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धीरे-धीरे धुंधली हो रही है नजर? हो सकते हैं मोतियाबिंद के शुरुआती संकेत

नई दिल्ली, 14 मार्च (आईएएनएस)। अगर आपकी नजर पहले जितनी साफ नहीं रही और धीरे-धीरे चीजें धुंधली दिखाई देने लगी हैं, तो इसे नजरअंदाज करना ठीक नहीं है। कई बार यह समस्या सामान्य लगती है, लेकिन यह आंखों की एक आम बीमारी मोतियाबिंद के शुरुआती संकेत भी हो सकते हैं।

इस बीमारी में आंख के अंदर मौजूद लेंस धीरे-धीरे धुंधला होने लगता है, जिससे सामने की चीजें साफ दिखाई नहीं देतीं। शुरुआत में यह परेशानी बहुत हल्की होती है, इसलिए कई लोग इसे थकान, उम्र या चश्मे का नंबर बदलने की समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन समय के साथ-साथ यह समस्या बढ़ सकती है और देखने में ज्यादा दिक्कत होने लगती है।

मोतियाबिंद का सबसे आम लक्षण धुंधली दृष्टि है। कई लोगों को ऐसा महसूस होता है जैसे वे धुंध या धुएं के पीछे से चीजें देख रहे हों। पढ़ते समय अक्षर साफ नहीं दिखते, टीवी देखते समय तस्वीर धुंधली लगती है और छोटे-छोटे काम करने में भी परेशानी होने लगती है।

इसके अलावा, रात के समय देखने में भी दिक्कत हो सकती है। खासकर गाड़ी चलाते समय सामने से आने वाली गाड़ियों की हेडलाइट बहुत तेज लगती है और आंखों में चकाचौंध होने लगती है। कई लोगों को लाइट के आसपास हल्के-हल्के घेरे भी दिखाई देते हैं, जिसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

इस बीमारी का एक और संकेत यह भी हो सकता है कि रंग पहले की तरह चमकीले नहीं दिखते। कई बार रंग फीके या हल्के पीले दिखाई देने लगते हैं। कुछ लोगों को एक आंख से चीजें दो-दो दिखाई देने लगती हैं, जिसे डबल विजन कहा जाता है। इसके साथ ही लंबे समय तक पढ़ने या मोबाइल देखने के बाद आंखों में जल्दी थकान या जलन महसूस हो सकती है। शुरुआत में ये लक्षण मामूली लग सकते हैं, लेकिन अगर ये बार-बार महसूस हों तो आंखों की जांच जरूर करानी चाहिए।

आमतौर पर मोतियाबिंद बढ़ती उम्र के साथ ज्यादा देखा जाता है। उम्र बढ़ने पर आंखों के लेंस में प्राकृतिक बदलाव होने लगते हैं, जिससे यह समस्या पैदा हो सकती है। हालांकि सिर्फ उम्र ही इसका कारण नहीं है। जिन लोगों को डायबिटीज है, उन्हें भी इस बीमारी का खतरा ज्यादा होता है। इसके अलावा आंखों में चोट लगना, किसी सर्जरी का होना या लंबे समय तक कुछ खास दवाइयों का इस्तेमाल करना भी मोतियाबिंद की वजह बन सकता है।

अच्छी बात यह है कि अगर मोतियाबिंद को समय रहते पहचान लिया जाए तो इसका इलाज संभव है। शुरुआत में डॉक्टर चश्मे का नंबर बदलने या कुछ सावधानियां अपनाने की सलाह दे सकते हैं, लेकिन जब समस्या ज्यादा बढ़ जाती है तो सर्जरी की जा सकती है।

--आईएएनएस

पीआईएम/वीसी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका भेजेगा मरीन और युद्धपोत: रिपोर्ट

वॉशिंगटन, 14 मार्च (आईएएनएस)। पेंटागन ने मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अतिरिक्त मरीन सैनिकों और युद्धपोतों को तैनात करने का फैसला किया है। मीडिया रिपोर्टों में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरान द्वारा समुद्री यातायात और क्षेत्रीय ठिकानों पर हमलों के बाद यह कदम उठाया जा रहा है।

फॉक्स न्यूज के मुताबिक, अमेरिका पोत यूएसएस त्रिपोली के साथ एक मरीन एम्फीबियस रेडी ग्रुप और 31वीं मरीन अभियान इकाई को क्षेत्र में भेज रहा है। एक अमेरिकी रक्षा अधिकारी के हवाले से फॉक्स न्यूज ने बताया कि इस तैनाती में लगभग 2,500 मरीन और 2,500 नाविक शामिल होंगे।

यूएसएस त्रिपोली फिलहाल जापान में तैनात है और उसे मध्य-पूर्व पहुंचने में लगभग एक से दो सप्ताह का समय लग सकता है। वहां पहुंचने के बाद यह पहले से क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य संसाधनों के साथ जुड़ जाएगा।

यह तैनाती ऐसे समय की जा रही है जब ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात को धमकाने और खाड़ी क्षेत्र के कुछ देशों पर हमले करने की चेतावनी दी है। इससे वैश्विक समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।

द न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र से करीब 2,500 मरीन तीन युद्धपोतों के जरिए मध्य पूर्व की ओर रवाना हो रहे हैं। ये सैनिक वहां पहले से तैनात अमेरिकी बलों को मजबूत करेंगे।

रिपोर्ट में कहा गया है कि फिलहाल मध्य-पूर्व में 50,000 से अधिक अमेरिकी सैनिक तैनात हैं और नए मरीन उनके साथ जुड़ेंगे। हालांकि अधिकारियों ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि क्षेत्र में पहुंचने के बाद इन अतिरिक्त बलों का इस्तेमाल किस तरह किया जाएगा।

