डायबिटीज में चावल खाना चाहिए या नहीं? एक्सपर्ट ने बताया शुगर स्पाइक को रोकने के लिए क्या करें
Rice In Diabetes: डायबिटीज के मरीजों को ब्लड शुगर लेवल्स बढ़ने का डर हमेशा ही बना रहता है. ऐसे में समझ नहीं आता चावल खाना चाहिए या नहीं. इसी बारे में बता रहे हैं आयुर्वेदिक डॉक्टर सलीम जैदी. यहां जानिए शुगर पेशेंट की सेहत पर चावल का क्या असर होता है.
The post डायबिटीज में चावल खाना चाहिए या नहीं? एक्सपर्ट ने बताया शुगर स्पाइक को रोकने के लिए क्या करें appeared first on News24 Hindi.
क्या ईरान ने खुद ही अपनी ही बच्चियों पर किया था अटैक, ट्रंप ने दिया चौंकाने वाला बयान
अमेरिका-इजराइल ने ईरान पर 28 फरवरी को भीषण हमला किया, जिसमें ईरान के मीनाब इलाके में एक लड़कियों के स्कूल पर जद में आया. ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, इस हमले में 150 से ज्यादा लोगों की जान चली गई है, जिनमें ज्यादातर स्कूल की छात्राएं थीं. इस घटना के बाद पूरी दुनिया में खलबली मच गई है. अमेरिका और ईरान के बीच पहले से चल रही तनातनी अब एक नया और खतरनाक मोड़ ले चुकी है. दोनों देश इस हमले के लिए एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं.
राष्ट्रपति ट्रंप ने इस पर क्या कहा?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हमले के लिए सीधे तौर पर ईरान को ही जिम्मेदार ठहरा दिया है. एयरफोर्स वन विमान में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि हमें लगता है कि यह हमला खुद ईरान ने ही किया है. ट्रंप ने इसके पीछे तर्क देते हुए कहा कि ईरान के हथियार और मिसाइलें बिल्कुल भी सटीक नहीं हैं. उनके पास सटीकता की भारी कमी है, जिसकी वजह से उनके निशाने अक्सर चूक जाते हैं. ट्रंप का इशारा यह था कि ईरान शायद कहीं और हमला करना चाहता था, लेकिन गलती से मिसाइल स्कूल पर जा गिरी.
ईरान का अमेरिका पर पलटवार
दूसरी तरफ, ईरान ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. ईरान का कहना है कि यह हमला अमेरिका ने किया है. ईरान की 'रिवोल्यूशनरी गार्ड्स' (वहां की सेना की एक मुख्य टुकड़ी) ने दावा किया है कि उन्होंने बदला लेने के लिए संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में स्थित एक अमेरिकी सैन्य ठिकाने 'अल-धफरा' को निशाना बनाया है. ईरान का आरोप है कि इसी बेस का इस्तेमाल करके अमेरिका ने उनके स्कूल पर हमला किया था. उन्होंने इस जवाबी कार्रवाई में ड्रोन और मिसाइलों का इस्तेमाल करने की बात कही है.
क्या कहता है अमेरिकी रक्षा विभाग?
अमेरिका के रक्षा विभाग 'पेंटागन' ने इस मामले पर संभलकर बयान दिया है. उन्होंने कहा है कि इस पूरी घटना की जांच की जा रही है. वहीं, अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने साफ तौर पर कहा है कि अमेरिका कभी भी जानबूझकर किसी स्कूल को निशाना नहीं बनाएगा. फिलहाल अमेरिका ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है और उनका कहना है कि वे अभी सबूत जुटा रहे हैं कि आखिर उस दिन हुआ क्या था.
जांच और दावों के बीच का सच
इस घटना की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि अभी तक किसी भी स्वतंत्र एजेंसी या अंतरराष्ट्रीय मीडिया (जैसे AFP) को उस जगह पर जाने की इजाजत नहीं मिली है. इसलिए, वहां असल में कितना नुकसान हुआ है और मरने वालों का सही आंकड़ा क्या है, इसकी पुष्टि अभी बाकी है. जब तक कोई निष्पक्ष टीम वहां पहुंचकर मलबे और मिसाइल के टुकड़ों की जांच नहीं करती, तब तक यह कहना मुश्किल है कि हमला किस तरह के हथियार से हुआ था.
न्यूयॉर्क टाइम्स की चौंकाने वाली रिपोर्ट
इसी बीच, मशहूर अखबार 'न्यूयॉर्क टाइम्स' ने एक रिपोर्ट छापी है जो अमेरिका की मुश्किल बढ़ा सकती है. रिपोर्ट में कहा गया है कि जिस समय स्कूल पर हमला हुआ, ठीक उसी समय अमेरिकी सेना 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) के पास ईरानी सेना के ठिकानों पर हमला कर रही थी. अखबार ने सोशल मीडिया पोस्ट, गवाहों के वीडियो और तस्वीरों की बारीकी से जांच की है. उनका कहना है कि स्कूल पर हमला और ईरानी सैन्य अड्डे पर हमला एक ही समय पर हुए थे, जिससे यह संकेत मिलता है कि शायद अमेरिकी हमला ही भटककर स्कूल पर जा गिरा होगा.
आम लोगों पर असर और डर का माहौल
इस पूरी घटना में सबसे दुखद पहलू उन मासूम बच्चियों की मौत है, जिनका राजनीति या युद्ध से कोई लेना-देना नहीं था. मीनाब के स्थानीय लोगों में भारी गुस्सा और डर देखा जा रहा है. स्कूल जैसे सुरक्षित स्थान पर हुए इस हमले ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया है. लोग अब सवाल उठा रहे हैं कि आधुनिक हथियारों के दौर में भी मासूमों की जान इतनी सस्ती क्यों है?
क्या युद्ध की तरफ बढ़ रहे हैं दोनों देश?
ईरान द्वारा UAE में अमेरिकी बेस पर किए गए ड्रोन हमले ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है. अगर इसी तरह एक-दूसरे के ठिकानों पर हमले होते रहे, तो यह मामला एक बड़े युद्ध में बदल सकता है. अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस समय दोनों देशों से शांति बनाए रखने की अपील कर रहा है. आने वाले कुछ दिन बहुत महत्वपूर्ण होंगे, क्योंकि जांच की रिपोर्ट सामने आने के बाद ही साफ होगा कि असली गुनहगार कौन है.
आगे क्या हो सकता है?
अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या संयुक्त राष्ट्र (UN) इस मामले में दखल देगा. ईरान ने अमेरिका पर आतंकवाद का आरोप लगाया है, जबकि ट्रंप ने ईरान के हथियारों को घटिया बताया है. यदि न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट सही साबित होती है, तो अमेरिका को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी दबाव का सामना करना पड़ सकता है. वहीं, अगर यह ईरान की तकनीकी खराबी का नतीजा निकलता है, तो ईरान की सैन्य साख पर सवाल उठेंगे.
ये भी पढ़ें- UNCOVERED With Manoj Gairola: शाहेद का 'खौफनाक' खेल, मुट्ठी भर बारूद और सस्ते ड्रोन ने उड़ा दी अमेरिका-इजराइल की नींद
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others
news24
News Nation


















