अमेरिका और इजराइल के साथ जारी युद्ध के बीच ईरान ने अपने नागरिकों और खास तौर पर विदेशों में रहने वाले ईरानियों को कड़ा संदेश दिया है। तेहरान ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जो भी व्यक्ति अमेरिका, इजराइल या उनके सहयोगी देशों के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ किसी भी प्रकार की कार्रवाई करेगा, उसे मौत की सजा दी जा सकती है और उसकी देश में मौजूद संपत्ति भी जब्त की जा सकती है। हम आपको बता दें कि ईरान के अभियोजक कार्यालय ने कहा है कि यदि कोई व्यक्ति दुश्मन देशों या उनसे जुड़े एजेंटों के लिए काम करता है, सूचनाएं देता है या देश की सुरक्षा के खिलाफ किसी भी प्रकार की गतिविधि में शामिल होता है, तो यह गंभीर अपराध माना जाएगा। अधिकारियों के अनुसार ऐसे मामलों में कठोरतम सजा यानी मौत की सजा तक दी जा सकती है।
ईरान की चेतावनी का एक कारण विदेशों में रहने वाले सरकार विरोधी ईरानी भी माने जा रहे हैं। यूरोप, उत्तरी अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले कई ईरानी नागरिकों ने हाल के अमेरिकी हमलों और अली खामेनेई की मौत की खबर के बाद जश्न मनाया था। तेहरान ने इसे देश विरोधी गतिविधि बताते हुए साफ किया है कि ऐसे लोगों पर सख्त कार्रवाई हो सकती है।
ईरान की चेतावनी ऐसे समय सामने आई है जब पश्चिम एशिया में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच सैन्य टकराव लगातार तेज हो रहा है। हाल के दिनों में अमेरिका और इजराइल द्वारा किए गए हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई थी। इसके बाद ईरान की विशेषज्ञ परिषद ने उनके पुत्र मोजतबा खामेनेई को नया सर्वोच्च नेता घोषित कर दिया।
उधर, सत्ता परिवर्तन के बाद ईरान की राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था में सख्ती साफ दिखाई दे रही है। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड ने नए सर्वोच्च नेता के प्रति पूर्ण निष्ठा की घोषणा की है और कहा है कि वह उनके आदेशों का पूरी तरह पालन करेगा। राजधानी तेहरान में हजारों लोग सड़कों पर उतरे और नए नेता के समर्थन में नारे लगाए।
इस बीच युद्ध का असर केवल ईरान तक सीमित नहीं रहा है बल्कि पूरे पश्चिम एशिया में इसका प्रभाव दिखाई दे रहा है। इजराइल ने तेहरान में बैलिस्टिक मिसाइल ठिकानों और लेबनान की राजधानी बेरूत में हिजबुल्लाह के ढांचों पर नए हवाई हमले किए हैं। वहीं बहरीन के बापको तेल शोधनालय और इराक में अमेरिकी ठिकानों पर ड्रोन हमलों की खबरें भी सामने आई हैं।
युद्ध के कारण मानवीय संकट भी गहराता जा रहा है। ईरान में अब तक एक हजार तीन सौ से अधिक नागरिकों के मारे जाने की खबर है। वहीं अमेरिकी सेना के अनुसार शुरुआती जवाबी हमलों में घायल एक और सैनिक की मौत हो गई है, जिससे मरने वाले अमेरिकी सैनिकों की संख्या सात हो गई है।
उधर, तेहरान ने साफ कर दिया है कि जब तक सैन्य हमले जारी रहेंगे तब तक किसी भी प्रकार की मध्यस्थता या युद्धविराम पर चर्चा का कोई अर्थ नहीं है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि देश अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है और दुश्मनों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई जारी रखेगा।
ईरान ने अमेरिका और इजराइल पर गंभीर आरोप भी लगाए हैं। तेहरान का कहना है कि दोनों देश मिलकर ईरान को कमजोर करना चाहते हैं और उसके तेल संसाधनों पर नियंत्रण हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। ईरान ने यह भी कहा कि हाल के हमलों ने अंतरराष्ट्रीय कानून को खतरे में डाल दिया है।
दूसरी ओर, युद्ध का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण दुनिया की करीब बीस प्रतिशत तेल आपूर्ति प्रभावित हो रही है। इसके चलते कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है और ब्रेंट तेल की कीमत 117 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऊर्जा ढांचे पर हमले जारी रहे तो तेल की कीमत दो सौ डॉलर प्रति बैरल तक भी पहुंच सकती है।
