West Asia Conflict Impact | पश्चिम एशिया में तनाव के बीच रसोई गैस और कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में भारी उछाल, जानें कितनी बढ़ी कीमत
पश्चिम एशिया में जारी सैन्य संघर्ष और वैश्विक ऊर्जा संकट का असर अब भारतीय रसोई तक पहुँच गया है। तेल विपणन कंपनियों ने घरेलू और वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी की घोषणा की है। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC) की वेबसाइट के अनुसार, नई दरें आज यानी 7 मार्च से प्रभावी हो गई हैं। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच घरेलू एलपीजी (तरलीकृत पेट्रोलियम गैस) सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये और वाणिज्यिक सिलेंडर की कीमत में 114.5 रुपये की वृद्धि की गई है। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) की वेबसाइट के अनुसार, दिल्ली में अब गैर-सब्सिडी वाली एलपीजी (जिसका इस्तेमाल उज्ज्वला लाभार्थियों के अलावा आम घरेलू उपभोक्ता अपनी रसोई में करते हैं) का 14.2 किलोग्राम का सिलेंडर 913 रुपये में मिलेगा जबकि पहले इसकी कीमत 853 रुपये थी। एक साल से भी कम समय में कीमत में दूसरी बार बढ़ोतरी की गई है।
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इस उद्योग से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि यह बढ़ोतरी पश्चिम एशिया में सैन्य संघर्ष शुरू होने के बाद वैश्विक ऊर्जा कीमतें तेजी से बढ़ने के बाद की गई है। उन्होंने कहा कि कीमत बढ़ने के बावजूद पड़ोसी देशों की तुलना में भारत में रसोई गैस की कीमत सबसे कम है। वेबसाइट के अनुसार, कीमत में यह बढ़ोतरी आज यानी सात मार्च से प्रभावी है। कीमत में 11 महीने में दूसरी बार बढ़ोतरी की गई है। इससे पहले पिछले साल अप्रैल में कीमत में 50 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी।
आईओसी की वेबसाइट के अनुसार, मुंबई में गैर-सब्सिडी वाली एलपीजी अब 912.50 रुपये, कोलकाता में 939 रुपये और चेन्नई में 928.50 रुपये की हो गई है। स्थानीय बिक्री कर या मूल्य वर्धित कर (वैट) की दरों के आधार पर राज्यों में दरें अलग-अलग होती हैं।
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उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों यानी 2016 में योजना शुरू होने के बाद से मुफ्त एलपीजी कनेक्शन पाने वाले 10 करोड़ से अधिक गरीब लोगों को एक साल में 12 बार 14.2 किलोग्राम के हर सिलेंडर पर 300 रुपये की सब्सिडी मिलती रहेगी। होटल और रेस्तरां जैसे प्रतिष्ठानों में इस्तेमाल की जाने वाली वाणिज्यिक एलपीजी की कीमत 19 किलोग्राम के हर सिलेंडर पर 114.5 रुपये बढ़ाई गई है। अब दिल्ली में इसकी कीमत 1,883 रुपये है। यह बढ़ोतरी एक मार्च को 19 किलोग्राम के हर सिलेंडर पर 28 रुपये बढ़ाए जाने के बाद की गई है। इस साल वाणिज्यिक एलपीजी की दरों में 302.50 रुपये की बढ़ोतरी हुई है।
पाकिस्तान के स्वामित्व वाले न्यूयॉर्क के रूजवेल्ट होटल सौदे पर अमेरिकी प्रतिनिधियों ने उठाए सवाल
वाशिंगटन, 7 मार्च (आईएएनएस)। अमेरिका में इस सप्ताह एक संसदीय सुनवाई के दौरान उस समय तीखी बहस देखने को मिली, जब सांसदों ने न्यूयॉर्क स्थित रूजवेल्ट होटल से जुड़े एक रियल एस्टेट समझौते में अमेरिकी संघीय सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए। यह होटल पाकिस्तान की सरकारी एयरलाइन पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (पीआईए) के स्वामित्व में है और इससे जुड़ा समझौता पाकिस्तान के रक्षा मंत्रालय के साथ किया गया है।
यह मामला अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) की ट्रांसपोर्टेशन एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सबकमेटी ऑन इकोनॉमिक डेवलपमेंट, पब्लिक बिल्डिंग्स एंड इमरजेंसी मैनेजमेंट की सुनवाई के दौरान सामने आया। इस बैठक में संघीय रियल एस्टेट प्रबंधन से जुड़े मामलों की समीक्षा की जा रही थी।
