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भारत के डिजिटल प्लेटफॉर्म से कारोबार करना हुआ आसान, एनएसडब्ल्यूएस ने दी 8.29 लाख मंजूरियां

नई दिल्ली, 9 मार्च (आईएएनएस)। भारत के डिजिटल प्लेटफॉर्म सिस्टम ने देश में कारोबार शुरू करने से लेकर उसके विस्तार तक की प्रक्रिया को पहले से ज्यादा तेज और आसान बना दिया है। केंद्र सरकार ने सोमवार को बताया कि नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम (एनएसडब्ल्यूएस), गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) और एमसीए21 जैसे डिजिटल टूल्स की मदद से व्यवसाय से जुड़ी कई प्रक्रियाएं सरल हो गई हैं।

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, देश के डिजिटल ढांचे ने कंपनियों के लिए बाजार तक पहुंच बढ़ाई है और लाखों व्यवसायों के लिए वित्तीय अवसरों के दरवाजे खोले हैं।

बयान में कहा गया कि नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम (एनएसडब्ल्यूएस) के माध्यम से अब तक 32 केंद्रीय विभागों और 32 राज्यों में 8,29,750 से अधिक मंजूरियां दी जा चुकी हैं। इससे उद्योगों को एक ही प्लेटफॉर्म पर कई सरकारी मंजूरियां प्राप्त करने में आसानी हुई है।

इसके अलावा, एमसीए21 प्रोजेक्ट भारत के कॉर्पोरेट सिस्टम में बड़ा बदलाव ला रहा है। यह एक एआई-आधारित डिजिटल पहल है, जो पारदर्शिता को काफी बढ़ाती है। इस सिस्टम में ई-स्क्रूटनी (जांच), ई-एडजुडिकेशन (निर्णय) और ई-कंसल्टेशन (परामर्श) जैसी उन्नत सुविधाएं शामिल हैं। वर्ष 2021 से 2025 के बीच इस प्लेटफॉर्म पर करीब 3.84 करोड़ आवेदन दर्ज किए गए।

उद्यम रजिस्ट्रेशन पोर्टल ने भी एमएसएमई सेक्टर के लिए बड़ी भूमिका निभाई है। 12 फरवरी 2026 तक इस पोर्टल पर 7.71 करोड़ रजिस्ट्रेशन किए जा चुके हैं और इससे लगभग 33.97 करोड़ रोजगारों को समर्थन मिला है।

यह पोर्टल एमएसएमई के लिए मुफ्त, पेपरलेस और स्वयं-घोषणा आधारित पंजीकरण प्रणाली प्रदान करता है। यह आयकर विभाग और जीएसटी नेटवर्क के डेटाबेस से जुड़ा हुआ है, जिससे पूरी प्रक्रिया डिजिटल और बिना दस्तावेजों के पूरी हो जाती है और प्रशासनिक बाधाएं कम होती हैं।

सरकार का कहना है कि केंद्र और राज्यों के डिजिटल सुधारों को जोड़कर भारत उद्यमियों और कारोबारियों के लिए पारदर्शी, तेज और भरोसेमंद व्यापार वातावरण तैयार कर रहा है।

गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) भी देश का बड़ा डिजिटल खरीद प्लेटफॉर्म बन गया है। यह प्लेटफॉर्म महिला उद्यमियों, स्टार्टअप्स, सूक्ष्म और लघु उद्यमों, कारीगरों, स्वयं सहायता समूहों और दिव्यांग उद्यमियों को भी बाजार से जोड़ता है।

वित्त वर्ष 2026 में 12 फरवरी तक जीईएम प्लेटफॉर्म पर 4 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा के ऑर्डर दर्ज किए गए और कुल 60 लाख से अधिक ऑर्डर पूरे किए गए।

