कल यानी 9 मार्च 2026 को हुई CBSE कक्षा 12वीं की गणित की परीक्षा अब एक अनोखे विवाद और इंटरनेट मीम की वजह से चर्चा में है। सोशल मीडिया पर यह दावा तेजी से वायरल हो रहा है कि बोर्ड परीक्षा के प्रश्न पत्र पर छपे एक QR कोड को स्कैन करने पर छात्र सीधे इंटरनेट के सबसे मशहूर प्रैंक 'Rickroll' का शिकार हो गए।
क्या है पूरा मामला?
परीक्षा के बाद Reddit और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर छात्रों ने स्क्रीनशॉट साझा करते हुए दावा किया कि जब उन्होंने प्रश्न पत्र पर दिए गए QR कोड को स्कैन किया, तो उन्हें कोई शैक्षणिक सामग्री मिलने के बजाय रिक एस्टली (Rick Astley) का मशहूर गाना 'Never Gonna Give You Up' दिखाई देने लगा। इंटरनेट की भाषा में इसे 'Rickrolling' कहा जाता है, जहाँ किसी को झांसा देकर इस म्यूजिक वीडियो पर भेजा जाता है।
स्टूडेंट्स द्वारा शेयर किए गए पोस्ट के अनुसार, पेपर पर QR कोड स्कैन करने पर रिक एस्टली का 'नेवर गोना गिव यू अप' म्यूज़िक वीडियो खुल गया, जिससे इसे आज़माने वाले लोग असल में "रिकरोल" हो गए।
यह दावा रेडिट जैसे फोरम पर तेज़ी से पॉपुलर हुआ, जहाँ स्टूडेंट्स ने स्क्रीनशॉट और रिएक्शन पोस्ट किए। हालाँकि, यह साफ़ नहीं है कि लिंक एग्जाम पेपर के सभी वर्शन पर दिखाई दिया या वायरल इमेज एक लिमिटेड केस को दिखाता है, जिससे यह एपिसोड एग्जाम के दिन की जिज्ञासा और इंटरनेट की लोककथाओं के बीच कहीं अटका हुआ है।
हालाँकि, इस दावे को अलग से वेरिफ़ाई करना अभी भी मुश्किल है। इंडिया टुडे ने दिल्ली और NCR के कई एग्जाम सेंटर्स में इस्तेमाल किए गए मैथ्स के क्वेश्चन पेपर की कॉपियों को रिव्यू किया, जहाँ स्टूडेंट्स ने कहा कि QR कोड ने उन्हें किसी एक्सटर्नल लिंक या वीडियो के बजाय “A” और “Q” जैसे सिंपल अल्फाबेट मार्कर पर भेज दिया।
सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ सेकेंडरी एजुकेशन, CBSE ने भी अब तक वायरल दावे पर कोई ऑफिशियल बयान जारी नहीं किया है, जिससे यह पक्का नहीं है कि कहा जा रहा “रिकरोल” किसी दूसरे पेपर पर हुआ था या सर्कुलेट हो रहे स्क्रीनशॉट गुमराह करने वाले हैं।
क्या है यह प्रैंक?
