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Rashifal: नवंबर माह के शुरुआती 15 दिन आपके लिए कैसे रहेंगे? पढ़ें ज्योतिर्विद की भविष्यवाणी

Rashifal: नवंबर माह के शुरुआती 15 दिन आपके लिए कैसे रहेंगे? पढ़ें ज्योतिर्विद की भविष्यवाणी

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‘द फिक्स’ में लियाम नीसन के साथ नजर आएंगी एलनाज:बोलीं- हॉलीवुड के सितारे सहज, भारत में बदल सकता है फिल्ममेकिंग का तरीका

हॉलीवुड फिल्म ‘द फिक्स’ में लियाम नीसन और जैक क्वैड जैसे कलाकारों के साथ काम कर रहीं एक्ट्रेस एलनाज नोरौजी इन दिनों अपने करियर के एक नए पड़ाव पर हैं। ईरान में जन्मीं, जर्मनी में पली बढ़ीं और भारत में अपनी पहचान बनाने के बाद अब लॉस एंजिलिस में मौके तलाश रहीं एलनाज का सफर आसान नहीं रहा। वह अपनी नई फिल्म, हॉलीवुड और बॉलीवुड के काम करने के तरीकों के अंतर और ईरान के मौजूदा हालात पर खुलकर बात करती हैं। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने कहा कि ईरान के लोगों की आजादी और लोकतंत्र की मांग को समझना जरूरी है। सवाल: ‘द फिक्स’ आपके लिए कितनी खास फिल्म है? जवाब: यह मेरे लिए बहुत खास फिल्म है। इसमें राजनीति, इतिहास, एक्शन और इमोशन, सब कुछ है। फिल्म की कहानी में ईरान और तेहरान से जुड़े पहलू भी हैं। निर्देशक ने इसकी तुलना ‘धुरंधर’ से भी की थी। मुझे लगता है कि यह फिल्म दर्शकों को एक अलग अनुभव देगी। सवाल: लियाम नीसन और जैक क्वैड जैसे हॉलीवुड कलाकारों के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा? जवाब: लियाम नीसन को हम पर्दे पर अक्सर गंभीर और दमदार किरदारों में देखते हैं, लेकिन असल जिंदगी में वह काफी सहज और मजाकिया हैं। उनके साथ काम करके अच्छा लगा। जैक क्वैड के साथ भी मेरी अच्छी दोस्ती हो गई और हमारी केमिस्ट्री काफी अच्छी रही। दोनों कलाकारों से बहुत कुछ सीखने को मिला। सवाल: हॉलीवुड और बॉलीवुड के सेट पर काम करने के तरीके में आपको सबसे बड़ा अंतर क्या लगा? जवाब: हॉलीवुड के सेट पर कैमरे के आसपास लोगों की संख्या कई बार कम होती है, जिससे कलाकारों को काम करने के लिए ज्यादा स्पेस मिलता है। इससे वे अपने किरदार पर बेहतर तरीके से ध्यान दे पाते हैं। मुझे लगता है कि बॉलीवुड में भी कुछ मामलों में इस तरह के बदलाव से फायदा हो सकता है। सवाल: ‘द फिक्स’ की शूटिंग के दौरान कोई मुश्किल अनुभव भी रहा? जवाब: हमने जॉर्जिया के त्बिलिसी में अक्टूबर और नवंबर के दौरान शूटिंग की थी। वहां बहुत ठंड थी और मैं करीब दो हफ्ते तक बीमार रही। मेरी आवाज तक चली गई थी। लेकिन पूरी टीम ने एक दूसरे का बहुत साथ दिया। ऐसे अनुभव आपको टीमवर्क की अहमियत समझाते हैं। सवाल: ईरान के मौजूदा हालात को आप किस नजरिए से देखती हैं? जवाब: वहां जो हो रहा है, उसे केवल आज की घटना की तरह नहीं देखा जा सकता। मेरे मुताबिक, ईरान के लोग पिछले 47 साल से दमन का सामना कर रहे हैं। वे आजादी, लोकतंत्र और निष्पक्ष चुनाव चाहते हैं। युद्ध बहुत दुखद होता है और आम लोगों को इसकी सबसे बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है। हमें ईरान के लोगों की तकलीफ और उनकी आवाज को समझने की जरूरत है। सवाल: आप आठ साल की उम्र में ईरान से जर्मनी चली गई थीं। फिर भारत और अब लॉस एंजिलिस तक का सफर कैसा रहा? जवाब: जिंदगी में कई बार शुरुआत से सब कुछ करना पड़ा। ईरान से जर्मनी गई, फिर भारत आई और अब लॉस एंजिलिस में अपना करियर बनाने की कोशिश कर रही हूं। हर जगह चुनौतियां हैं, लेकिन मैं हार मानने वालों में से नहीं हूं। मुझे लगातार काम करना है और अलग तरह के किरदार निभाने हैं। सवाल: आपको अक्सर ग्लैमरस किरदारों से जोड़कर देखा जाता है। क्या यह छवि तोड़ना मुश्किल है? जवाब: लोग आपको एक खास तरह के किरदार में देखते हैं तो उसी छवि में बांधने लगते हैं। लेकिन मैंने ‘सेक्रेड गेम्स’, ‘रणनीति’, ‘कंधार’ और ‘तेहरान’ जैसे प्रोजेक्ट्स में अलग तरह का काम किया है। मैं चाहती हूं कि लोग मुझे सिर्फ ग्लैमरस किरदारों के लिए नहीं, बल्कि मेरी एक्टिंग और अलग-अलग भूमिकाओं के लिए पहचानें। सवाल: क्या भारतीय फिल्मों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ज्यादा पहचान मिल रही है? जवाब: बिल्कुल। ‘आरआरआर’ और ‘धुरंधर’ जैसी फिल्मों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोगों का ध्यान खींचा है। ‘द फिक्स’ के निर्देशक ने भी भारतीय फिल्मों को देखा है। मैं चाहती हूं कि भारतीय सिनेमा को दुनिया भर में और ज्यादा पहचान मिले।

