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पेरेंटिंग- बेटा मैथ्स से बहुत डरता है:हर टेस्ट से पहले उसका पेट दर्द करने लगता है, उसका ये गणित का डर कैसे दूर करूं?

सवाल- मैं उत्तर प्रदेश से हूं। मेरा 11 साल का बेटा छठवीं क्लास में पढ़ता है। वह पढ़ाई में अच्छा है, लेकिन मैथ्स से बहुत डरता है। कहता है, मैथ समझ में नहीं आती है। हमेशा मैथ टेस्ट से पहले उसे पेट दर्द, घबराहट होने लगती है। एक मां के रूप में मैं उसे कैसे समझाऊं, कैसे सपोर्ट करूं कि उसका डर कम हो और आत्मविश्वास बढ़े? एक्सपर्ट: डॉ. अमिता श्रृंगी, साइकोलॉजिस्ट, फैमिली एंड चाइल्ड काउंसलर, जयपुर जवाब- सवाल पूछने के लिए शुक्रिया। अच्छी बात यह है कि आपका बेटा अन्य विषयों में अच्छा है। इसका मतलब है कि उसकी सीखने की क्षमता अच्छी है। समस्या केवल मैथ्स को लेकर बने डर की है। साइकोलॉजी में इसे ‘मैथ एंग्जाइटी’ कहते हैं। दरअसल इस उम्र में बच्चों पर ग्रेड्स, टेस्ट और परफॉर्मेंस का दबाव बढ़ने लगता है। ऐसे में अगर किसी कारण से बच्चे को कोई विषय कठिन लगता है तो ये धीरे-धीरे उसके कॉन्फिडेंस को भी प्रभावित करता है। यही वजह है कि आपका बेटा टेस्ट से पहले पेट दर्द व घबराहट जैसे लक्षण महसूस कर रहा है। मैथ एंग्जाइटी के कारणों को करें आइडेंटिफाई जब बच्चा पढ़ाई से बचने के लिए बहाने बनाता है तो उसके पीछे कोई-न-कोई कारण छिपा होता है। ऐसे में समस्या का हल जानने से पहले उस कारण को आइडेंटिफाई करना जरूरी है। जब तक यह क्लीयर नहीं होगा कि उसे किस बात से सबसे ज्यादा डर लग रहा है, तब तक सही समाधान मिलना मुश्किल है। बच्चे की बहानेबाजी या डर के पीछे कई कारण हो सकते हैं। ग्राफिक में देखिए- ग्राफिक में दिए कारणों से समझें कि आखिर आपके बेटे के डर और एंग्जाइटी के पीछे कौन-सी वजहें हो सकती हैं। आइए, अब इसके आधार पर बच्चे की मैथ एंग्जाइटी के समाधान पर बात करते हैं। बच्चों में मैथ के प्रति इंटरेस्ट कैसे जगाएं? याद रखिए, बच्चों को अगर कोई भी चीज सिखानी है तो वह मजेदार होनी चाहिए। बच्चों को जो चीजें मजेदार लगती हैं, उसे वे इंटरेस्ट के साथ पढ़ते व समझते हैं। वहीं दबाव और जबरदस्ती करने से बच्चे उससे दूर भागते हैं। इसके लिए कुछ बातों का खास ख्याल रखें। आइए अब इन पॉइंट्स के बारे में थोड़ा विस्तार से बात करते हैं। मैथ को मजेदार बनाएं मैथ्स को बोरिंग बनाने के बजाय एक 'गेम' की तरह पेश करें। जब बच्चा इसे ‘टेस्ट का विषय’ मानता है तो डर बढ़ता है। लेकिन जब वही चीज गेम, क्विज या चैलेंज बन जाती है तो बच्चे का नजरिया बदलता है। इसके लिए आप घर पर टाइमर लगाकर 5 सवाल हल करने का छोटा गेम