Middle East Tension: आखिर क्यों अब तक ईरान के समर्थन में नहीं उतरे हूती लड़ाके? उन्हें किस बात का सता रहा है डर?
Middle East Tension: इस्राइल और अमेरिका मिलकर ईरान पर ताबड़तोड़ हमला कर रहे हैं. मिडिल ईस्ट में जिस वजह से तनाव फैल गया है. युद्ध की आग सिर्फ ईरान तक ही सीमित नहीं है, बल्कि सऊदी अरब, लेबनान और यूएई सहित कुल 12 देशों में फैल चुकी है. हालांकि, ध्यान देने वाली बात है कि युद्ध के नौ दिन बीत जाने के बाद भी यमन इस पूरे युद्ध से दूर है.
यमन में हूती विद्रोही रहते हैं. इन्हें ईरान का सहयोगी माना जाता है. साल 2023 में गाजा में शुरू हुए युद्ध के बाद से हूती विद्रोहियों ने इस्राइल पर कई बार हमला किया था. इस्राइल ने भी हूतियों को मुंहतोड़ जवाब दिया था. पिछले साल जून में ईरान और इस्राइल के बीच 12 दिन युद्ध हुआ था, तब भी हूती विद्रोही इस युद्ध में शामिल हुए थे. हालांकि, 28 फरवरी से अमेरिका और इस्राइल द्वारा ईरान पर शुरू हुए हमले के बाद से अब तक हूती विद्रोहियों ने ईरान के समर्थन में सिर्फ बयान ही जारी किए हैं. हालांकि, ये साफ नहीं है कि हूती इस युद्ध से आगे भी दूर रह पाएंगे या फिर नहीं.
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अमेरिका-इजराइल के हमले से बचना मकसद
एक्सपर्ट्स का कहना है कि हूती इस युद्ध में शामिल होंगे. वर्तमान में युद्ध से दूर रहना उनकी किसी रणनीति का हिस्सा हो सकती है. मिडिल ईस्ट के मामलों पर नजर रखने वाले एक एक्सपर्ट्स ने कहा कि हूती विद्रोहियों की सबसे बड़ी प्राथमिकता ये है कि अमेरिका और इस्राइल की सीधी कार्रवाई से कैसे बचा जाए.
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यमन के प्रधानमंत्री की हो गई थी मौत
पिछले साल अगस्त में यमन में इस्राइल ने हवाई हमले किए थे, जिसमें हूती सरकार के लगभग 12 सीनियर मेंबर मारे गए थे. इस हमले में यमन के प्रधानमंत्री अहमद अल-रहावी और आर्मी चीफ मोहम्मद अल-घुमारी की मौत हो गई थी. हूती विद्रोहियों के लिए ये बहुत बड़ा नुकसान था.
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इजराइल के हमलों के बाद हूती विद्रोही सतर्क हुए
एक्सपर्ट्स का कहना है कि हूती विद्रोहियों की लीडरशिप इस घटना के बाद ज्यादा सतर्क हो गई थी. उनको डर है कि अगर वह कोई बड़ा कदम उठाते हैं तो उनके नियंत्रण वाले इलाकों में भारी हवाई हमले हो सकते हैं. हूती विद्रोहियों को इस्राइल की खुफिया क्षमता का भी डर सता रहा है. उनको आशंका है कि उनकी टॉप लीडरशिप को इस्राइल फिर से निशाना बना सकता है.
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एक्सपर्ट्स का कहना है कि तमाम हमलों के बावजूद हूती विद्रोहियों को हल्के में नहीं लिया जा सकता है. पिछले साल हुए नुकसान के बावजूद हूती लड़ाके पूर्ण रूप में कमजोर नहीं हुए हैं. वे अब भी अपने विरोधियों पर हमले करने की क्षमता रखते हैं. एक्सपर्ट का कहना है कि अमेरिका या इस्राइल अगर सीधे तौर पर उन पर दोबारा हमला करते हैं या फिर यमन में उनके विरोधी गुट फिर से कोई सैन्य अभियान शुरू करते हैं तो हूती लड़ाके चुप नहीं रहेंगे. वे फिर से तेज हमले कर सकते हैं.
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