मिथिला में दिवाली पर हुक्का-पाती जलाकर क्यों करते हैं पितरों को विदा? जानें मुहूर्त से लेकर मंत्र तक की पूरी विधि
Diwali Hukkapati Vidhi: दिवाली पर मिथिला में पितरों की विदाई के लिए हुक्का-पाती जलाई जाती है. जानें इसका महत्व, सही समय, विधि और पितरों को विदा करने का मंत्र.
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उत्तराखंड के पहाड़ी उत्पादों को मिल रहा नया बाजार, किसानों से लेकर महिला समूहों तक के लिए खुल रहे कमाई के रास्ते
Uttarakhand Products: उत्तराखंड के पहाड़ों में पैदा होने वाले मोटे अनाज, दालें, फल और पारंपरिक हस्तशिल्प अब सिर्फ स्थानीय बाजारों तक सीमित नहीं हैं. इन्हें देश और विदेश के बाजारों तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है. राज्य सरकार की 'एक जिला दो उत्पाद' योजना के तहत स्थानीय उत्पादों की पहचान, उनकी प्रोसेसिंग और बेहतर पैकेजिंग पर काम किया जा रहा है. इससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलने के अवसर बढ़ रहे हैं, वहीं महिला स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय युवाओं को भी रोजगार से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है.
उत्तराखंड के सभी 13 जिलों की भौगोलिक परिस्थितियां और पारंपरिक उत्पाद अलग-अलग हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए 'एक जिला दो उत्पाद' योजना में हर जिले से दो विशेष उत्पाद चुने गए हैं. इनमें एक कृषि या बागवानी से जुड़ा उत्पाद और दूसरा हस्तशिल्प या खाद्य प्रसंस्करण से संबंधित है. योजना का उद्देश्य इन उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराना और स्थानीय स्तर पर छोटे उद्योगों को बढ़ावा देना है.
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CM धामी का क्या है कहना?
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का कहना है कि उत्तराखंड के हर जिले में स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक हुनर की बड़ी संभावनाएं हैं. सरकार किसानों, काश्तकारों, शिल्पकारों और महिलाओं को नए अवसर उपलब्ध कराने के लिए काम कर रही है. इसके जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और युवाओं को अपने क्षेत्र में ही रोजगार उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है.
कच्चे माल के बजाय तैयार उत्पाद बेचने पर जोर
योजना के तहत किसानों को केवल फल, अनाज और मसाले बेचने तक सीमित नहीं रहने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. उन्हें अपनी उपज से तैयार उत्पाद बनाने की ट्रेनिंग दी जा रही है. उदाहरण के तौर पर सेब और माल्टा उगाने वाले किसान अब जूस, जैम और कैंडी जैसे उत्पाद तैयार कर सकते हैं. इससे कच्चे माल की तुलना में तैयार उत्पाद बेचकर अधिक कमाई करने की संभावना बनती है. इसके लिए अलग-अलग जिलों में प्रोसेसिंग सेंटर और कॉमन फैसिलिटी सेंटर विकसित किए जा रहे हैं. यहां किसानों को उपज की ग्रेडिंग, पैकेजिंग और गुणवत्ता जांच जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रावधान है.
'हाउस ऑफ हिमालयाज' से उत्पादों को मिलेगी नई पहचान
उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों को एक ब्रांड के तहत बाजार तक पहुंचाने के लिए 'हाउस ऑफ हिमालयाज' की शुरुआत की गई है. इसके माध्यम से मांडवा, झंगोरा, गहत, भट्ट, मुनस्यारी का राजमा, अल्मोड़ा की बाल मिठाई और चूलू का तेल जैसे उत्पादों को बाजार में पहचान दिलाने की कोशिश की जा रही है.
सरकार इन उत्पादों की बेहतर पैकेजिंग, ब्रांडिंग और जीआई टैगिंग पर भी ध्यान दे रही है. इसका उद्देश्य स्थानीय उत्पादों को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और बड़े बाजारों तक पहुंचाना है, ताकि किसानों और छोटे कारोबारियों को अधिक ग्राहक मिल सकें.
महिला समूहों के लिए भी खुल रहे रोजगार के अवसर
इस योजना में महिला स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी भी बढ़ाई जा रही है. महिलाएं एपण कला, हस्तशिल्प, ऊनी कपड़ों, बेकरी और खाद्य प्रसंस्करण जैसे कामों से जुड़ रही हैं. राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के साथ समन्वय करके उन्हें प्रशिक्षण और कारोबार शुरू करने में मदद दी जा रही है.
इससे ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं अपने पारंपरिक हुनर को आमदनी का जरिया बना सकती हैं. साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर तैयार होने से परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में भी मदद मिल सकती है.
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दूसरी योजनाओं से भी मिल रही आर्थिक मदद
'एक जिला दो उत्पाद' योजना को आगे बढ़ाने के लिए सरकार इसे दूसरी योजनाओं से भी जोड़ रही है.
- मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना: खाद्य प्रसंस्करण और अन्य छोटी इकाइयां शुरू करने वाले युवाओं और किसानों को पात्रता के अनुसार 15 से 25 प्रतिशत तक मार्जिन मनी सब्सिडी दी जा रही है.
- पीएम सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना: खाद्य प्रसंस्करण से जुड़ी व्यक्तिगत और समूह इकाइयों को पात्र परियोजनाओं पर 35 प्रतिशत तक क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी का प्रावधान है.
- हाउस ऑफ हिमालयाज: स्थानीय उत्पादों को बड़े बाजारों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तक पहुंचाने में मदद मिल रही है.
- क्लस्टर विकास योजना: उत्पादों की ग्रेडिंग, पैकेजिंग और टेस्टिंग के लिए कॉमन फैसिलिटी सेंटर विकसित किए जा रहे हैं.
इस तरह योजना के जरिए उत्तराखंड के पारंपरिक उत्पादों को कारोबार से जोड़ने, किसानों की आय के नए रास्ते बनाने और महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है.
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