Iran-Israel War Update: ईरान के तेल ठिकानों पर इजरायल का हमला, IRGC का दावा- 6 महीने तक जारी रह सकता है युद्ध
Iran-Israel War Update: मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। पिछले कुछ दिनों से दोनों पक्षों के बीच हमले और जवाबी कार्रवाई तेज हो गई है, जिससे पूरे क्षेत्र में हालात चिंताजनक बने हुए हैं। इस संघर्ष के जल्द खत्म होने की संभावना भी फिलहाल नजर नहीं आ रही है।
इजरायल और अमेरिका जहां मिलकर ईरान के ठिकानों को निशाना बना रहे हैं, वहीं ईरान भी अपनी मिसाइलों के जरिए जवाबी हमले कर रहा है। हाल ही में इजरायली सेना ने ईरान के तेल भंडारण केंद्रों (ऑयल स्टोरेज साइट्स) पर बड़ा हमला किया। शनिवार को तेहरान और उसके पड़ोसी शहर करज में जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं। रिपोर्ट्स के मुताबिक कई फ्यूल स्टोरेज कॉम्प्लेक्स पर बमबारी के बाद आसमान में आग और धुएं का बड़ा गुबार देखा गया।
बताया जा रहा है कि अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया है। इन हमलों में तेहरान और अल्बोर्ज प्रांत के कई तेल स्टोरेज डिपो को नुकसान पहुंचा है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी बयान दिया है कि ईरान के लिए आने वाले दिनों में कई और “सरप्राइज” हो सकते हैं।
वहीं दूसरी ओर ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि देश की सेना इस संघर्ष को लंबे समय तक जारी रखने की क्षमता रखती है। फार्स न्यूज एजेंसी को दिए बयान में IRGC के प्रवक्ता अली मोहम्मद नैनी ने कहा कि ईरान की सशस्त्र सेनाएं मौजूदा ऑपरेशन की गति से कम से कम छह महीने तक अमेरिका और इजरायल के खिलाफ संघर्ष जारी रख सकती हैं।
IRGC ने यह भी दावा किया है कि अब तक उन्होंने पूरे क्षेत्र में अमेरिका और इजरायल से जुड़े 200 से ज्यादा ठिकानों और सैन्य सुविधाओं को निशाना बनाया है। ऐसे में मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है, जिसका असर वैश्विक राजनीति और तेल बाजार पर भी पड़ सकता है।
India-Russia Oil Deal पर ट्रंप का बड़ा बयान: क्या सच में अमेरिका ने दी भारत को रूसी तेल खरीदने की छूट?
India-Russia Oil Deal: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता के बीच भारत द्वारा रूस से तेल खरीदने का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। इस बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने उस दावे पर प्रतिक्रिया दी है, जिसमें कहा गया था कि अमेरिका ने भारत को रूस से तेल खरीदने की छूट दी है।
दरअसल, यह बयान अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट के एक इंटरव्यू के बाद चर्चा में आया। उन्होंने दावा किया था कि अमेरिका ने भारत से रूस से प्रतिबंधित तेल खरीदना बंद करने को कहा था, लेकिन वैश्विक तेल आपूर्ति पर दबाव कम करने के लिए बाद में भारत को रूसी तेल खरीदने की अनुमति दी गई।
जब इस मुद्दे पर डोनल्ड ट्रंप से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि अगर ऐसी कोई स्थिति होती तो वे केवल वैश्विक तेल बाजार पर दबाव कम करने के लिए ऐसा कदम उठाते। एयर फोर्स वन में मीडिया से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि दुनिया में तेल की कमी को लेकर ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि अमेरिका के पास खुद काफी मात्रा में तेल मौजूद है और हालात जल्द सामान्य हो सकते हैं।
वहीं भारत सरकार ने इस पूरे मामले पर साफ कर दिया है कि देश की ऊर्जा नीति पूरी तरह राष्ट्रीय हितों के आधार पर तय होती है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक भारत जहां भी सस्ता और उपलब्ध तेल मिलेगा, वहां से खरीद करेगा। भारत की तेल खरीद किसी दूसरे देश की अनुमति या दबाव पर निर्भर नहीं करती।
इसी मुद्दे को लेकर भारत की राजनीति में भी बहस छिड़ गई है। विपक्ष ने अमेरिकी मंत्री के बयान के बाद केंद्र सरकार से सवाल पूछे, लेकिन सरकार की ओर से साफ कहा गया कि भारत हमेशा अपनी ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक हितों को ध्यान में रखकर ही फैसले लेता है। ऐसे में रूस से तेल खरीदने का फैसला भी इसी नीति का हिस्सा है।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
Haribhoomi




















