US-Israel-Iran War Live Updates: अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच छिड़ा युद्ध सातवें दिन और भी भयानक हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने स्पष्ट किया है कि उनकी सेनाएं ईरानी सैन्य शक्ति को पूरी तरह खत्म करने के मिशन पर हैं। इसी क्रम में श्रीलंका के तट के पास एक अमेरिकी पनडुब्बी ने टॉरपीडो दागकर ईरान के एक युद्धपोत को डुबो दिया, जिसमें 87 लोगों की मौत हो गई और 32 घायलों को गाले के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। समुद्र में तनाव इतना बढ़ गया है कि कुवैत के पास एक तेल टैंकर पर भी बड़ा धमाका हुआ है, जिससे जहाज में पानी भरने लगा है। अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि भीषण हमलों के कारण अब ईरान की वायुसेना और नौसेना लगभग खत्म होने की कगार पर हैं।
इस युद्ध का असर अब अंतरराष्ट्रीय राजनीति और सुरक्षा नियमों पर भी दिखने लगा है। अमेरिका ने भारत को समुद्र में फंसे रूसी तेल को खरीदने के लिए 30 दिन की विशेष छूट दी है ताकि दुनिया भर में ऊर्जा की सप्लाई न रुके। वहीं, अमेरिकी सीनेट ने उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है जो राष्ट्रपति ट्रंप की युद्ध संबंधी शक्तियों को सीमित करने वाला था, जिसका मतलब है कि वे बिना कांग्रेस की मंजूरी के सैन्य कार्रवाई जारी रख सकते हैं। सुरक्षा के बिगड़ते हालात को देखते हुए कतर में भारतीय दूतावास ने अपने नागरिकों के लिए सख्त एडवाइजरी जारी की है। इस बीच, कुवैत में हुए ड्रोन हमले में जान गंवाने वाले सभी छह अमेरिकी सैनिकों की पहचान भी पूरी कर ली गई है।
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अयातुल्ला अली खामेनेई के एक्स हैंडल से एक पोस्ट हुआ है। खुर्रम शहर का वक्त आ गया। ये मिसाइल ईरानियों की पहचान ये दुश्मन को खत्म करने के लिए ये ईरानियों के युवाओं ने तैयार की है। वो भी खामनी के एक सैंडल से और पोस्ट करके इसने जो कैप्शन में लिखा है वो ये कि ये मिसाइल ईरानियों की पहचान है। ये ईरान के दुश्मनों को खत्म करने के लिए है और इसे ईरानियों ने बनाया है। यहां के यूथ ने तैयार किया और लेबनान में जहां 102 लोगों की मौत हो गई है। लोग पलायन कर रहे हैं।
खोर्रमशहर क्या है
खोर्रमशहर-4 को खैबर मिसाइल भी कहते हैं। यह मीडियम रेंज बैलिस्टिक मिसाइल (MRBM) है जो सड़क पर चलने वाली लॉन्चर से दागी जाती है। इसकी लंबाई 13 से 13.5 मीटर, व्यास 1.5 से 1.8 मीटर और वजन 15000 से 20000 किलो है। इसमें 1800 किलो तक पेलोड ले जाने की क्षमता है। मिसाइल में 1 टन से ज्यादा हाई एक्सप्लोसिव वारहेड लगाया जा सकता है। यह लिक्विड फ्यूल से चलती है और 2000 से 3000 किलोमीटर तक मार कर सकती है। ईरान का दावा है कि यह 2000 किलोमीटर दूर भी 30 मीटर के दायरे में सटीक निशाना लगाती है।
खामेनेई की मौत के बाद लेबनान से सक्रिय हिजबुल्ला ने उत्तरी इजराइल की ओर रॉकेट दागे। इसके जवाब में इजराइल ने दक्षिणी लेबनान, बेरूत और पूर्वी बेका घाटी में संगठन के ठिकानों पर नए हवाई हमले किए। विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही हिजबुल्ला अब पहले जितना शक्तिशाली नहीं रहा, फिर भी उसके कदम लेबनान को गंभीर संकट में डाल सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, हिजबुल्ला फिलहाल अमेरिका और इजराइल के खिलाफ ईरान के युद्ध में प्रभावी सैन्य सहयोगी बनने की स्थिति में नहीं है, लेकिन उसकी गतिविधियां लेबनान को अस्थिर कर सकती हैं। इसके साथ ही यह आशंका भी जताई जा रही है कि हिजबुल्ला की प्रतिक्रिया को बहाना बनाकर इजराइल या सीरिया लेबनान में जमीनी अभियान शुरू कर सकते हैं। हिजबुल्ला की स्थापना 1985 में 1979 की ईरानी क्रांति से प्रेरित होकर की गई थी। लेबनान में हमास कमांडर के भी मारे जाने की खबर है। हमास कमांडर अताउल्लाह अली ढेर हुआ है। इजराइल की लेवी ने ढेर कर दिया इसको। हमास कमांडर ट्रिपोली इलाके में मार गिराया गया। ट्रिपोली इलाके में इसको मारा गया। बड़ी जानकारी सामने आ रही है लेबन। ईरान से रंग के बीच इजराइल ने लेबनान के खिलाफ भी हमला बोल दिया है। जहां इजराइली नेवी ने त्रिपोली इलाके में हमला करके हमास कमांडर वसीम अतालाह अली को मार गिराया जो लेबनान में हमास ऑपरेटिव्स को ट्रेनिंग देता था। बताया जा रहा है कि हमले के वक्त अतालाह अपने परिवार के साथ घर पर मौजूद था।
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