घर नहीं बंकर है ये! 200 साल पहले अंग्रेज भी नहीं हिला पाए एक भी ईंट, बिना सरिया-सीमेंट के कैसे बना मजबूत?
Ajab Gajab Building MP: मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले के सिंहपुर गांव में बना एक 200 साल पुराना घर आज भी अपनी मजबूती और इतिहास की वजह से चर्चा में है. इस घर की खास बात यह है कि अंग्रेज अफसर लार्ड फिशर द्वारा चलाई गई गोलियां भी इस मकान को नुकसान नहीं पहुंचा सकीं. तिवारी जमींदार परिवार का यह घर चूना और ईंटों से बना हुआ है और इसमें आज भी परिवार की आठवीं पीढ़ी रह रही है. बताया जाता है कि यह मकान उस दौर में बना था जब सीमेंट और सरिया का इस्तेमाल नहीं होता था, फिर भी इसकी मजबूती आज तक कायम है. इतिहास, पारंपरिक वास्तुकला और परिवार की विरासत को संभाले यह घर आज भी लोगों के लिए एक अनोखी मिसाल बना हुआ है.
ये है दुनिया का सबसे अनोखा फूल, इसके आसपास भी नहीं मंडराते भंवरे और कीट-पतंगे, क्या आपको पता है नाम
Ajab-Gajab : अक्सर आपने देखा होगा कि भंवरे ज्यादातर फूलों पर ही पाए जाते हैं, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि भंवरे चंपा के फूल पर कभी नहीं बैठते. छवि केसरी ने दावा किया कि चंपा के फूलों में एक अलग तरह की गंध होती है और इसके फूलों में पराग नहीं होता, जिसके कारण भंवरे इनके आसपास भी नहीं भटकते. सिर्फ भंवरे ही नहीं, चंपा के फूलों के पास ततैया, मधुमक्खियां भी नहीं आतीं. चंपा के फूलों की खास बात ये कि इसका पौधा हमेशा हराभरा रहता है. ये फूल मुख्यत: 5 प्रकार के होते हैं और सभी फूल बेहद सुगंधित होते हैं. चंपा के फूल अक्सर पूजा में उपयोग किए जाते हैं. इतना ही नहीं चंपा के फूलों का तेल और इत्र भी बनता है. इसके फूल और वृक्षों का उपयोग औषधि के रूप में भी होता है. कहा जाता है कि चंपा का पौधा वास्तु की दृष्टि से सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है. इतना उपयोगी होने के बावजूद इस फूल पर भंवरा, मधुमक्खी, तितली नहीं बैठती.
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