यह प्रैंक रिकरोलिंग को बताता है, जो एक इंटरनेट जोक है जिसमें यूज़र्स को रिक एस्टली के हिट गाने का म्यूज़िक वीडियो खोलने के लिए धोखा दिया जाता है, न कि उनकी उम्मीद के मुताबिक कंटेंट। यह मीम, जो 2000 के दशक के बीच में ऑनलाइन शुरू हुआ था, इंटरनेट के सबसे लंबे समय तक चलने वाले प्रैंक में से एक बना हुआ है।
जैसे ही क्वेश्चन पेपर की तस्वीरें ऑनलाइन फैलीं, Reddit यूज़र्स ने तुरंत अपनी हैरानी शेयर करना शुरू कर दिया। इस घटना पर चर्चा करते हुए एक थ्रेड में, एक यूज़र ने लिखा, “होली **** CBSE ने 12th को रिक्रॉल कर दिया!!?”, जिसमें स्टूडेंट्स के बीच हैरानी और मज़ाक का मिक्सचर दिखाया गया।
दूसरों ने इस प्रैंक के स्केल पर मज़ाक किया। एक कमेंट करने वाले ने मज़ाक में कहा, “जितने लोगों को रिक्रॉल हुआ, उससे यह सबसे अच्छा रिक्रॉल है जो मैंने देखा है,” जबकि दूसरे ने मज़ाक में कहा कि “2026 की शुरुआत पहले ही बहुत अच्छी हो चुकी है।”
सभी को यह मज़ेदार नहीं लगा। एजुकेशन फ़ोरम पर कुछ स्टूडेंट्स ने सवाल उठाया कि ऑफिशियल एग्जामिनेशन डॉक्यूमेंट पर ऐसा लिंक कैसे दिख सकता है, खासकर जब बोर्ड पेपर पर QR कोड आमतौर पर ऑथेंटिकेशन और सिक्योरिटी के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। एक Reddit यूज़र ने पूछा कि क्या यह मज़ाक सच में “एक गंभीर मुद्दे” की ओर इशारा कर सकता है अगर एग्जाम मटीरियल अलग कंटेंट से लिंक हो सकता है।
बोर्ड ने अभी तक इस बारे में डिटेल में कोई जानकारी नहीं दी है कि लिंक कैसे दिखा। लेकिन यह एपिसोड पहले ही भारत के बोर्ड एग्जाम सीज़न का एक अजीब फुटनोट बन गया है, जिसने तीन घंटे के स्ट्रेसफुल मैथ्स पेपर को देश के स्कूल सिस्टम और इंटरनेट के सबसे पुराने जोक्स में से एक के बीच एक अनचाही टक्कर में बदल दिया है।
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पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और संभावित बड़े युद्ध के बीच अब एक और सैन्य हलचल ने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है। इस बार मामला सीधे यूरोप और मध्य पूर्व के बीच स्थित एक बेहद रणनीतिक द्वीप से जुड़ा है साइपस। जी हां, तुर्की ने अचानक इस इलाके में अपनी सैन्य ताकत बढ़ाते हुए छह एप्सोलर फाइटर जेट और एयर डिफेंस सिस्टम तैनात कर दिए हैं। और सबसे बड़ी बात यह है कि यह तैनाती साइपरस के उस उत्तरी हिस्से में की गई है जिस पर तुर्की ने दशकों से कब्जा कर रखा है। दुनिया के लगभग सभी देश इस इलाके को साइपरस का हिस्सा मानते हैं। लेकिन तुर्की इसे अलग देश बताता है और वही अकेला देश है जो इसे मान्यता देता है। यही वजह है कि तुर्की की यह नई सैन्य तैनाती अब अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक नई बहस और तनाव को जन्म दे रही है। तुर्की के रक्षा मंत्रालय ने घोषणा करते हुए कहा कि उत्तरी साइपस में छह एप्स 16 फाइटिंग फोल्कन लड़ाकू विमान और एयर डिफेंस सिस्टम तैनात किए गए हैं। अंकारा का दावा है कि यह कदम वहां रहने वाले तुर्क समुदाय की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए उठाया गया है। लेकिन एक्सपर्टों का मानना है कि इसके पीछे असली वजह पश्चिम एशिया में तेजी से बदलते सैन्य हालात हैं।
