उत्तरी ऑस्ट्रेलिया में भीषण बाढ़ से जनजीवन प्रभावित, तेज धार के बीच फंसे पांच लोगों को बचाया गया
सिडनी, 7 मार्च (आईएएनएस)। ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड राज्य और पड़ोसी उत्तरी क्षेत्र (एनटी) में बाढ़ ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। भारी बाढ़ के बीच पांच लोगों को बचाया गया है, जबकि एक अस्पताल से मरीजों को बाहर निकाला गया।
क्वींसलैंड के अधिकतर हिस्सों में बाढ़ की चेतावनी जारी की गई थी। इसका कारण एक धीमी गति से बढ़ रहा उष्णकटिबंधीय तूफान है, जिसने शुक्रवार दोपहर स्थानीय समयानुसार राज्य के उत्तर-पूर्वी तट पर लैंडफॉल किया। मौसम विभाग (बीओएम) के अनुसार यह उष्णकटिबंधीय तूफान सेंट्रल क्वींसलैंड से होते हुए पश्चिम की ओर बढ़ रहा था और इससे भारी बारिश होने का अनुमान है और अचानक बाढ़ आ सकती है।
ऑस्ट्रेलियन ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन ने बताया कि सेंट्रल क्वींसलैंड में रात के दौरान बाढ़ के बीच पांच लोगों को बचाया गया। इनमें से तीन लोग बाढ़ में फंसे एक वाहन से निकलने के बाद तेज बहाव वाले पानी में पेड़ से लटककर अपनी जान बचाए हुए थे।
उत्तरी क्षेत्र (एनटी) में भी एक अलग उष्णकटिबंधीय तूफान के कारण डार्विन से लगभग 270 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में स्थित छोटे शहर कैथरीन के लिए बड़ी बाढ़ की चेतावनी जारी की गई है।
मौसम विभाग ने बताया कि शनिवार सुबह कैथरीन नदी के जलस्तर में तेजी से वृद्धि हो रही है। समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, नदी का जलस्तर कैथरीन के मध्य हिस्से में बाढ़ के स्तर को पार कर चुका है और शनिवार के दौरान इसके और बढ़ने की संभावना है।
संभावित बाढ़ को देखते हुए कैथरीन अस्पताल में भर्ती 21 मरीजों, जिनमें 20 गर्भवती महिलाएं शामिल हैं, को शुक्रवार को दूसरे अस्पताल में भेजा गया, ताकि अगर शहर बाढ़ के पानी से कट जाए तो किसी तरह की परेशानी न हो।
उत्तरी क्षेत्र की मुख्यमंत्री लिआ फिनोचियारो शुक्रवार रात शहर पहुंचीं और उन्होंने लोगों से आपातकालीन चेतावनियों का पालन करने की अपील की।
इससे पहले, 6 मार्च को ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड में खतरनाक फ्लैश फ्लड की आशंका को देखते हुए गंभीर मौसम चेतावनी जारी की गई थी, क्योंकि एक तूफान राज्य के उत्तर-पूर्वी तट की ओर बढ़ रहा था। मौसम विभाग ने चेतावनी में कहा था कि यह उष्णकटिबंधीय तूफान शुक्रवार सुबह से क्वींसलैंड के सुदूर उत्तरी हिस्से के करीब 350 किलोमीटर लंबे तटीय क्षेत्र में तेज बारिश ला सकता है।
चेतावनी वाले क्षेत्रों में नॉर्थ-ईस्ट कोस्टल शहर केर्न्स, पोर्ट डगलस और कुकटाउन शामिल हैं, जिनकी कुल आबादी लगभग 2.55 लाख है।
--आईएएनएस
डीसीएच/
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Gudi Padwa 2026: कब मनाया जाएगा गुड़ी पड़वा? नोट कर लें सही तिथि, शुभ मुहूर्त और इस दिन का धार्मिक महत्व
Gudi Padwa 2026 Date: सनातन धर्म में गुड़ी पड़वा का त्योहार बेहद शुभ और पवित्र माना जाता है. खास तौर पर यह दिन महाराष्ट्र और गोवा में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है. गुड़ी पड़वा को मराठी नववर्ष की शुरुआत के रूप में देखा जाता है. हर साल यह त्योहार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की तिथि को मनाया जाता है. गुड़ी पड़वा के दिन लोग सुबह जल्दी उठते हैं. स्नान करके नए कपड़े पहनते हैं. इसके बाद घर के मुख्य द्वार या खिड़की पर गुड़ी स्थापित की जाती है. इसे शुभता और विजय का प्रतीक माना जाता है. परिवार के सदस्य मिलकर इसकी पूजा और आरती करते हैं. चलिए जानते हैं कि इस साल किस दिन गुड़ी पड़वा का त्योहार मनाया जाएगा.
2026 में गुड़ी पड़वा कब है?
द्रिक पंचांग के अनुसार, साल 2026 में चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि की शुरुआत 19 मार्च 2026 को सुबह 6 बजकर 52 मिनट से होगी. यह तिथि 20 मार्च 2026 को सुबह 4 बजकर 52 मिनट तक रहेगी. ऐसे में गुड़ी पड़वा का पर्व 19 मार्च 2026, गुरुवार के दिन मनाया जाएगा. इसी दिन से मराठी शक संवत 1948 की शुरुआत भी मानी जाएगी.
गुड़ी पड़वा 2026 शुभ मुहूर्त (Gudi Padwa 2026 Shubh Muhurat)
गुड़ी पड़वा के दिन पूजा और शुभ कार्य करने के लिए कुछ खास मुहूर्त बताए गए हैं.
सूर्योदय: सुबह 06:26
चंद्रास्त: शाम 06:58
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:51 से 05:38 तक
अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:04 से 12:53 तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 02:29 से 03:18 तक
सायाह्न संध्या: शाम 06:31 से 07:43 तक
इन मुहूर्तों में पूजा-पाठ करना शुभ माना जाता है.
गुड़ी पड़वा पर कैसे मनाते हैं पर्व?
गुड़ी पड़वा की सुबह खास परंपराओं के साथ शुरू होती है. लोग ब्रह्म मुहूर्त में उठते हैं और तेल से शरीर की मालिश करते हैं. इसके बाद स्नान कर नए कपड़े पहनते हैं. घर के मुख्य द्वार या खिड़की पर एक लंबी लकड़ी या डंडे पर रेशमी कपड़ा, फूलों की माला, नीम के पत्ते और कलश लगाकर गुड़ी बनाई जाती है. इसे घर के बाहर ऊंचाई पर लगाया जाता है. गुड़ी की पूजा करने के बाद परिवार के सदस्य नीम के पत्ते और गुड़ का प्रसाद खाते हैं. मान्यता है कि इससे स्वास्थ्य अच्छा रहता है और सालभर सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है. शाम के समय पूजा के बाद गुड़ी को उतारकर घर के अंदर साफ और पवित्र स्थान पर रख दिया जाता है.
गुड़ी पड़वा का धार्मिक महत्व (Gudi Padwa 2026 Significance)
गुड़ी पड़वा केवल महाराष्ट्र तक सीमित नहीं है. दक्षिण भारत के कई राज्यों में भी इस दिन नववर्ष की शुरुआत मानी जाती है. कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में इसी दिन को उगादी के नाम से मनाया जाता है. वहीं इस तिथि से हिंदू नववर्ष, विक्रम संवत और चैत्र नवरात्रि की भी शुरुआत मानी जाती है. इस वजह से यह दिन पूरे देश में धार्मिक और सांस्कृतिक नजरिए से बेहद खास माना जाता है.
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