शेयर बाजार में MV Electrosystems IPO की धमाकेदार डेब्यू, पहले ही दिन निवेशकों को हुआ 22% का मुनाफा
MV Electrosystems IPO Listing: MV इलेक्ट्रोसिस्टम ने शेयर बाजार में जोरदार एंट्री ली. स्टॉक 520 रुपये पर लिस्ट हुआ, जो 425 रुपये के IPO प्राइस के मुकाबले 22.35% का प्रीमियम है. इस लिस्टिंग के साथ कंपनी की मार्केट कैप करीब 1,419 करोड़ रुपये पर पहुंच गई. यह प्रीमियम बताता है कि निवेशकों का भरोसा कंपनी की मौजूदा कमाई पर नहीं, बल्कि उसकी लॉन्ग टर्म ग्रोथ स्टोरी पर है. लेकिन लिस्टिंग प्रीमियम के साथ एक अहम सवाल भी खड़ा होता है. क्या बाजार ने भविष्य का ज्यादातर मौका पहले ही प्राइस में शामिल कर लिया है? या कंपनी अभी भी इस हाई वैल्यूएशन को सही साबित कर सकती है?
वैल्यूएशन अब पहले से ज्यादा मांग रहा है
IPO प्राइस पर MV Electrosystems की वैल्यू करीब 1,160 करोड़ रुपये थी. लिस्टिंग के बाद मार्केट कैप 1,419 करोड़ रुपये हो गई, जबकि बिजनेस के फंडामेंटल वही हैं. यानी निवेशक अब उसी भविष्य के मौके के लिए ज्यादा कीमत चुका रहे हैं. कंपनी का P/E रेशियो IPO प्राइस पर -91.81 गुना से बढ़कर लिस्टिंग के बाद -112.34 गुना हो गया. निगेटिव P/E इसलिए है क्योंकि कंपनी अभी घाटे में है. FY26 में भारी R&D खर्च और कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू होने से पहले के निवेश की वजह से नुकसान हुआ. इसलिए इस स्तर पर P/E कोई सार्थक वैल्यूएशन मेट्रिक नहीं है.
इस वक्त ज्यादा उपयोगी मेट्रिक है प्राइस-टू-ऑर्डर बुक रेशियो. यानी कंपनी की वैल्यूएशन की तुलना उसके पक्के ऑर्डर्स से की जाए. IPO वैल्यूएशन पर यह करीब 1.26 गुना था, जिसका मतलब था कि वैल्यूएशन का बड़ा हिस्सा एग्जिक्यूटेबल कॉन्ट्रैक्ट से बैक्ड था. लिस्टिंग के बाद यह रेशियो ऊपर चला गया है, जिससे वैल्यूएशन IPO की तुलना में कम हो गई है. हालांकि मजबूत ऑर्डर बुक अभी भी एक अहम सपोर्ट दे रही है.
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Hind Rectifiers से तुलना में कहां खड़ी है कंपनी?
लिस्टेड पीयर Hind Rectifiers के मुकाबले MV Electrosystems अभी छोटी है और घाटे में है. लेकिन एक बड़ी बात यह है कि कंपनी के प्रोपल्शन सिस्टम को पहले से ही कमर्शियल अप्रूवल मिल चुका है और उसके पास एक बड़ा पक्का ऑर्डर पाइपलाइन है. जबकि Hind Rectifiers के प्रोपल्शन प्रोडक्ट्स अभी कमर्शियल अप्रूवल का इंतजार कर रहे हैं. यह MV Electrosystems को एग्जिक्यूशन के लिहाज से एक मजबूत पोजिशन देता है. लेकिन मौजूदा वैल्यूएशन अभी भी काफी हद तक इस बात पर निर्भर करती है कि कंपनी अपने ऑर्डर्स को रेवेन्यू और मुनाफे में बदल पाती है या नहीं. स्टॉक अभी फेयर से थोड़ा महंगे वैल्यूएशन पर दिखता है क्योंकि भविष्य की काफी सफलता पहले से ही प्राइस में शामिल हो चुकी है.
यह स्टॉक अब किनके लिए सही है?
शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स लिस्टिंग मोमेंटम मजबूत रहने पर स्टॉक पर नजर रख सकते हैं. लेकिन 22% प्रीमियम लिस्टिंग के बाद शुरुआती निवेशक मुनाफा बुक करेंगे तो प्राइस मूवमेंट ज्यादा वोलेटाइल हो सकती है. मीडियम-टर्म निवेशकों को कंपनी तब दिलचस्प लग सकती है जब तिमाही एग्जिक्यूशन बड़े ऑर्डर बुक से मेल खाने लगे. रेवेन्यू और मार्जिन में दिखने वाला सुधार अगले कुछ तिमाहियों में ऊंची वैल्यूएशन को जायज ठहराने में मदद कर सकता है.
लॉन्ग-टर्म निवेशक जो भारत की रेलवे मॉडर्नाइजेशन स्टोरी पर भरोसा रखते हैं, वे बिजनेस को करीब से ट्रैक कर सकते हैं. निवेश का मामला अब नए कॉन्ट्रैक्ट जीतने से ज्यादा उन्हें डिलीवर करने पर टिका है. कंजर्वेटिव निवेशक इंतजार करना पसंद करेंगे , जब तक यह साफ न हो जाए कि हाल के निवेश सस्टेनेबल प्रॉफिटेबिलिटी और मजबूत कैश फ्लो में बदल रहे हैं.
अब आगे क्या देखना चाहिए?
921.64 करोड़ रुपये के ऑर्डर बुक का तिमाही एग्जिक्यूशन सबसे बड़ा सवाल है. बड़ा ऑर्डर बुक विजिबिलिटी तभी देता है जब डिलीवरी तय समय पर हो. प्रॉफिटेबिलिटी और ऑपरेटिंग कैश फ्लो भी अहम होगा. FY26 का घाटा भारी निवेश और कम कैपेसिटी यूटिलाइजेशन की वजह से था. जैसे-जैसे प्रोडक्शन बढ़ेगा, मार्जिन और कैश जनरेशन में सुधार देखना होगा. फैक्ट्री यूटिलाइजेशन बढ़ने से फिक्स्ड कॉस्ट ज्यादा यूनिट्स पर फैलेगी और प्रॉफिटेबिलिटी सुधरेगी. प्री-IPO शेयरहोल्डर्स की लॉक-इन एक्सपायरी पर भी नजर रखनी होगी क्योंकि उसके बाद शेयरों की सप्लाई बढ़ सकती है जिससे शॉर्ट-टर्म सेलिंग प्रेशर आ सकता है. रेलवे सेक्टर स्पेंडिंग और नए ऑर्डर विन्स भी उतने ही महत्वपूर्ण होंगे.
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डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए दी गई है और इसे निवेश की सलाह नहीं माना जाना चाहिए. किसी भी निवेश फैसले से पहले कृपया अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह लें.
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