कोटा में गैस संकट: मेस में बंद हुआ नाश्ता, हजारों छात्रों के लिए लकड़ी-कोयले की भट्टियों पर बन रहा खाना
Gas cylinder shortage : कोटा में इन दिनों गैस सिलेंडर की कमी ने छात्रों और हॉस्टल संचालकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. देशभर से पढ़ने आए हजारों छात्रों के लिए समय पर खाना बनाना मेस संचालकों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है. गैस सप्लाई बाधित होने के कारण कई मेस ने नाश्ता बनाना बंद कर दिया है, जबकि दोपहर और रात का खाना अब लकड़ी और कोयले की भट्टियों पर तैयार किया जा रहा है. सिलेंडर न मिलने से लोहे की पारंपरिक भट्टियों की मांग अचानक बढ़ गई है. दुकानदारों के अनुसार दो दिनों में दर्जनों भट्टियां बिक चुकी हैं और कई ऑर्डर अभी भी लंबित हैं. इन भट्टियों का वजन करीब 35-40 किलो है और कीमत लगभग 130 रुपये प्रति किलो के हिसाब से ली जा रही है. हॉस्टल संचालकों का कहना है कि लंबे समय तक यही हाल रहा तो लकड़ी और कोयले की कीमतें भी बढ़ सकती हैं. इसका सीधा असर छात्रों के भोजन और पढ़ाई दोनों पर पड़ सकता है.
संभल DM-SP कानून नहीं संभाल सकते तो इस्तीफा दें- हाईकोर्ट:मस्जिद में नमाजियों की संख्या सीमित करवाने पर लगाई फटकार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मस्जिद में नमाजियों की संख्या सीमित करने पर संभल DM और SP को फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा- प्रशासन मस्जिद में नमाजियों की संख्या सीमित नहीं कर सकता है। अगर डीएम राजेंद्र पेंसिया और एसपी केके विश्नोई को लगता है कि वे कानून व्यवस्था नहीं संभाल पा रहे हैं तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए या ट्रांसफर करवा लेना चाहिए। हर परिस्थिति में कानून व्यवस्था बनाए रखना उनका काम है। जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने कहा- यह राज्य का कर्तव्य है कि वह सुनिश्चित करे कि हर समुदाय निर्धारित पूजा स्थल पर शांतिपूर्वक पूजा कर सके। अगर वह निजी संपत्ति है तो राज्य से किसी अनुमति की जरूरत नहीं है। कोर्ट पहले ही साफ कर चुका है कि राज्य का दखल सिर्फ वहीं जरूरी है, जहां प्रार्थना या धार्मिक काम सार्वजनिक भूमि पर आयोजित किए जाने हों। याचिकाकर्ता मुनाजिर खान के मुताबिक, पिछले साल फरवरी महीने में हयातनगर थाने से पुलिसवाले आए। उन्होंने कहा कि सिर्फ 20 लोग ही मस्जिद में नमाज पढ़ सकते हैं। एक बार में 5 से 6 लोग ही नमाज अदा करें। इसके बाद 18 जनवरी 2026 को हाईकोर्ट में याचिका दायर की। हाईकोर्ट में 27 फरवरी को पहली सुनवाई हुई। आज (शनिवार) को आदेश हाईकोर्ट की साइट पर अपलोड हुआ। 16 मार्च को मामले पर अगली सुनवाई होगी। कानून व्यवस्था न बिगड़े, इसलिए प्रशासन ने रोका- सरकारी वकील हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया- रमजान के दौरान मस्जिद में नमाज अदा करने से रोका जा रहा है। रमजान चल रहा है। ऐसे में परिसर के भीतर नमाज अदा करने के लिए बड़ी संख्या में लोग आ सकते हैं। वहीं, सरकारी वकील ने कोर्ट को बताया कि कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने नमाजियों की संख्या सीमित करने का आदेश दिया था। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद कोर्ट ने सरकार के वकील के तर्क को खारिज कर दिया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा- आपने अब तक मस्जिद या नमाज की जगह की कोई तस्वीर कोर्ट में दाखिल नहीं की है। इस पर याचिकाकर्ता ने समय मांगा। इसके बाद कोर्ट ने उन्हें नमाज की जगह की तस्वीरें और राजस्व रिकॉर्ड दाखिल करने के लिए अनुमति दे दी। अब वह इसे 16 मार्च से पहले सब्मिट करेंगे। ‘450 वर्गफीट में मस्जिद है, मालिकाना हक दूसरे के नाम पर’ हयातनगर गांव में 2700 से ज्यादा लोग रहते हैं। यहां 450 वर्गफीट मीटर घोसिया नाम की मस्जिद है। प्रशासन के मुताबिक, जमीन का गाटा नंबर 291 है। डॉक्यूमेंट्स में यह जमीन मोहन सिंह और भूराज सिंह पुत्र सुखी सिंह के नाम पर है। बरेली के डीएम-एसएसपी हाईकोर्ट में तलब किए गए थे ------------------------ ये खबर भी पढ़िए- ओवैसी बोले- सुनो संभल DSP मुल्क आपके बाप का नहीं:इजराइली प्रधानमंत्री की भाषा बोल रहे; कहा था- जिन्हें दिक्कत वो ईरान चले जाएं संभल में CO कुलदीप कुमार का 'जहाज में बैठकर ईरान चले जाओ' वाला बयान तूल पकड़ता जा रहा है। AIMIM नेता सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने पलटवार करते हुए कहा- ये मुल्क आपके बाप का नहीं। तुम इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की जुबान बोल रहे हो। उधर, संभल में सपा विधायक इकबाल महमूद ने भी सीओ को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जब बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार हो रहा था, तब उन्होंने यहां के हिंदुओं को जहाज से वहां क्यों नहीं भेजा? पूरी खबर पढ़िए
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