बना सकती हैं या सही जवाब पर स्टार सिस्टम रख सकती हैं। इससे बच्चा मैथ को बोझ नहीं, मजेदार एक्टिविटी के रूप में देखेगा। मैथ को रियल लाइफ से जोड़ें बच्चा जब तक यह नहीं समझेगा कि वह मैथ्स क्यों पढ़ रहा है, तब तक उसे इसमें दिलचस्पी नहीं आएगी। उसे बताएं कि मैथ कैसे हमारे रोजमर्रा के जीवन से जुड़ा हुआ है। इसके लिए उसे साथ बाजार ले जाएं और छोटे-छोटे हिसाब कराएं। इससे बच्चा मैथ का महत्व समझेगा। बच्चा तब तेजी से सीखता है, जब उसे समझ आता है कि मैथ रोजमर्रा की जिंदगी में काम आती है। बाजार में खरीदारी करते समय उसे बिल जोड़ने दें, जेब खर्च में बचत का हिसाब खुद करने दें। खेल के मैदान में स्कोर, टाइम और डिस्टेंस की काउंटिंग कराएं। जब उसे महसूस होगा कि मैथ ‘जिंदगी का हिस्सा’ है, तो उसका जुड़ाव अपने-आप बढ़ेगा। प्रेशर बिल्कुल न डालें और छोटे गोल सेट करें एक साथ पूरे सवाल खत्म करने का दबाव न बनाएं। उसे कहें, "आज हम सिर्फ 2 सवाल करेंगे, लेकिन उसे अच्छे से समझेंगे।" जब बच्चा छोटा लक्ष्य हासिल करता है, तो उसके ब्रेन में डोपामिन (हैप्पी हॉर्मोन) रिलीज होता है, जिससे उसका आत्मविश्वास बढ़ता है। याद रखें, धीमी लेकिन निरंतर गति पहाड़ जैसे सिलेबस को भी छोटा कर देती है। रिजल्ट नहीं, एफर्ट पर फोकस करें अक्सर हम बच्चे की तारीफ तभी करते हैं, जब उसके 10 में से 10 नंबर आते हैं। ऐसा न करके उसकी हर छोटी–छोटी कोशिश की तारीफ करें। अगर उसने एक कठिन सवाल को हल करने में 15 मिनट मेहनत की, भले ही उत्तर गलत आया हो, तो कहें, "मुझे खुशी है कि तुमने हार नहीं मानी और इसे हल करने का पूरा प्रयास किया।" इससे उसका 'फेल होने का डर' खत्म होगा। गलतियों को सीखने का हिस्सा बताएं जब वह गलती करे, तो उसे डांटने के बजाय कहें, ‘’कोई बात नहीं, हम गलतियों से ही सीखते हैं।’’ जब हम गलतियों को 'नॉर्मलाइज' कर देते हैं, तो बच्चा क्लास में सवाल पूछने से नहीं डरता है। विजुअल मेथड का इस्तेमाल करें आजकल यूट्यूब पर कई ऐसे चैनल्स हैं, जो एनिमेशन के जरिए मैथ समझाते-सिखाते हैं। साथ में बैठकर इसे बच्चे को दिखाएं। जो चीज दिखती है, वह जल्दी समझ में आती है। टीचर से मिलकर बात करें चूंकि बच्चा क्लास में बैठने से डर रहा है, इसलिए स्कूल का माहौल भी ठीक होना जरूरी है। इसके लिए टीचर से मिलें और उन्हें बताएं कि बच्चा 'मैथ एंग्जाइटी' से जूझ रहा है। उनसे कहें कि वे क्लास में उसे प्रोत्साहित करें और अचानक सबके सामने सवाल पूछकर उसे असहज न करें। टीचर बच्चे का डर आधा कर सकता है। जरूरत पड़ने पर ट्यूटर रखें कई बार स्कूल टीचर से बच्चे डरते हैं। इसके लिए एक शांत और इंटेलिजेंट ट्यूटर की