दरअसल ईरान और इज़राइल अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने पूरे क्षेत्र को बेहद संवेदनशील बना दिया है। अगर यह संघर्ष और फैलता है, तो इसका असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि यूरोप और भूमध्य सागर के इलाकों तक पहुंच सकता है। यही कारण है कि तुर्की अब पहले से ही अपनी सैन्य तैयारियों को मजबूत कर रहा है। तुर्की के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक यह तैनाती एक चरणबद्ध सुरक्षा योजना का हिस्सा है। सरकार का कहना है कि अगर क्षेत्रीय हालात और बिगड़ते हैं तो आगे और भी सैन्य कदम उठाए जा सकते हैं। लेकिन इस कदम का एक और पहलू भी है जो इसे और ज्यादा संवेदनशील बनाता है। साइपरस भारत के करीबी मित्र देशों में से एक माना जाता है। भारत और साइपस के बीच दशकों से मजबूत कूटनीतिक और आर्थिक संबंध रहे हैं। यूरोपीय यूनियन का सदस्य होने के कारण साइपस का महत्व और भी बढ़ जाता है। साइपस का दक्षिण हिस्सा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के नियंत्रण में है और वही यूरोपीय यूनियन का हिस्सा है। वहीं उत्तरी साइपरस पर तुर्की का कब्जा है और वही इलाके में तुर्की की सेना तैनात है। अब उसी क्षेत्र में F16 लाख विमानों की तैनाती ने सुरक्षा एक्सपर्टों को चिंतित कर दिया है।
दरअसल साइपरस का भू राजनीतिक महत्व बेहद ज्यादा है। यह द्वीप यूरोप, मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका के बीच स्थित है और भूमध्य सागर में रणनीतिक रूप से बेहद अहम जगह है। अगर यहां किसी भी तरह का सैन्य संघर्ष शुरू होता है तो उसका असर पूरे क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है। इसी बीच पिछले सप्ताह एक और घटना ने स्थिति को और ज्यादा गंभीर बना दिया। साइपस में स्थित ब्रिटेन के सैन्य एयरबेस आरएफ अक्रुत्री के पास एक ईरानी ड्रोन गिरा था। सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि यह ड्रोन लेबनान के ईरान समर्थित संगठन हिजबुल्लाह की ओर से भेजा गया। इस घटना ने यूरोपीय देशों की चिंता बढ़ा दी। इसी वजह से अब कई यूरोपीय देश भी साइपस के आसपास अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ानी शुरू कर चुके हैं। लेकिन तुर्की इस कदम से नाराज है। अंकारा का कहना है कि यूरोपीय देशों की सैन्य तैनाती से साइपरस अनावश्यक रूप से बड़े संघर्ष में खिस सकता है। यानी एक तरफ यूरोपीय देश सुरक्षा बढ़ा रहे हैं और दूसरी तरफ तुर्की भी अपनी सैन्य ताकत बढ़ा रहा है। और इससे पूरे इलाके में सैन्य गतिविधियां भी तेजी से बढ़ती दिखाई दे रही हैं।
हालात तब और ज्यादा गंभीर हो गए जब पिछले सप्ताह नाटो की एयर डिफेंस सिस्टम ने तुर्की के हवाई क्षेत्र में घुसी एक बैलेस्टिक मिसाइल को मार गिराया। बताया जा रहा है कि यह मिसाइल ईरान की ओर से दागी गई थी। हालांकि इस घटना की पूरी पृष्ठी अभी तक नहीं हो पाई है। लेकिन इसके बाद तुर्की ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी। तुर्की ने साफ कहा कि उसके हवाई क्षेत्र की ओर अगर कोई और मिसाइल भेजी गई तो इसका जवाब कड़ा दिया जाएगा। इन घटनाओं ने यह संकेत दिए कि पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव अब धीरे-धीरे दूसरे क्षेत्रों को भी प्रभावित करने लगे हैं। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर अब साइपरस और उसके आसपास बढ़ती सैन्य गतिविधियों पर टिकी है क्योंकि अगर यहां हालात बिगड़ते हैं तो इसका असर केवल यूरोप या मध्यपूर्व तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि वैश्विक राजनीति और सुरक्षा संतुलन पर भी पड़ सकता है।
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