मिडिल एज में तीन चीजों पर नियंत्रण से 13 साल तक टल सकता है डिमेंशिया : अध्ययन
नई दिल्ली, 6 अगस्त (आईएएनएस)। मिडिल एज में उच्च रक्तचाप, टाइप-2 मधुमेह और धूम्रपान को अगर नियंत्रित रखा तो तय है कि डिमेंशिया की शुरुआत को औसतन 13 वर्ष तक टाला जा सकता है। यह दावा एक नए अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में किया गया है।
अमेरिकी मेडिकल जर्नल न्यूरोलॉजी में प्रकाशित इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने 12,400 से अधिक लोगों के स्वास्थ्य आंकड़ों का लगभग 26 वर्षों तक विश्लेषण किया। अध्ययन की शुरुआत में प्रतिभागियों की औसत आयु 56 वर्ष थी। फॉलो अप पीरियड के दौरान 3,000 से अधिक प्रतिभागियों में डिमेंशिया बढ़ा।
शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन लोगों में मिडिल एज के दौरान उच्च रक्तचाप, टाइप-2 मधुमेह और धूम्रपान जैसे तीनों जोखिम कारक मौजूद नहीं थे, वे औसतन 30.1 वर्ष तक डिमेंशिया से मुक्त रहे। वहीं, जो इन्हें नियंत्रित नहीं कर पाए, उनमें डिमेंशिया-मुक्त अवधि केवल लगभग 17 वर्ष रही। इस प्रकार दोनों समूहों के बीच करीब 13 वर्षों का अंतर दर्ज किया गया।
अध्ययन के वरिष्ठ लेखक और अमेरिका के एनवाईयू लैंगोन हेल्थ से जुड़े डॉ. जोसेफ कोरेश ने कहा कि डिमेंशिया की प्रक्रिया लक्षण सामने आने से कई वर्ष पहले ही शुरू हो जाती है। ऐसे में मिडिल एज में हृदय और रक्त वाहिकाओं से जुड़े जोखिमों को नियंत्रित करना मस्तिष्क के दीर्घकालिक स्वास्थ्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
विशेषज्ञों के अनुसार, उच्च रक्तचाप और मधुमेह मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं, जबकि धूम्रपान ऑक्सीडेटिव तनाव और सूजन को बढ़ाकर मस्तिष्क कोशिकाओं पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। इन जोखिमों को कम करने से संज्ञानात्मक क्षमता लंबे समय तक सुरक्षित रखी जा सकती है।
हालांकि शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि डिमेंशिया को पूरी तरह रोका नहीं जा सकता, क्योंकि उम्र और आनुवंशिक कारक इसके प्रमुख जोखिम बने रहते हैं। फिर भी स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर, रक्तचाप और रक्त शर्करा को नियंत्रित रखकर तथा धूम्रपान से दूरी बनाकर डिमेंशिया के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
इससे पहले लैंसेट आयोग की रिपोर्ट में भी कहा गया था कि डिमेंशिया के लगभग 45 प्रतिशत मामलों को जीवनशैली और अन्य संशोधित किए जा सकने वाले जोखिम कारकों पर समय रहते नियंत्रण कर रोका या कई वर्षों तक टाला जा सकता है।
--आईएएनएस
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किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी को किया फोन, परिसीमन पर मांगा समर्थन तो कांग्रेस नेता ने दिया ये जवाब
Parliament Monsoon Session 2026: संसद का मानसून सत्र जारी है. लेकिन इस सत्र में सत्ता और विपक्ष के बीच भारी गतिरोध देखने को मिला है. जिसके चलते सदन की कार्यवाही ज्यादातर समय के लिए स्थगित रही है. इस बीच गुरुवार को केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को फोन किया.
इस दौरान दोनों नेताओं के बीच परिसीमन और महिला आरक्षण बिल पर चर्चा हुई. किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी से परिसमीन पर समर्थन मांगा. इस पर कांग्रेस नेता ने रिजिजू को जवाब दिया कि वो अपने सहयोगी दलों से बातचीत के बाद ही इस पर अपना रुख जाहिर करेंगे.
रिजिजू ने राहुल गांधी से मांगा परिसीमन पर समर्थन
बताया जा रहा है कि किरेन रिजिजू ने गुरुवार को राहुल गांधी से फोन पर बातचीत के दौरान परिसीमन पर समर्थन देने की मांग की. इसके साथ ही केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस नेता से कहा कि महिला आरक्षण लागू न होने की वजह से महिला समाज में नाराजगी बढ़ेगी. रिजिजू ने कहा कि परिसीमन पर समर्थन मिलने से महिला आरक्षण विधेयक लागू करने में मदद मिलेगी.
रिजिजू को राहुल गांधी ने क्या दिया जवाब?
उसके बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने किरेन रिजिजू से कहा कि वह पहले अपनी पार्टी और सहयोगी दलों से इस पर चर्चा करेंगे. इसके साथ ही इस मुद्दे पर ऑल पार्टी मीटिंग में भी चर्चा की जाएगी. चर्चा के बाद कांग्रेस सरकार को अपना रुख बताएगी.
पहले भी राहुल गांधी से मिल चुके हैं रिजिजू
बता दें ये पहली बार नहीं है जब किरेन रिजिजू ने इसी मुद्दे पर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी से मुलाकात कर बातचीत की हो. इससे पहले बुधवार को भी रिजिजू ने राहुल गांधी से मुलाकात की थी और सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने में सहयोग की मांग की थी. दोनों नेताओं की यह मुलाकात संसद भवन में स्थित राहुल गांधी के कार्यालय में हुई थी. ये मुलाकात करीब 50 मिनट तक चली थी. इस बैठक में कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा भी मौजूद थीं. हालांकि बाद में गौरव गोगोई और केसी वेणुगोपाल भी इस चर्चा में शामिल हुए थे.
कई और पार्टियों से भी संपर्क में है सरकार
बता दें कि केंद्र सरकार मानसून सत्र में ही परिसीमन और महिला आरक्षण बिल पास कराने की कोशिश कर रही है. जिसके लिए सरकार पहले ही कई राजनीतिक दलों के साथ चर्चा कर चुकी है. बताया जा रहा है कि सरकार इंडिया ब्लॉक के दलों- समाजवादी पार्टी, डीएमके और एनसीपी (एसपी) के साथ भी संपर्क बनाए हुए है. सूत्रों के मुताबिक, डीएमके ने अपने राज्य के हितों को लेकर सरकार से आश्वासन मांगा है.
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