाका, 15 मार्च (आईएएनएस)। भारत ने बांग्लादेशी अधिकारियों से अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा को लेकर बार-बार चिंता जाहिर की है। एक रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर भारत ने बांग्लादेश के अधिकारियों से गहन जांच और जवाबदेही की अपेक्षा की कि सभी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी बांग्लादेश सरकार की है।
रिपोर्ट में मानवाधिकार समूहों का हवाला देते हुए कहा गया है कि बार-बार होने वाली हिंसा को रोकने के लिए केवल प्रतिक्रियात्मक पुलिस कार्रवाई से काम नहीं चलेगा। इसके लिए निरंतर कानूनी सुरक्षा, अपराधियों पर त्वरित मुकदमा और सामुदायिक सुलह के प्रयास आवश्यक हैं।
द मॉर्निंग वॉइस अखबार ने विस्तार से बताया कि पारदर्शी, स्वतंत्र रूप से सत्यापित आंकड़ों के अभाव में, पूरी स्थिति स्पष्ट नहीं है। फिर भी, ये आरोप अकेले ही एक व्यापक चिंता को उजागर करते हैं। जब किसी भी देश में अल्पसंख्यक लगातार असुरक्षा का सामना करते हैं, तो यह क्षेत्र की बहुलवाद, कानून के शासन और मूलभूत मानवीय गरिमा के प्रति प्रतिबद्धता को चुनौती देता है।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत की संसद में हाल ही में हुए एक खुलासे से पता चला है कि अगस्त 2024 से फरवरी 2026 के बीच बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों को निशाना बनाकर हिंसा की लगभग 3,100 घटनाएं हुईं, जिससे पड़ोसी देश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि हमलों में कथित तौर पर घरों, व्यवसायों और पूजा स्थलों को निशाना बनाया गया, जिनमें हत्या और आगजनी की खबरें हैं। अगर ये तथ्य सही हैं, तो ऐसे कृत्य न केवल सांप्रदायिक हिंसा को बढ़ावा देते हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त मानवाधिकार सिद्धांतों का भी गंभीर उल्लंघन हैं, जिनमें धर्म की स्वतंत्रता, कानून के सामने समानता और जीवन एवं सुरक्षा का अधिकार शामिल हैं।
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि यह मुद्दा भारत के लिए विशेष रूप से संवेदनशील है, क्योंकि बांग्लादेश के साथ इसकी लंबी और खुली सीमा है और इसके साथ गहरे ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और जनसांख्यिकीय संबंध हैं। सीमा पार अल्पसंख्यकों को प्रभावित करने वाली अस्थिरता के मानवीय, राजनयिक और सुरक्षा संबंधी गंभीर परिणाम हो सकते हैं, जिनमें विस्थापन का दबाव और सीमा पार तनाव शामिल हैं।
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि अगर इसकी पुष्टि हो जाती है, तो अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा महज एक घरेलू समस्या नहीं बल्कि एक मानवाधिकार संबंधी चिंता का विषय बन जाएगी, जिस पर निरंतर वैश्विक ध्यान देने की आवश्यकता है। बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदुओं पर हमले बढ़ते गए, जिससे मानवाधिकार संबंधी गंभीर चिंताएं पैदा हुईं, जो मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अठारह महीने की अंतरिम सरकार के कार्यकाल के दौरान और भी तेज हो गईं थीं।
--आईएएनएस
एसडी/एएस
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