मदद लें। ट्यूटर ऐसा होना चाहिए, जो सिलेबस पूरा करवाने के बजाय बच्चे के 'बेसिक्स' और 'कॉन्फिडेंस' पर काम करे। कभी-कभी बच्चे अपनों के बजाय किसी तीसरे व्यक्ति से ज्यादा शांति से सीखते हैं। मैथ्स को 'इंटेलिजेंस' का पैमाना न बनाएं अगर आपका बेटा बाकी विषयों में अच्छा है, तो इसका मतलब है कि वह होनहार है। हर बच्चे का दिमाग अलग होता है। कोई साइंस में अच्छा होता है तो कोई आर्ट में। जरूरी नहीं कि हर बच्चा 'मैथ्स जीनियस' ही बने। उसे यह भरोसा दिलाएं कि गणित में औसत रहना कोई अपराध नहीं है। जब उसके सिर से 'परफेक्ट' होने का बोझ उतरेगा तो उसका डर अपने आप कम होने लगेगा और वह रिलैक्स होकर सीखना शुरू कर देगा। अंत में यही कहूंगी कि एक मां के तौर पर आपका सबसे बड़ा काम उसे यह भरोसा दिलाना है कि अभ्यास से सबकुछ संभव है। जब उसे घर पर 'सेफ जोन' मिलेगा तो वह मैथ के डर से भी लड़ना सीख जाएगा। याद रखें, मैथ का डर एक दिन में नहीं बनता और एक दिन में खत्म भी नहीं होता है। लेकिन धैर्य, सकारात्मक माहौल और निरंतर सपोर्ट से बच्चे में धीरे-धीरे आत्मविश्वास वापस आ सकता है। ………………….. पेरेंटिंग से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए पेरेंटिंग- 6 साल का बेटा खूब तेज, होनहार है: लेकिन लोगों के सामने एकदम चुुप, बात ही नहीं करता, उसका ये शर्मीलापन कैसे दूर करूं? अक्सर पेरेंट्स मेहमानों के सामने बच्चे की प्रतिभा का प्रदर्शन करके 'गुड पेरेंटिंग' का सर्टिफिकेट चाहते हैं। वे चाहते हैं कि लोग कहें, "वाह! आपका बच्चा कितना टैलेंटेड है।" लेकिन इस दिखावे की दौड़ में हम यह भूल जाते हैं कि बच्चा कोई 'परफॉर्मिंग आर्टिस्ट' नहीं है। पूरी खबर पढ़िए…

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बुक रिव्यू- एक शानदार एपिक करियर कैसे बनाएं:सबसे जरूरी है जानना अपना पैशन और पर्पज, इसी से बनेगा ग्रोथ माइंडसेट, आएगा डिसिप्लिन

किताब- बनाएं एक शानदार करियर (बेस्टसेलर किताब 'बिल्ड एन एपिक करियर' का हिंदी अनुवाद) लेखक- अंकुर वारिकू प्रकाशक- पेंगुइन मूल्य- 299 रुपए ‘बनाएं एक शानदार करियर’ मशहूर आंत्रप्रेन्योर, कंटेंट क्रिएटर और लेखक अंकुर वारिकू की लेटेस्ट बुक है। ये किताब करियर को लेकर कन्फ्यूज युवाओं के लिए एक प्रैक्टिकल गाइड है। मौजूदा समय में ट्रेडिशनल और नॉन-ट्रेडिशनल फील्ड में करियर के हजारों ऑप्शन्स हैं। ऐसे में ज्यादातर लोग कन्फ्यूजन में गलत रास्ते चुन लेते हैं। वजह ये होती है कि लोग दूसरों की सक्सेस स्टोरी कॉपी करने की कोशिश करते हैं, लेकिन अपना विजन नहीं बनाते। नतीजतन उन्हें करियर में वो खुशी और सफलता नहीं मिलती, जो वह