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क्या नीतीश कुमार फिर मारेंगे पलटी? राज्यसभा नामांकन के बाद एक्शन में दिखे; उठाया ये बड़ा कदम...

बिहार की राजनीति में एक बार फिर नीतीश कुमार चर्चा के केंद्र में हैं. हाल में सबको चौंकाते हुए नीतीश कुमार ने बिहार से राज्यसभा सदस्य के तौर पर नामांकन भर दिया. उनके इस फैसले ने सभी को हैरान कर दिया. आमतौर पर नीतीश कुमार अपने फैसलों से पलटने के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने ऐसा राजनीतिक इतिहास में कई बार किया है. वहीं उनके राज्यसभा जाने को लेकर उन्हीं पार्टी का एक धड़ा काफी नाराज नजर आया. साथ ही समर्थकों ने भी जमकर विरोध जताया. 

लेकिन इन सबके बीच 16 मार्च को राज्यसभा का चुनाव होना है और इस चुनाव से ठीक पहले एक बार फिर नीतीश कुमार बिहार में एक्शन मोड में नजर आए. नीतीश कुमार राज्यसभा जा रहे हैं बावजूद इसके वह सीमांचल क्षेत्र में सक्रिय नजर आए. उन्होंने कई जिलों का दौरान प्लान किया है और कुछ जिलों में अपनी मौजूदगी भी दर्ज करा दी है. नीतीश कुमार के करीबी सूत्रों की मानें तो भले ही वह राज्सभा जा रहे हों लेकिन बिहार की सियासत पर उनकी नजर बनी रहेगी. ऐसे में अटकलें लगाई जा रही हैं कि नीतीश कुमार एक बार फिर पलटी न मार दें. 

अमित शाह के बाद नीतीश का दौरा

सीमांचल को लेकर नीतीश कुमार की सक्रियता कुछ और संकेत दे रही है. दरअसल यहां पर हाल में अमित शाह ने दौरा किया था. उन्होंने यहां दो दिन का कैंप लगाया और कई लोगों को मुलाकात भी की. ये इलाका बंगाल से सटा हुआ बताया जा रहा है. बंगाल में विधानसभा चुनाव होना है लिहाजा ये क्षेत्र काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है. 

मुख्यमंत्री के रूप में बढ़ी सक्रियता

मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद से ही नीतीश कुमार लगातार प्रशासनिक गतिविधियों में व्यस्त हैं. वे परियोजनाओं का निरीक्षण कर रहे हैं, विभागीय समीक्षा बैठकें ले रहे हैं और पार्टी बैठकों में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं.

सबसे दिलचस्प बात यह है कि राज्यसभा जाने की चर्चा के बावजूद उनकी सक्रियता कम नहीं हुई है. खबरों के अनुसार वे सीमांचल क्षेत्र के जिलों का दौरा भी करने वाले हैं, जिसकी तारीखें तय कर दी गई हैं.आमतौर पर सत्ता से अलग होने की स्थिति में नेता थोड़ा शांत हो जाते हैं, लेकिन नीतीश कुमार का उत्साह अभी भी बरकरार दिखाई दे रहा है.

सीमांचल दौरे को लेकर बढ़ी राजनीतिक दिलचस्पी

मीडिया में यह चर्चा भी शुरू हो गई कि बिहार और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों को मिलाकर नया केंद्र शासित प्रदेश बनाने का प्रस्ताव सामने आ सकता है. ऐसे माहौल में नीतीश कुमार का सीमांचल दौरे का फैसला राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है.

राजनीतिक विश्लेषकों की नजर इस बात पर है कि वे घुसपैठ के मुद्दे पर क्या रुख अपनाते हैं. माना जाता है कि इस मुद्दे पर वे पहले भी कई बार भाजपा से अलग राय रखते रहे हैं.

राजनीति में एंट्री के बाद सक्रिय होंगे निशांत

इस बीच नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार भी अब सक्रिय राजनीति में कदम रखने जा रहे हैं. जेडीयू में शामिल होने के बाद उन्होंने राज्य के अलग-अलग जिलों का दौरा करने की योजना बनाई है.

निशांत का कहना है कि वे अपने पिता की ओर से किए गए विकास कार्यों को जनता तक पहुंचाना चाहते हैं. पार्टी के भीतर यह भी चर्चा है कि उन्हें भविष्य में सरकार में कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिल सकती है.

कुछ नेताओं का मानना है कि उन्हें उपमुख्यमंत्री की भूमिका दी जा सकती है. वहीं जेडीयू के कुछ कार्यकर्ता तो उन्हें भविष्य का मुख्यमंत्री बनाने की मांग भी उठाते रहे हैं.

