सेंसेक्स करीब 600 अंक फिसला, इन कारणों के चलते गिर रहा शेयर बाजार
मुंबई, 6 मार्च (आईएएनएस)। भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार के कारोबारी सत्र में लाल निशान में बना हुआ है। दोपहर 1 बजे तक सेंसेक्स 588 अंक या 0.72 प्रतिशत की गिरावट के साथ 79,427 और निफ्टी 154 अंक या 0.62 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 24,612 पर था।
अब तक के कारोबार में बाजार की गिरावट को बैंकिंग और रियल्टी शेयर लीड कर रहे थे। निफ्टी रियल्टी 1.85 प्रतिशत और निफ्टी बैंक 1.31 प्रतिशत की कमजोरी के साथ कारोबार कर रहा था। इसके अलावा ऑटो, सर्विसेज और कंजप्शन पर दबाव देखा गया।
हालांकि, डिफेंस, एनर्जी, पीएसई, ऑयलएवंगैस, कमोडिटीज और मेटल इंडेक्स हरे निशान में थे।
बाजार में बड़ी गिरावट के पीछे बड़ा कारण अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच युद्ध का जारी रहना है। युद्ध के लंबा चलने से अब एनर्जी की आपूर्ति को भी जोखिम पैदा हो गया है, जिससे निवेशकों के सेंटीमेंट पर नकारात्मक प्रभाव हुआ है।
युद्ध के चलते कच्चे तेल में भी तेजी जारी है। डब्ल्यूटीआई क्रूड की कीमत 80.39 डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड का दाम 84.84 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है।
बाजार में गिरावट आने की वजह युद्ध की स्थिति में निवेशकों का सोने और चांदी जैसे सुरक्षित निवेश की ओर रुख करना है। खबर लिखे जाने तक कॉमेक्स पर सोना 0.81 प्रतिशत की तेजी के साथ 5,120 डॉलर प्रति औंस और चांदी 2.96 प्रतिशत की मजबूती के साथ 84.61 डॉलर प्रति औंस पर थी।
अमेरिकी बाजार में गिरावट भी भारतीय बाजार की कमजोरी के पीछे एक वजह है। गुरुवार के सत्र में डाओ 1.61 प्रतिशत और नैस्डैक 0.26 प्रतिशत की कमजोरी के साथ बंद हुआ।
विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की लगातार बिकवाली भी भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बनाने का काम कर रही है। एफआईआई ने गुरुवार को 5,153.37 करोड़ रुपए के इक्विटी की बिकवाली की थी।
--आईएएनएस
एबीएस/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
आर्कटिक मामलों पर सहयोग भारत और फिनलैंड के लिए अहम : एमईए
नई दिल्ली, 6 मार्च (आईएएनएस)। रायसीना डायलॉग 2026 के 11वें संस्करण का आयोजन किया गया। इस डायलॉग में फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए। भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल और सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने डायलॉग से संबंधित जानकारी साझा की।
सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर फिनलैंड के राष्ट्रपति डॉ. अलेक्जेंडर स्टब इस साल 4 से 7 मार्च तक भारत के दौरे पर हैं। बतौर राष्ट्रपति यह उनकी पहली यात्रा है। राष्ट्रपति के साथ एक उच्च स्तरीय मंत्री और आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल के साथ-साथ एक बड़ा बिजनेस डेलिगेशन भी है। यह दिखाता है कि दोनों पक्ष ट्रेड, बिजनेस और निवेश को द्विपक्षीय संबंधों के मुख्य स्तंभ के तौर पर कितना महत्व देते हैं।
जॉर्ज ने आगे कहा, वे नई दिल्ली में 11वें रायसीना डायलॉग 2026 के उद्घाटन सत्र में हमारे प्रधानमंत्री के साथ चीफ गेस्ट के तौर पर शामिल हुए और कुछ देर पहले उन्होंने संबोधन भी दिया। राष्ट्रपति स्टब की यह यात्रा फिनलैंड के प्रधानमंत्री, पेटेरी ओर्पो की इस साल फरवरी में एआई इम्पैक्ट समिट के लिए नई दिल्ली की यात्रा के तुरंत बाद हो रही है। प्रधानमंत्री ओर्पो ने समिट के दौरान हमारे प्रधानमंत्री से भी मुलाकात की थी।
उन्होंने कहा कि इंडिया-नॉर्डिक समिट ने दोनों देशों के नेताओं को जुड़े रहने का मौका भी दिया है। हमारे प्रधानमंत्री 2018 और 2022 में स्टॉकहोम और कोपेनहेगन में पहले और दूसरे इंडिया-नॉर्डिक समिट के दौरान मिले थे। राष्ट्रपति स्टब और प्रधानमंत्री मोदी पिछले साल लगातार और करीबी संपर्क में रहे। दोनों नेता अक्टूबर 2025 में जोहान्सबर्ग में जी20 नेताओं के समिट के दौरान मिले थे। उन्होंने पिछले साल कम से कम दो बार टेलीफोन पर बात भी की थी। आज अपनी मीटिंग के दौरान, पीएम मोदी और प्रेसिडेंट स्टब ने भारत-फिनलैंड के आपसी संबंध को आगे बढ़ाया है जो तकनीकी क्षेत्र के साथ, टिकाऊ और रणनीतिक साझेदारी तक बढ़ रहे हैं।
आर्कटिक से संबंधित सवाल को लेकर जॉर्ज ने कहा, दोनों पक्षों ने संयुक्त अनुसंधान पहल, एकेडमिक एक्सचेंज और क्षमता-निर्माण प्रोग्राम के जरिए आर्कटिक मामलों पर सहयोग और बातचीत को और मजबूत करने के अपने कमिटमेंट को फिर से दोहराया है। उन्होंने फिनलैंड में हुए पहले इंडिया-फिनलैंड आर्कटिक डायलॉग, द हिमालयन एंड आर्कटिक इकोसिस्टम पर ध्यान दिया, यह उस डायलॉग का नाम था जो फिनलैंड में हुआ था, जिसमें संसदीय, सरकारी अधिकारी, शैक्षिक और विशेषज्ञ आर्कटिक मामलों पर सहयोग को गहरा करने के लिए रणनीति और रास्तों पर विचार-विमर्श करने के लिए एक साथ आए थे।
सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने आगे कहा, दोनों नेताओं ने इंडिया-नॉर्डिक समिट के बड़े फ्रेमवर्क के अंदर आर्कटिक काउंसिल के स्ट्रक्चर में सहयोग को आगे बढ़ाने के महत्व पर भी जोर दिया, जो इस साल के आखिर में होगा। तो, आर्कटिक मामलों पर सहयोग और बातचीत चर्चाओं का एक जरूरी हिस्सा था।
पश्चिम एशिया और दूसरी टकराव की स्थिति को लेकर भारत और फिनलैंड के पक्ष को लेकर विदेश मंत्रालय ने कहा, दोनों नेताओं ने भारत, फिनलैंड और यूरोप दोनों के लिए जरूरी मुद्दों पर चर्चा की। नेताओं ने पश्चिम एशिया में मौजूदा हालात पर चर्चा की। जहां तक हमारा सवाल है, हमारे प्रवक्ता ने पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात पर पहले ही कुछ बयान जारी कर दिए हैं। हमने अपनी गहरी चिंता भी जाहिर की है और संयम और तनाव कम करने की अपील की है।
--आईएएनएस
केके/एएस
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others
News Nation





















