ईरान ने अपना नया सुप्रीम लीडर चुन लिया है। अली खामिनई की मौत के बाद उनके बेटे अयातुल्लाह सैयद मुस्तबा खामेनई को ईरान का नया सुप्रीम लीडर बनाया गया है। आईआरजीसी यानी ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड स्कोप्स भी मुस्तफा खामिने को सर्वोच्च नेता बनाए जाने के पक्ष में थी। ईरान की सरकारी मीडिया प्रेस टीवी ने बताया कि 8 मार्च की रात को 88 धर्मुरुओं वाली एक्सपर्ट असेंबली ने मतदान के बाद मुस्तबा के नाम पर मोहर लगा दी। असेंबली ने एक आधिकारिक बयान भी जारी किया। उन्होंने कहा कि एक्सपर्ट्स असेंबली ने निर्णायक मतदान से अयातुल्लाह सैयद मुस्तबा हुसैनी खामिनेई को इस्लामिक रिपब्लिकन ऑफ ईरान की पवित्र व्यवस्था का तीसरा नेता नियुक्त किया है।
इस घोषणा के साथ ही ईरान के सर्वोच्च नेतृत्व की कमान एक बार फिर से खामेनेई परिवार के हाथों में आ गई। इससे पहले उनके पिता अयातुल्ला अली खामेनेई देश के दूसरे सुप्रीम लीडर बने थे। पहले सुप्रीम लीडर अयातुल्ला रूहल्ला खुमैनी थे। जिन्होंने 1979 के इस्लामिक क्रांति के बाद इस पद की नींव रखी थी। खुमेनी के बाद अली खामनेई ने लंबे समय तक ईरान का नेतृत्व किया और अब उनके बेटे मुस्तबा तीसरे सुप्रीम लीडर के रूप में सामने आए हैं। मोजतबा के सुप्रीम लीडर बनने की खबर सामने आते ही ईरान के कई शहरों में लोगों ने जश्न मनाना शुरू कर दिया। बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर निकल आए और नेतृत्व का स्वागत किया। अली खामेनेई के एक्स अकाउंट से एक रीपोस्ट किया गया जिसमें बताया गया कि ईरान के संविधान के आर्टिकल 108 के तहत मोजतबा को नया सुप्रीम लीडर चुना गया है।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पिजिशकीय ने भी मुस्तफा खामेन को बधाई देते हुए कहा कि उनका नेतृत्व ईरान के सम्मान और ताकत के लिए एक नए युग की शुरुआत करता है। ईरानी सेना ने भी नए सुप्रीम लीडर के प्रति अपनी वफादारी जाहिर की है। ईरान आर्म्ड फोर्सेस के जनरल स्टाफ ने एक बयान जारी करके सुप्रीम लीडर और आर्म्ड फोर्सेस के कमांडर इन चीफ मुस्तफा खामिने के प्रति पूरी वफादारी की कसम खाई है। बयान में अली खामिने की मौत पर शोक भी जाहिर किया है। भारत में ईरान एंबेसी ने लिखा कि देश की मौजूदा गंभीर परिस्थितियों में यह विकल्प निसंदेह हमारे राष्ट्र की संप्रभुता और अखंडता की गारंटी देगा। ईरानी लोगों के बीच एकता और सामंजस्य को मजबूत करेगा। प्रार्थना है कि ध्वज वाहकों के हाथों से ध्वज कभी ना गिरे।
आपको बता दें कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के संयुक्त सैन्य हमले में अली खामिने की मौत हो गई थी। इसके बाद से सुप्रीम लीडर का पद खाली था। इस दौरान देश का शासन तीन सदस्य टेंपरेरी लीडरशिप काउंसिल के हाथों में था और अब मुस्तबा खामिने के चुनाव के साथ ईरान को नया स्वरच नेतृत्व मिल गया है। न्यूज़ एजेंसी रॉयर्स की रिपोर्ट के मुताबिक सुप्रीम लीडर चुने जाने के बाद टाइम्स ऑफ इजराइल ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप से बात की। ट्रंप ने कहा कि देखते हैं क्या होता है। युद्ध की समाप्ति इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नितिन याू के साथ आपसी निर्णय से होगी। आपको याद दिला दें कि ट्रंप ने कहा था कि ईरान उनके बिना नया सुप्रीम लीडर नहीं चुने। दूसरी तरफ इजराइल ने धमकी दी थी कि वो खामेनेई के उत्तराधिकारी को मार देंगे।