सुनवाई के दौरान डेमोक्रेटिक सांसद रिक लार्सन ने अमेरिकी जनरल सर्विसेज एडमिनिस्ट्रेशन (जीएसए) के प्रशासक एडवर्ड फोर्स्ट से सीधे सवाल पूछे। उन्होंने पूछा कि आखिर एक विदेशी सरकार के स्वामित्व वाली संपत्ति के पुनर्विकास (रीडेवलपमेंट) से जुड़े समझौते में अमेरिकी संघीय एजेंसी क्यों शामिल है।
लार्सन ने कहा, आपने हाल ही में पाकिस्तान के रक्षा मंत्रालय के साथ न्यूयॉर्क के रूजवेल्ट होटल के नवीनीकरण को लेकर एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं। मेरी जानकारी के अनुसार, यह होटल पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस का है और यह अमेरिकी संघीय सरकार की संपत्ति नहीं है।
उन्होंने आगे पूछा कि जीएसए, जिसका मुख्य काम अमेरिकी सरकार की संपत्तियों का प्रबंधन और निपटान करना है, वह आखिर एक विदेशी स्वामित्व वाली व्यावसायिक संपत्ति के मामले में क्यों चर्चा कर रही है।
लार्सन ने कहा, मैं यह जानना चाहता हूं कि इस एमओयू का कानूनी आधार क्या है और अमेरिकी सरकार उस संपत्ति के पुनर्विकास में क्यों शामिल हो रही है, जो किसी विदेशी सरकार की है। जीएसए की भूमिका तो केवल संघीय सरकार की संपत्तियों के प्रबंधन तक सीमित है। यह बात समझ से परे है।
इस पर जवाब देते हुए एडवर्ड फोर्स्ट ने पुष्टि की कि उन्होंने वास्तव में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि इससे अमेरिकी सरकार पर कोई बाध्यकारी जिम्मेदारी नहीं आती।
जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं, तो उन्होंने जवाब दिया, हां, यह सही है कि मैंने उस पर हस्ताक्षर किए हैं।
फोर्स्ट ने लॉमेकर्स को बताया कि यह पहल तब शुरू हुई जब पाकिस्तान सरकार ने इस संपत्ति के संभावित विकास को लेकर अमेरिकी अधिकारियों से सहयोग का प्रस्ताव दिया।
उन्होंने कहा, पाकिस्तान सरकार ने इस संपत्ति को लेकर सहयोग की संभावना पर चर्चा के लिए स्टीव विटकॉफ से संपर्क किया था, क्योंकि वे इसे लेकर अब तक ज्यादा सफलता हासिल नहीं कर पाए थे।
फोर्स्ट ने इस समझौते को केवल शुरुआती स्तर की बातचीत बताया। उन्होंने कहा, यह वास्तव में शुरुआती चरण की चर्चा है, जिसमें हम मिलकर यह देखना चाहते हैं कि क्या इस स्थान को लेकर ऐसा कोई अवसर है, जिससे अमेरिका को भी लाभ हो सकता है।
हालांकि रिक लार्सन इस स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं दिखे। उन्होंने कहा कि जीएसए के पास पहले से ही अमेरिकी संघीय संपत्तियों से जुड़े बड़े काम हैं और उसे विदेशी संपत्तियों से जुड़े प्रोजेक्ट्स में शामिल होने की जरूरत नहीं है।
इस पर फोर्स्ट ने कहा कि उन्होंने बिना कानूनी सलाह के इस समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि प्रशासन इस एमओयू और उससे जुड़ी कानूनी राय की प्रतियां समिति को उपलब्ध कराएगा।
जब उनसे पूछा गया कि इस समझौते के तहत अमेरिका को क्या करना होगा, तो फोर्स्ट ने कहा कि यह केवल आगे बातचीत करने की प्रतिबद्धता है।
उन्होंने कहा, ईमानदारी से कहूं तो यह हमें किसी काम के लिए बाध्य नहीं करता। यह सिर्फ अच्छे इरादे से साथ मिलकर यह देखने की बात करता है कि उस जगह के लिए कोई बेहतर समाधान निकल सकता है या नहीं।
फोर्स्ट ने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में इस इमारत का उपयोग पहले की तरह होटल के रूप में ही हो, यह जरूरी नहीं है।
उन्होंने कहा, मेरे हिसाब से हमें इस बात पर अटकना नहीं चाहिए कि यह पहले एक होटल था। पुनर्विकास के बाद इसका इस्तेमाल किसी भी उद्देश्य के लिए किया जा सकता है।
न्यूयॉर्क के मैनहैटन में स्थित रूजवेल्ट होटल एक ऐतिहासिक और प्रतिष्ठित इमारत है और पाकिस्तान की विदेशों में मौजूद प्रमुख संपत्तियों में से एक माना जाता है। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में इस होटल को वित्तीय चुनौतियों का सामना करना पड़ा है, जिसके कारण इसके पुनर्विकास या वैकल्पिक उपयोग को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
--आईएएनएस
वीकेयू/एएस
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