डिजर्व करते हैं। अंकुर वारिकू ने इस किताब में अपनी जिंदगी के रियल एक्सपीरियंस शेयर किए हैं और बताया है कि अपना पैशन कैसे पहचानें। उन्होंने किताब में बताया है कि सक्सेस माइंडसेट कैसे बनाएं, अच्छी आदतें कैसे डेवलप करें और खुद को कैसे पहचानें। यह ट्रेडिशनल सेल्फ-हेल्प बुक नहीं, बल्कि एक एक्शन-ओरिएंटेड किताब है। किताब क्या कहती है? इस किताब में करियर को बोझ नहीं, बल्कि एक रोमांचक यात्रा की तरह बताया गया है। इसके मुख्य पॉइंट्स ये हैं- पैशन बनाम पर्पज (उद्देश्य)- वारिकू कहते हैं कि करियर चुनने से पहले खुद से पूछें- "कौन सा काम मुझे ऊर्जा से भर देता है?" यह किताब आपको अपना असली हुनर पहचानने में मदद करती है। ग्रोथ माइंडसेट- लेखक अपनी असफलताओं को साझा करते हुए बताते हैं कि हार से डरना नहीं, बल्कि उसे सीख की तरह इस्तेमाल करना चाहिए। अनुशासन की शक्ति- मोटिवेशन अस्थायी है, लेकिन अनुशासन स्थायी है। लेखक ने अपने अनुभव से बताया है कि कैसे छोटी-छोटी आदतें करियर को नई ऊंचाइयों पर ले जाती हैं। वर्क-लाइफ बैलेंस- ‘एपिक करियर’ का मतलब सिर्फ काम नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, परिवार और शौक के बीच संतुलन बनाना भी है। ये किताब क्यों है इतनी खास? आजकल करियर की किताबें ज्यादातर थ्योरी से भरी होती हैं, लेकिन अंकुर का तरीका अलग है। छोटे-छोटे वाक्य, सीधी बातें, कोई भारी-भरकम शब्द नहीं। यह किताब फ्रेशर हो या एक्सपीरियंस्ड प्रोफेशनल, सबके लिए फिट बैठती है। इसमें एक खास चैप्टर है, जहां अंकुर तमाम कठिन सवालों के जवाब देते हैं। अंत में टेम्प्लेट्स, एक्शन प्लान और फ्रेमवर्क दिया गया है। इसमें बताया गया है कि- नीचे दिए ग्राफिक से किताब के आठ जरूरी सबक जानिए- अब इन पॉइंट्स को थोड़ा और विस्तार से समझते हैं, क्योंकि ये सिर्फ किताब की बातें नहीं, बल्कि जिंदगी की सच्चाई हैं। पैशन और पर्पज पहचानो, करियर खुद-ब-खुद एपिक बनेगा ज्यादातर लोग करियर चुनते समय दूसरों को देखते हैं। अगर कोई IAS बनकर सेटल हो गया या किसी ने स्टार्टअप करके करोड़ों रुपए बना लिए तो उसे कॉपी करने लगते हैं। जबकि अंकुर वारिकू लिखते हैं, पहले खुद से पूछो- ग्रोथ माइंडसेट बनाओ, असफलता को दोस्त बनाओ अंकुर ने अपनी जिंदगी की फेलियर स्टोरीज शेयर की हैं। कैसे उन्होंने कंपनियां बनाईं, फेल हुईं, लेकिन सीखते रहे और आगे बढ़े। किताब में बताया है कि फिक्स माइंडसेट छोड़ो, ग्रोथ माइंडसेट अपनाओ। हर फेलियर के बाद खुद से पूछो कि इससे मैंने क्या सीखा? अच्छी आदतें बनाओ, डिसिप्लिन से करियर चमकेगा मोटिवेशन आता-जाता है, लेकिन डिसिप्लिन हमेशा साथ रहता है। अंकुर बताते