क्या फिर बदल सकते हैं राजनीतिक समीकरण?

नीतीश कुमार की राजनीति का एक खास पहलू यह भी रहा है कि वे समय-समय पर अपने राजनीतिक फैसलों से सबको चौंकाते रहे हैं. 2017, 2022 और 2024 में हुए गठबंधन बदलावों की वजह से उनकी “फ्लिप-फ्लॉप” छवि भी चर्चा में रही है.

मौजूदा स्थिति में उनके पास मजबूत राजनीतिक आंकड़े हैं. जेडीयू के 85 विधायक हैं और विपक्षी गठबंधन भी संभावित सहयोग के लिए तैयार माना जाता है. ऐसे में राजनीतिक गलियारों में यह सवाल भी उठता रहता है कि भविष्य में कोई नया राजनीतिक समीकरण बन सकता है या नहीं.

क्या है नीतीश का अगला राजनीतिक कदम?

फिलहाल भाजपा और जेडीयू के बीच किसी बड़े मतभेद के संकेत नहीं मिल रहे हैं, लेकिन नीतीश कुमार की राजनीति हमेशा अप्रत्याशित मानी जाती रही है.

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनकी सक्रियता यह संकेत देती है कि वे अभी भी बिहार की राजनीति में अहम भूमिका निभाते रहेंगे. चाहे वह राज्यसभा के माध्यम से हो या पार्टी के भीतर नेतृत्व तय करने के जरिए.

आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या वे अपने बेटे निशांत कुमार को आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम करते हैं या फिर बिहार की सत्ता की कमान किसी और भरोसेमंद नेता को सौंपने का फैसला लेते हैं.

यह भी पढ़ें - हो गया तय, नीतीश कुमार के रहते ये काम करने जा रहे हैं बेटे निशांत कुमार, जेडीयू की बैठक में हुआ बड़ा फैसला

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देश में 10, 20 और 50 रुपए के नोटों की कोई कमी नहीं : केंद्र

नई दिल्ली, 10 मार्च (आईएएनएस)। देश में करेंसी सर्कुलेशन में 10,20 और 50 रुपए के नोटों की कोई कमी नहीं है। यह जानकारी सरकार की ओर से मंगलवार को संसद में दी गई।

केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने राज्य सभा में एक सवाल के जवाब में कहा कि आरबीआई के अनुसार, कम मूल्य के नोट परंपरागत रूप से एटीएम के माध्यम से नहीं दिए जाते रहे हैं।

उन्होंने सदन को सूचित किया, कम मूल्यवर्ग के नोटों को छोटे मूल्य के नोट वितरकों के माध्यम से वितरित करने के लिए एक पायलय प्रोजेक्ट शुरू किया गया है।

सरकार के अनुसार, चालू वित्त वर्ष (26 फरवरी तक) में केंद्रीय बैंक द्वारा 10 रुपए के 439.40 करोड़ नोट, 20 रुपए के 193.70 करोड़ नोट और 50 रुपए के 130.30 करोड़ नोटों की आपूर्ति की गई है।

पिछले वित्त वर्ष (वित्त वर्ष 2025) में 10 रुपए के 180 करोड़ नोट, 20 रुपए के 150 करोड़ नोट और 50 रुपए के 300 करोड़ नोटों की आपूर्ति की गई थी।

आरबीआई, एक सतत प्रक्रिया के तहत, विभिन्न मूल्यवर्ग के नोटों की आवश्यकता का आकलन करता है और सरकार को आवश्यक मूल्यवर्ग के नोटों के मिश्रण की सलाह देती है।

कम मूल्य के मुद्रा की मांग नोटों और सिक्कों के मिश्रण से पूरी की जाती है। इसके अलावा, डिजिटल भुगतान माध्यम कुल लेन-देन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जिनमें कम मूल्य के लेन-देन भी शामिल हैं।

एक अन्य प्रश्न का उत्तर देते हुए मंत्री जी ने कहा कि नेशनल पेमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 (31 दिसंबर, 2025 तक) में रुपे केसीसी कार्ड के माध्यम से कुल 3.72 लाख डिजिटल लेनदेन हुए हैं, जिनका मूल्य 111.17 करोड़ रुपए है।

केसीसी के तहत सभी पात्र किसानों को दी जाने वाली ऋण सीमा फसलों के वित्तपोषण के पैमाने, खेती योग्य क्षेत्र, फसल पैटर्न और संबंधित आवश्यकताओं के अनुसार निर्धारित की जाती है।

--आईएएनएस

एबीएस/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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