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मिडिल ईस्ट में जारी भीषण युद्ध के बीच ईरान से एक बेहद बड़ी और अहम खबर सामने आई है। ईरान ने अपने नए सुप्रीम लीडर का ऐलान कर दिया है। अब ईरान के नए सुप्रीम लीडर होंगे आया अली खामिनई के दूसरे बेटे मुस्तबा खामेनेई। मुस्तबा को ईरान का नया सर्वोच्च नेता चुना गया है और इस फैसले का ऐलान ईरान की शक्तिशाली धार्मिक संस्था असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने एक विशेष बैठक में किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका इजराइल के संयुक्त हवाई हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर आया खामेनेई की मौत के बाद से पूरे देश में राजनीतिक हलचल तेज हो गई थी और पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी थी कि अब ईरान की कमान किसके हाथों में जाएगी। अब ईरान की तरफ से इस सस्पेंस पर विराम लगा दिया गया है। ईरान ने मोजतबा खामेनेई को इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान का तीसरा सुप्रीम लीडर घोषित कर दिया है। नए सुप्रीम लीडर की घोषणा आया अली खामेनेई के आधिकारिक मीडिया के हैंडल से की गई। जहां पर एक फोटो साझा की गई। इस तस्वीर में आईने के सामने खड़े आया अली खामेनेई का प्रतिबिंब आईने में मोजतबा खामेनेई दिखते हैं जो कि ईरान का झंडा हाथों में लिए हुए हैं।
मोजतबा खामेनेई को लंबे समय से ईरान की राजनीति का बेहद प्रभावशाली व्यक्ति माना जाता है। लेकिन मुस्तबा को हमेशा से पर्दे के पीछे से काम करने वाला एक चेहरा माना गया। उनका जन्म साल 1969 में ईरान के पवित्र शिया शहर मशहद में हुआ था। वे ऐसे समय में बड़े हुए जब उनके पिता शाह के खिलाफ चल रहे आंदोलन में प्रमुख भूमिका निभा रहे थे और युवावस्था में मुस्तफा ने ईरान और इराक के युद्ध में भी हिस्सा लिया था। जिसने उन्हें कट्टर राष्ट्रवादी विचारधारा के और भी करीब ला दिया था। बात करें धार्मिक शिक्षा की तो मोजतबा खामनेई ने ईरान के प्रसिद्ध धार्मिक केंद्र कौम के इस्लामिक सेमिनरियो में पढ़ाई की है। जहां उन्हें शिया इस्लामी परंपरा में होजतुल इस्लाम का धार्मिक दर्जा हासिल है। हालांकि उन्होंने कभी भी ईरान की सरकार में कोई आधिकारिक पद नहीं संभाला है। लेकिन इसके बावजूद सत्ता के गलियारों में उनका प्रभाव बेहद अहम माना जाता है।
मोजतबा खामने अपने पिता के बेहद करीबी सलाहकारों में से एक थे। कई बड़े फैसलों में उनकी भूमिका मानी जाती आई है। उन्हें अक्सर उनके पिता अली खामने का गेटकीपर कहा जाता था क्योंकि सुरक्षा एजेंसियों और शक्तिशाली सैन्य संगठन जैसे कि इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉप्स के साथ उनके संबंध बेहद मजबूत बताए जाते हैं। खास बात यह है कि ईरान के सुप्रीम लीडर का पद देश का सबसे बड़ा पद होता है। इस पद पर बैठा नेता देश की विदेश नीति, रक्षा नीति और परमाणु कार्यक्रम जैसे अहम फैसलों का अंतिम निर्णय लेता है। पश्चिमी देशों की सबसे बड़ी चिंता भी यही है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम किस दिशा में जाएगा। हालांकि मुस्तबाक खामने की ताजपसी इतनी आसान नहीं होगी। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के भीतर कुछ वर्गों में उनके नेतृत्व को लेकर विरोध देखने को मिल सकता है।
फिलहाल ईरान के असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने सर्वसम्मति से उन्हें देश का नया सुप्रीम लीडर घोषित कर दिया है और इस ऐलान के साथ साफ हो गया है कि ईरान की सत्ता में कट्टरपंथी धारा अभी भी मौजूद है। और अब यह देखना दिलचस्प होगा कि अमेरिका और इजराइल की प्रतिक्रिया इस पर क्या होती है। इजराइल तो पहले ही घोषणा कर चुका है कि अगला सुप्रीम लीडर जो भी बनेगा वो उनका टारगेट होगा। अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि मोजतबा खामनेई के नेतृत्व में ईरान की विदेश नीति में क्या बदलाव देखने को मिलता है। खास करके अमेरिका इजराइल के साथ चल रहे तनाव में आगे क्या होता है।
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