हैं कि वे पिछले 4 साल से लगातार हर साल एक किताब लिख रहे हैं। यह सिर्फ डिसिप्लिन की वजह से संभव हुआ है। छोटी-छोटी अच्छी आदतें बनाएं, रोज 30 मिनट पढ़ें, लिखें या नई स्किल सीखें। वर्क-लाइफ बैलेंस रखो, बर्नआउट से बचो किताब बताती है कि करियर एपिक बनाने का मतलब सिर्फ काम नहीं, बल्कि जिंदगी जीना भी है। फैमिली, हेल्थ और हॉबीज को इग्नोर मत करो। हफ्ते में एक दिन ऑफ रखो, उस दिन का पूरा समय सिर्फ खुद के लिए रखो। नेटवर्किंग और जॉब सर्च के प्रैक्टिकल टिप्स किताब में रेडीमेड टेम्प्लेट्स हैं, जैसे कि- कोल्ड ईमेलिंग की A-टू-Z गाइड दी गई है। वह कहते हैं कि हर हफ्ते 5 नए लोगों से बातचीत करो। जरूरी नहीं है कि आपको इससे कुछ हासिल ही हो, लेकिन नए कनेक्शंस बनाओ। लगातार सीखते रहो, कभी अटकोगे नहीं दुनिया बदल रही है, स्किल्स पुरानी हो रही हैं। किताब में रियल स्टोरीज का उदाहरण देकर बताया गया है कि कैसे लोग इंडस्ट्री चेंज करके सफल हुए। ऑनलाइन कोर्स करो, बुक्स पढ़ो और नई चीजें ट्राई करो। एक्शन प्लान बनाओ, सपनों को हकीकत में बदलो बुक के अंत में कुछ फ्रेमवर्क और वर्कशीट्स हैं, जो करियर प्लानिंग को आसान बनाते हैं। अपने 1 साल, 5 साल और 10 साल के गोल लिखो और छोटे स्टेप्स में अचीव करो। इसे क्यों पढ़ें? किताब के बारे में मेरी राय 'बनाएं एक शानदार करियर' उन लोगों के लिए एक 'जीपीएस' की तरह है, जो करियर की भीड़ में रास्ता भटक गए हैं। अंकुर वारिकू की ईमानदारी और सरल भाषा इस किताब को हर युवा की बुकशेल्फ का हिस्सा बनाने के लायक बनाती है। ……………… ये खबर भी पढ़िए बुक रिव्यू- नए पेरेंट्स के लिए एक जरूरी किताब: नए नन्हे मेहमान को कैसे पालें, पेरेंटिंग से जुड़े हर जरूरी सवाल का जवाब पेरेंटिंग एक बेहद खूबसूरत जर्नी है। हर शादीशुदा कपल इस पल का बेसब्री से इंतजार करता है। यह सिर्फ बच्चे की परवरिश नहीं, बल्कि खुद के सीखने, धैर्य रखने और भावनात्मक रूप से मैच्योर होने की प्रक्रिया भी है। इस सफर में खुशियां हैं, जिम्मेदारियां हैं और अनगिनत यादें हैं, जो परिवार को मजबूत बनाती हैं। आगे पढ़िए…

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The Hundred Auction में नहीं दिखेंगे शाहीन शाह अफरीदी, नीलामी से पहले ही पाकिस्तानी कप्तान बाहर

पहली बार द हंड्रेड में ऑक्शन का आयोजन हो रहा है, जिसमें 14 पाकिस्तानी खिलाड़ियों को जगह मिली है. पाकिस्तान के स्टार बल्लेबाज बाबर आजम और मोहम्मद रिजवान पहले ही ऑक्शन का हिस्सा नहीं थे और अब शाहीन भी इससे बाहर हो गए हैं. Thu, 12 Mar 2026 08:11:18 +0530

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