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यूएई का दावा: ईरान की 12 बैलिस्टिक मिसाइलें और 17 ड्रोन मार गिराए

अबू धाबी, 9 मार्च (आईएएनएस)। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने ईरान की ओर से दागी गई कई बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन को हवा में ही नष्ट कर दिया। मंत्रालय के मुताबिक सोमवार को किए गए हमले में कुल 15 बैलिस्टिक मिसाइलों का पता चला, जिनमें से 12 को इंटरसेप्ट कर मार गिराया गया, जबकि तीन मिसाइलें समुद्र में गिर गईं और किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ।

रक्षा मंत्रालय ने यह भी बताया कि मिसाइलों के साथ-साथ ड्रोन के जरिए भी हमला किया गया था। अधिकारियों के अनुसार कुल 18 ड्रोन देखे गए, जिनमें से 17 को वायु रक्षा प्रणाली ने नष्ट कर दिया, जबकि एक ड्रोन संयुक्त अरब अमीरात के क्षेत्र में गिर गया। हालांकि अब तक किसी बड़े नुकसान या हताहत की सूचना नहीं है।

यूएई का कहना है कि देश की वायु रक्षा प्रणाली पूरी तरह सतर्क है और किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए लगातार निगरानी रखी जा रही है। सरकार ने नागरिकों को आश्वस्त किया है कि सुरक्षा एजेंसियां हालात पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।

मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष के बीच यूएई पर मिसाइल और ड्रोन हमलों का खतरा लगातार बना हुआ है। रक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक यूएई की ओर कुल 253 बैलिस्टिक मिसाइलें और लगभग 1,440 ड्रोन दागे जा चुके हैं। इनमें से ज्यादातर को वायु रक्षा प्रणालियों ने हवा में ही नष्ट कर दिया।

बयान के अनुसार, इन हमलों में 4 पाकिस्तानी, नेपाली और बांग्लादेशी नागरिकों की मौत हो गई है। वहीं 117 लोग मामूली रूप से घायल हो गए। घायलों में यूएई, मिस्र, सूडान, इथियोपिया, फिलीपींस, पाकिस्तान, ईरान, भारत, बांग्लादेश, श्रीलंका, अजरबैजान, यमन, युगांडा, इरिट्रिया, लेबनान, अफगानिस्तान, बहरीन, कोमोरोस, तुर्की, इराक, नेपाल, नाइजीरिया, ओमान, जॉर्डन और फिलिस्तीन के नागरिक शामिल हैं।

इस बीच, इजरायल ने एक बार फिर ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले शुरू किए हैं। इजरायली सेना के मुताबिक, राजधानी तेहरान, मध्य ईरान के इस्फहान और दक्षिणी इलाकों में ईरानी शासन से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाकर हवाई हमले किए जा रहे हैं।

इजरायली सेना ने कहा कि उसने ईरान में वाइड-स्केल हमलों की नई लहर शुरू की है। इनमें कई शहरों को एक साथ निशाना बनाया गया। इजरायल का दावा है कि हमले ईरानी शासन के ढांचे से जुड़े ठिकानों को लक्ष्य बनाकर किए जा रहे हैं।

--आईएएनएस

केआर/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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केंद्र सरकार ने एलपीजी की जमाखोरी को रोकने के लिए सिलेंडर बुकिंग की अवधि बढ़ाई

नई दिल्ली, 9 मार्च (आईएएनएस)। वैश्विक अस्थिरता के समय में दुनिया में बढ़ती प्राकृतिक गैस की कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने सोमवार को बड़ा फैसला लेते हुए एलपीजी सिलेंडर बुकिंग की अवधि को 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया। इसकी वजह जमाखोरी को रोकना है।

अमेरिका, इजरायल- ईरान युद्ध के कारण उत्पन्न अनिश्चितताओं के बीच बाजार में घबराहट में खरीदारी के संकेत मिलने के बाद केंद्र ने यह कदम उठाया है।

सरकारी अधिकारियों ने बताया कि देश में एलपीजी की पर्याप्त आपूर्ति उपलब्ध है और स्टॉक को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने के उपाय के रूप में एलपीजी सिलेंडरों की बुकिंग का समय बढ़ा दिया गया है।

यह कदम इसलिए उठाया गया है क्योंकि मध्य पूर्व में बढ़ते युद्ध के कारण आपूर्ति बाधित होने की आशंका से बुकिंग बढ़ने से मांग में 15 से 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी।

एक अधिकारी ने बताया कि औसतन परिवार एक वर्ष में 14.2 किलोग्राम के 7-8 एलपीजी सिलेंडर का उपयोग करते हैं और सामान्यतः उन्हें 6 सप्ताह से कम समय में सिलेंडर रिफिल कराने की आवश्यकता नहीं होती है।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की दरें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर होने के बावजूद फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि नहीं की जाएगी। इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी तेल विपणन कंपनियां फिलहाल मौजूदा लागत दबाव को वहन करेंगी।

उन्होंने कहा कि सरकार वैश्विक तेल बाजारों पर कड़ी नजर रख रही है, लेकिन फिलहाल खुदरा ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी की कोई योजना नहीं है।

इसके अतिरिक्त, केंद्र ने सोमवार को संसद को सूचित किया गया कि भारत के पास वर्तमान में कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के भंडारण की कुल 74 दिनों की क्षमता है, जो भू-राजनीतिक संघर्ष जैसी प्रतिकूल परिस्थितियों में आपूर्ति में होने वाली रुकावटों से निपटने में सहायक हो सकती है।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने राज्यसभा को लिखित उत्तर में बताया, “सरकार ने 5.33 मिलियन मीट्रिक टन (एमएमटी) की कुल क्षमता वाली रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार सुविधाएं स्थापित की हैं, जो भू-राजनीतिक संघर्ष जैसे अल्पकालिक आपूर्ति संकटों के लिए एक बफर के रूप में कार्य कर सकती हैं। यह लगभग 9.5 दिनों की कच्चे तेल की आवश्यकता को पूरा करने के लिए है। इसके अतिरिक्त, देश में तेल विपणन कंपनियों के पास कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के भंडारण की 64.5 दिनों की क्षमता है। इसलिए, कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के भंडारण की वर्तमान कुल राष्ट्रीय क्षमता 74 दिनों की है।”

--आईएएनएस

एबीएस/

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