इस बीच, कई देशों ने अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। कुछ देशों ने विशेष विमान भेजकर पश्चिम एशिया में फंसे लोगों को वापस लाने की तैयारी की है। वहीं सुरक्षा हालात का असर विमान सेवाओं पर भी पड़ रहा है। क्षेत्र में हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंध के कारण कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को वापस लौटना पड़ा या लंबा रास्ता अपनाना पड़ रहा है।
उधर, भारत भी इस मुद्दे पर नजर रख रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज पश्चिम एशिया और मध्य पूर्व के हालात को लेकर एक बड़ी बैठक की जिसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, एनएसए अजित डोभाल, सीडीएस जनरल अनिल चौहान तथा अन्य महत्वपूर्ण लोग शामिल हुए। इससे पहले आज संसद परिसर में भी विदेश मंत्री, एनएसए और सीडीएस के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक हुई थी।
बहरहाल, अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रहा यह संघर्ष केवल सैन्य टकराव नहीं रह गया है। आने वाले दिनों में यह युद्ध पश्चिम एशिया ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की राजनीति और अर्थव्यवस्था को गहराई से प्रभावित कर सकता है।
Continue reading on the app
भारतीय जनता पार्टी द्वारा आयोजित जन आशीर्वाद यात्रा के सातवें दिन रविवार को भारी जन उपस्थिति और समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिली। कार्यक्रम की शुरुआत मार्गेरिटा निर्वाचन क्षेत्र से हुई, जिसे लोकप्रिय रूप से काले हीरों का शहर कहा जाता है, और ऐतिहासिक तेल नगर दिगबोई से गुजरते हुए माकुम निर्वाचन क्षेत्र में समाप्त हुआ। यात्रा के दौरान मिली व्यापक जनसमर्थन ने हिमंता बिस्वा शर्मा को ऊर्जा प्रदान की, जिन्होंने असम के विकास और प्रगति के लिए काम जारी रखने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। असम प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष और सांसद दिलीप सैकिया पूरे कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री के साथ रहे और संगठनात्मक नेतृत्व और सहयोग प्रदान किया।
पार्टी के राज्य मुख्यालय, अटल बिहारी वाजपेयी भवन से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में भाजपा प्रवक्ता प्रांजल कलिता ने कहा कि चुनावों से पहले, समाज के सभी वर्गों के लोगों ने उत्साहपूर्वक "जन आशीर्वाद यात्रा" में भाग लिया, जिससे भाजपा मजबूत हुई और विपक्षी ताकतें रक्षात्मक स्थिति में आ गईं। पिछले सात दिनों में मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 800 किलोमीटर से अधिक की यात्रा की और 25 से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों में सीधे जनता से मुलाकात की। यात्रा के दौरान जनता ने उनका हार्दिक स्वागत किया, उन्हें प्यार से मामा कहकर पुकारा और असम के विकास के लिए उनके निरंतर प्रयासों के लिए प्रोत्साहन और आशीर्वाद दिया।
इस यात्रा में कई यादगार पल आए। कुछ लोगों ने मुख्यमंत्री का आशीर्वाद लेने के लिए शादी समारोहों से दूरी बना ली, जबकि अन्य ने मुख्यमंत्री उद्यमिता अभियान के तहत प्राप्त वित्तीय सहायता से आत्मनिर्भर बनने के लिए आभार व्यक्त किया। कई नागरिकों ने पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए उन्हें धन्यवाद दिया, जबकि अन्य ने उनका हाथ थामकर पवित्र नाम-घोष मंत्रों का पाठ किया और उनकी सफलता और कल्याण के लिए प्रार्थना की।
इस उल्लेखनीय राजनीतिक घटनाक्रम ने सत्ताधारी और विपक्षी दोनों दलों के नेताओं का ध्यान आकर्षित किया। ऊपरी असम से लेकर निचले असम तक, और बराक घाटी से लेकर ब्रह्मपुत्र घाटी तक, सार्वजनिक चर्चाओं में 'जन आशीर्वाद यात्रा' के इर्द-गिर्द ही चर्चाएं छाई रहीं। जनता की भारी भागीदारी ने भाजपा कार्यकर्ताओं के उत्साह को दोगुना कर दिया, वहीं विपक्ष पर काफी दबाव भी डाला। असम में विपक्षी दल, जो पहले से ही सीट बंटवारे को लेकर आंतरिक कलह में उलझे हुए थे, एकजुट होकर सामने आने में असमर्थ रहे। असम की जनता ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों द्वारा फैलाए गए आरोपों, साजिशों और गलत सूचनाओं को खारिज करते हुए मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा को अपना समर्थन दिया।
Continue reading on the app