इस तैनाती को लेकर पूछे गए सवालों पर पेंटागन के एक प्रवक्ता ने परिचालन से जुड़े विवरण साझा करने से इनकार कर दिया। उन्होंने आईएएनएस से कहा कि सुरक्षा कारणों से भविष्य या संभावित सैन्य गतिविधियों पर टिप्पणी नहीं की जाती है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के रणनीतिक समुद्री मार्गों में से एक है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है।

उद्योग से जुड़े अनुमानों के मुताबिक दुनिया की लगभग पांचवीं हिस्से की तेल आपूर्ति बड़े टैंकर जहाजों के जरिए इसी संकरे समुद्री मार्ग से गुजरती है। इसलिए, यहां किसी भी तरह की बाधा का असर तुरंत वैश्विक तेल कीमतों और ऊर्जा बाजारों पर पड़ सकता है।

अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि यदि वाणिज्यिक जहाजों पर हमले बढ़ते हैं तो यूएस नेवी व्यापारी जहाजों को जलडमरूमध्य से सुरक्षित निकालने के लिए एस्कॉर्ट भी दे सकती है। ऐसा कदम अमेरिका ने 1980 के दशक के अंत में ईरान के साथ तनाव के दौरान भी उठाया था।

--आईएएनएस

केआर/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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RCB फैंस के लिए बड़ी खुशखबरी, सुरक्षा ऑडिट पास कर Chinnaswamy Stadium में लौटेंगे IPL मैचेस

बेंगलुरु के चिन्नास्वामी मैदान को लेकर पिछले कुछ समय से चल रही अनिश्चितता अब खत्म होती दिखाई दे रही है। मौजूद जानकारी के अनुसार सुरक्षा और संरचनात्मक व्यवस्थाओं की पूरी जांच के बाद इस मैदान को फिर से मुकाबलों के आयोजन की अंतिम मंजूरी दे दी गई।

बता दें कि कर्नाटक के गृह मंत्री जी परमेश्वर द्वारा गठित एक विशेषज्ञ समिति ने मैदान और उसके आसपास की व्यवस्थाओं का विस्तृत निरीक्षण किया था। शुक्रवार को पूरे दिन चली इस जांच के दौरान मैदान की संरचनात्मक स्थिति, सुरक्षा मानकों और भीड़ नियंत्रण से जुड़ी व्यवस्थाओं का आकलन किया गया है।

गौरतलब है कि सोमवार को कर्नाटक राज्य क्रिकेट संघ के अधिकारियों, रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु प्रबंधन और विशेषज्ञ समिति के सदस्यों के बीच बैठक हुई, जिसके बाद मैदान के उपयोग को लेकर अंतिम मंजूरी दी गई है। यह समिति जी महेश्वर राव की अध्यक्षता में काम कर रही थी।

मौजूद जानकारी के अनुसार इस मैदान पर रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के पांच घरेलू मुकाबले आयोजित किए जाएंगे। वहीं टीम के दो अन्य मुकाबले रायपुर स्थित शहीद वीर नारायण सिंह मैदान में खेले जाएंगे, जिसके लिए पहले से ही राज्य सरकार के साथ समझौता किया गया है।

भीड़ प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए कई नई व्यवस्थाएं भी लागू की गई हैं। बताया जा रहा है कि मैदान के आसपास अतिरिक्त प्रवेश द्वार बनाए गए हैं और पुराने प्रवेश मार्गों को चौड़ा किया गया है ताकि दर्शकों की आवाजाही सुगम हो सके।

गौरतलब है कि दर्शकों की सुविधा के लिए डिजिटल व्यवस्था भी शुरू की जा रही है। मौजूद जानकारी के अनुसार टिकटों पर विशेष क्यूआर कोड व्यवस्था लागू की जाएगी ताकि भीड़ नियंत्रण और प्रवेश प्रक्रिया को व्यवस्थित किया जा सके।

यात्रा व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए बेंगलुरु मेट्रो रेल प्रबंधन के साथ भी साझेदारी की गई है। इसके तहत मुकाबले वाले दिनों में मेट्रो सेवाएं देर रात एक बजे तक चलेंगी। इसके अलावा यात्रियों की भीड़ को ध्यान में रखते हुए ट्रेनों की संख्या भी बढ़ाने की तैयारी की जा रही है।

सूत्रों के अनुसार यह भी संभावना है कि जिन दर्शकों के पास मुकाबले के टिकट होंगे उन्हें मेट्रो यात्रा में विशेष सुविधा दी जा सकती है। हालांकि इसके अंतिम नियमों पर अभी काम जारी है।

बता दें कि चिन्नास्वामी मैदान पिछले वर्ष एक विवाद के कारण चर्चा में आया था। मौजूद जानकारी के अनुसार तीन जून को टीम की जीत के बाद हुए जश्न के दौरान भीड़ में भगदड़ मचने से ग्यारह दर्शकों की मौत हो गई थी, जिसके बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठे थे।

इसी कारण विशेषज्ञ समिति ने मैदान की व्यवस्थाओं में कई सुधार सुझाए थे। कर्नाटक राज्य क्रिकेट संघ ने पिछले दो महीनों में इन सुझावों के आधार पर कई बदलाव किए हैं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की संभावना को कम किया जा सके।

मौजूद जानकारी के अनुसार मैदान अब आधिकारिक रूप से टीम प्रबंधन और आयोजन से जुड़े साझेदारों को सौंपा जाएगा। टिकट बिक्री की प्रक्रिया भी जल्द शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।
Mon, 16 Mar 2026 20:09:43 +0530

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