मिडिल ईस्ट युद्ध की आहट से दिल्ली के गोविंदपुरी में गैस किल्लत को लेकर हाहाकार मचा है. बुकिंग के बावजूद सिलेंडर न मिलने से नाराज लोग गोदामों पर भारी भीड़ लगा रहे हैं, जिसे नियंत्रित करने के लिए पुलिस तैनात करनी पड़ी है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोलकाता में एक विशाल रैली के दौरान सत्तारूढ़ अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पार्टी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के सम्मान को स्वीकार नहीं कर सकी। भाजपा के परिवर्तन यात्रा अभियान के समापन पर समर्थकों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि राज्य सरकार ने बंगाल की हालिया यात्रा के दौरान राष्ट्रपति का अपमान किया। पीएम मोदी ने कहा कि कुछ ही दिन पहले, हमारी देश की राष्ट्रपति, आदिवासी समुदाय की सम्मानित पुत्री, माननीय श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी बंगाल आई थीं। उन्हें संथाल आदिवासी परंपरा के पवित्र उत्सव में भाग लेना था, लेकिन इस अहंकारी और निर्दयी सरकार ने न केवल उस कार्यक्रम का बहिष्कार किया, बल्कि उसे पूरी तरह अराजकता में बदल दिया।
उन्होंने आगे कहा कि सत्तारूढ़ पार्टी देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन एक आदिवासी नेता को दिए गए सम्मान को स्वीकार नहीं कर सकी। उन्होंने कहा कि क्योंकि आदिवासी समुदाय की पुत्री इतने उच्च पद पर हैं, इसलिए टीएमसी के लोग उनके सम्मान को स्वीकार नहीं कर सके। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य में राजनीतिक परिवर्तन अपरिहार्य है और उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार पर राज्य में महा जंगलराज लाने का आरोप लगाया।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह निरंकुश सरकार चाहे जितनी भी कोशिश कर ले, परिवर्तन की इस आंधी को रोक नहीं पाएगी। उन्होंने दावा किया कि बंगाल में सत्ताधारी पार्टी के पतन की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है। प्रधानमंत्री मोदी ने आगे आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई कई कल्याणकारी योजनाओं को रोककर राज्य में विकास में बाधा डाल रही है। उन्होंने कहा, “टीएमसी न तो खुद काम करती है और न ही दूसरों को काम करने देती है। बंगाल में कई केंद्रीय योजनाएं ठप पड़ी हैं।” उन्होंने राज्य सरकार पर लोगों को लाभ पहुंचाने वाली परियोजनाओं को रोकने का आरोप लगाया।
राज्य में युवाओं के सामने आने वाली चुनौतियों के बारे में बोलते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कई युवा अवसरों की तलाश में बंगाल छोड़ने को मजबूर हैं। उन्होंने रैली के दौरान कहा कि बंगाल के युवा पलायन के अभिशाप से पीड़ित हैं। उन्हें न तो डिग्री मिल रही है और न ही नौकरियां। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य में राजनीतिक परिवर्तन होते ही कानून का कड़ा शासन फिर से लागू होगा। उन्होंने कहा कि बंगाल में फिर से कानून का शासन होगा। अत्याचारों के आरोपी टीएमसी नेताओं को बख्शा नहीं जाएगा।
Sanju Samson: भारतीय विकेटकीपर बल्लेबाज संजू सैमसन ने टी20 वर्ल्ड कप 2026 के दौरान अपने करियर के सबसे मुश्किल दौर का खुलासा किया है। सैमसन ने बताया कि जब उन्हें टीम इंडिया की प्लेइंग इलेवन से बाहर किया गया तो वह पूरी तरह टूट गए थे। यहां तक कि वह 5-6 दिन तक खुद को संभालने की कोशिश करते रहे। हालांकि इसके बाद उन्होंने जबरदस्त वापसी की और शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत को टी20 वर्ल्ड कप 2026 का खिताब जिताने में अहम भूमिका निभाई।
संजू सैमसन ने बताया कि न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज के बाद ही उन्हें अंदाजा हो गया था कि प्लेइंग इलेवन में उनकी जगह पक्की नहीं है। उनकी आशंका तब सच साबित हुई जब मुंबई में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ वॉर्म-अप मैच में उनकी जगह ईशान किशन को मौका दिया गया।
सैमसन ने इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में कहा,'मैं ऐसा इंसान हूं जो दूसरों के लिए ज्यादा अच्छा कर पाता हूं, लेकिन जब अपने लोगों से ही टीम में जगह के लिए मुकाबला करना पड़ता है तो मैं सहज महसूस नहीं करता। न्यूजीलैंड सीरीज में भी मेरे साथ ऐसा ही हुआ।'
टीम से बाहर होने पर पूरी तरह टूट गए थे संजू 31 वर्षीय सैमसन ने बताया कि टीम से बाहर होना उनके लिए बेहद भावनात्मक पल था। उन्होंने कहा,'मैं बहुत ज्यादा बेचैन हो गया था क्योंकि मेरा सपना वर्ल्ड कप जीतना था और मैं प्लेइंग इलेवन में ही नहीं था। मेरे मन में बार-बार यही चल रहा था कि टीम कुछ नए कॉम्बिनेशन आजमा रही है, तो क्या मैं टीम में हूं भी या नहीं?'
सैमसन ने आगे कहा, 'मैं पूरी तरह टूट गया था। मेरा सपना वर्ल्ड कप जीतने का था और मैं टीम में ही नहीं था। मैं 5-6 दिनों के लिए पूरी तरह गायब हो गया था। उसी दौरान मैंने खुद को फिर से संभालना शुरू किया और तैयारी करने लगा, क्योंकि क्रिकेट में कभी नहीं पता कि कब मौका मिल जाए।'
एक मौका और बदल गई पूरी कहानी सैमसन की किस्मत का दरवाजा सुपर-8 में जिम्बाब्वे के खिलाफ चेन्नई में खुला। उस मैच में वह बड़ी पारी नहीं खेल पाए, लेकिन टीम में वापसी ने उनका आत्मविश्वास लौटा दिया। इसके बाद उन्होंने टूर्नामेंट में धमाकेदार प्रदर्शन किया। वेस्टइंडीज के खिलाफ 97 रन ठोके, सेमीफाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ शानदार 89 रन बनाए और फाइनल में न्यूजीलैंड के खिलाफ भी अहम 89 रन की पारी खेली। इन पारियों ने भारत की खिताबी जीत की नींव रख दी।
टीम मैनेजमेंट के भरोसे ने बदल दी सोच सैमसन ने कहा कि जैसे ही उन्हें लगा कि टीम मैनेजमेंट को उन पर भरोसा है, उनकी सोच पूरी तरह बदल गई। उन्होंने कहा कि जब वर्ल्ड कप शुरू हुआ तो मुझे एहसास हुआ कि टीम आपको चाहती है। जिम्बाब्वे मैच से हमें लगातार चार मैच जीतने थे और टीम को मेरी जरूरत थी। वहीं से मेरा आत्मविश्वास वापस आया और मैं पूरी तरह फायर हो गया।
संजू सैमसन की यह कहानी बताती है कि क्रिकेट में एक मौका ही खिलाड़ी की पूरी कहानी बदल सकता है। टीम से बाहर होने के बाद टूट चुके सैमसन ने खुद को संभाला, मौका मिला और उसी मौके को उन्होंने इतिहास में बदल दिया।