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  Sports

Yashasvi Jaiswal ने New Zealand A के खिलाफ जड़ा शतक, नाबाद 155 रन बनाकर फॉर्म में लौटे

भारत के सलामी बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल ने न्यूजीलैंड ए के खिलाफ शतक बनाकर फॉर्म में वापसी करने के बाद कहा कि उन्होंने इस दौरान अपनी ‘प्रक्रिया, दिनचर्या और अनुशासन’ पर ध्यान केंद्रित किया। जायसवाल ने मंगलवार को ड्रॉ समाप्त हुई दूसरे अनौपचारिक टेस्ट मैच की दूसरी पारी में नाबाद 155 रन बनाए। उन्होंने कहा कि यहां की ठंड ने उनके लिए अलग तरह की चुनौती पेश की। जायसवाल ने कहा, ‘‘यहां बहुत ठंड है। गेंद शुरुआत में बहुत घूमती है और सीम मूवमेंट भी बहुत होता है। अच्छे गेंदबाज लगातार सही जगह पर गेंद को पिच कराते हैं। इसलिए हमें रन बनाने के लिए काफी इंतजार करना पड़ता है।’’ 

उन्होंने कहा, ‘‘जब विकेट बेहतर हो जाता है या गेंद पुरानी हो जाती है तो रन बनाना आसान हो जाता है। मैं यह नहीं कहूंगा कि यह आसान है, लेकिन आप अच्छे शॉट खेल सकते हैं। इसलिए बहुत मज़ा आया और यहां खेलना अच्छा लगता है। यह एक बिल्कुल अलग तरह का अनुभव है।’’ भारत और न्यूजीलैंड के बीच 19 नवंबर से शुरू होने वाली दो टेस्ट मैचों की श्रृंखला से पहले जायसवाल का फॉर्म में लौटना काफी महत्वपूर्ण है। 

जायसवाल ने कहा, ‘‘यहां रन बनाना आसान नहीं है। मैंने बस प्रक्रिया, दिनचर्या और अनुशासन पर ध्यान केंद्रित किया। मुझे लगता है कि यहां रन बनाने के लिए आपको बहुत अनुशासित रहना होगा।’’ जायसवाल ने कहा कि न्यूजीलैंड में मुख्य चुनौती यहां का ठंडा मौसम है। उन्होंने कहा, ‘‘भारत, ऑस्ट्रेलिया और यहां तक ​​कि इंग्लैंड की तुलना में न्यूजीलैंड बहुत अलग जगह है। यहां बहुत ठंड पड़ती है।

 पिछले चार दिनों से सूरज आंख मिचौली खेल रहा था।’’ जायसवाल से जब पूछा गया कि वे परिस्थितियों के अनुकूल ढलने के लिए अपनी तकनीक में कैसे बदलाव करते हैं, तो उन्होंने कहा कि उन्हें अपने शरीर के करीब रहकर खेलना पसंद है। उन्होंने कहा, ‘‘मैं इसपर ध्यान देता हूं कि मैं शरीर के जितना करीब खेलूंगा, उतना ही बेहतर होगा। 

अगर आप पहली पारी देखें, तो मेरा शुरुआती स्टांस पीछे की ओर था। फिर मैंने इसे बदला। अगर गेंदबाज तेज गेंदबाजी नहीं कर रहा है, तो आप सीम मूवमेंट को नियंत्रित कर सकते हैं। अगर मुझे ढीली गेंद मिलती है तो मैं रन बनाने की कोशिश करूंगा।’’

Tue, 03 Nov 2026 14:04:00 +0530

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