इसके अलावा, जीईएम के ऑक्शन मॉड्यूल के जरिए दिसंबर 2021 से नवंबर 2025 के बीच 2,200 करोड़ रुपए से अधिक की नीलामी हुई, जिसमें 23,000 से ज्यादा बोलीदाता और 17,000 से अधिक नीलामीकर्ता शामिल हुए।

भारत ने केंद्र और राज्य स्तर पर मंजूरी प्रक्रियाओं को सिंगल विंडो डिजिटल पोर्टल के माध्यम से एकीकृत करके प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है।

सरकार ने इसके अलावा परिवेश और ई-ग्राम स्वराज पोर्टल जैसे अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म भी शुरू किए हैं, जो पारदर्शिता बढ़ाने, लागत कम करने और नियमों के पालन को आसान बनाने में मदद कर रहे हैं।

--आईएएनएस

डीबीपी/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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न्यूजीलैंड, इंग्लैंड और साउथ अफ्रीका पर भी हुई धनवर्षा, पाकिस्तान भी नहीं लौटा खाली हाथ, जानें पूरी जानकारी

2026 टी20 वर्ल्ड कप की विजेता टीम इंडिया पर खूब सारा पैसा बरसा है। भारतीय टीम को 27.48 करोड़ रुपये की प्राइज मनी मिली है। रविवार को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेले गए फाइनल मैच में टीम इंडिया ने न्यूजीलैंड को मात दी। वहीं उपविजेता रहने के बाद भी न्यूजीलैंड टीम पर धनवर्षा हुई। 

आपको बता दें कि, आईसीसी ने टी20 वर्ल्ड कप 2026 के लिए करीब 120 करोड़ रुपये का प्राइज पूल रखा था। क्या भारत और न्यूजीलैंड के अलावा बाकी टीमों को भी प्राइज पूल का कुछ हिस्सा मिला है। यहां देख लीजिए पूरी लिस्ट, किन टीमों को कितना-कितना पैसा मिला। 

टीम इंडिया को वर्ल्ड चैंपियन बनने के लिए 3 मिलियन अमेरिकी डॉलर यानी भारतीय करेंसी में करीब 27.48 करोड़ मिले हैं, ये प्राइज मनी पिछले वर्ल्ड कप से करीब 4 करोड़ॉ रुपये ज्यादा है। वहीं 2026 टी20 वर्ल्ड कप की उपविजेता न्यूजीलैंड को करीब 14.65 करोड़ रुपये का इनाम मिला है। 

विजेता-भारत- 27.48 करोड़
उपविजेता- न्यूजीलैंड- 14.65 करोड़
 
बाकी टीमों को कितना पैसा मिला?
सेमीफाइनल में हारने वाली प्रत्येक टीम को करीब 7.25 करोड़ रुपये मिले। इसका मतलब इंग्लैंड और साउथ अफ्रीका, दोनों को 7.24 करोड़ रुपये मिले। 

सुपर 8 स्टेज में बाहर होने वाली प्रत्येक टीम को 3.48 करोड़ रुपये मिले। जिम्बाब्वे, पाकिस्तान, श्रीलंका और वेस्टइंडीज को 3.48 करोड़ रुपये मिले। 

इंग्लैंड- 7.24 करोड़
दक्षिण अफ्रीका- 7.24 करोड़
पाकिस्तान- 3.48 करोड़
जिम्बाब्वे- 3.48 करोड़
श्रीलंका- 3.48 करोड़
वेस्टइंडीज- 3.48 करोड़

ऐसा नहीं है कि ग्रुप स्टेज में ही बाहर होने वाली 12 टीम खाली हाथ घर लौट गई हैं। ऑस्ट्रेलिया, अफगानिस्तान, कनाडा, यूएई, यूएसए, नीदरलैंड्स, स्कॉटलैंड, नेपाल, आयरलैंड, इटली, ओमान और नामीबिया, प्रत्येक को 2.29 करोड़ रुपये का ईनाम मिला। 
Mon, 09 Mar 2026 19:45:59 +0530

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