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LPG ही नहीं मिडिल ईस्ट युद्ध का CNG और PNG पर भी पड़ सकता है असर, आगे क्या?

LPG Stock Crisis: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब पूरी दुनिया पर पड़ने लगा है. हाल ही में अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद क्षेत्र की स्थिति काफी तनावपूर्ण हो गई है. इस संघर्ष में भारत सीधे तौर पर शामिल नहीं है, लेकिन इसके असर से भारत भी अछूता नहीं रह सकता. खासतौर पर भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आम लोगों की रसोई पर इसका असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है.

क्या कहती हैं रिपोर्ट्स

रिपोर्ट्स के अनुसार अगर फारस की खाड़ी में जारी तनाव जल्दी खत्म नहीं हुआ, तो आने वाले हफ्तों में भारत में रसोई गैस यानी एलपीजी (LPG) की सप्लाई प्रभावित हो सकती है. इससे देश के करोड़ों परिवारों को गैस की किल्लत का सामना करना पड़ सकता है. साथ ही गैस की कीमतें भी बढ़ सकती हैं, जिससे महंगाई और ज्यादा बढ़ने की आशंका है.

तो इसलिए रुक सकती है सप्लाई

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक फारस की खाड़ी में चल रहे तनाव की वजह से गैस से भरे कई जहाज होर्मुज स्ट्रेट के आसपास फंस गए हैं. यह समुद्री रास्ता दुनिया के सबसे अहम तेल और गैस परिवहन मार्गों में से एक है. अगर यहां से जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है, तो कई देशों की ऊर्जा सप्लाई पर असर पड़ सकता है. भारत भी उन्हीं देशों में शामिल है जो इस रास्ते से आने वाली सप्लाई पर काफी हद तक निर्भर है.

भारत दुनिया का दूसरा LPG आयतक देश

डेटा इंटेलिजेंस फर्म केप्लर के अनुसार भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी आयातक देश है. भारत अपनी जरूरत का करीब 90 प्रतिशत एलपीजी मिडिल ईस्ट के देशों से खरीदता है. ऐसे में अगर इस क्षेत्र से सप्लाई रुकती है या धीमी पड़ती है तो भारत में गैस की कमी हो सकती है. हालांकि, भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका से भी एलपीजी खरीदने के लिए लंबी अवधि का समझौता किया है. लेकिन वहां से आने वाली गैस की मात्रा फिलहाल काफी कम है.

इसके अलावा अमेरिका से गैस लाने की लागत भी ज्यादा होती है क्योंकि दूरी अधिक है और समुद्री ढुलाई महंगी पड़ती है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अभी अमेरिका से अतिरिक्त गैस खरीदी भी जाए तो वह अप्रैल से पहले भारत नहीं पहुंच पाएगी.

विकल्प भी हैं सीमित

एक्सपर्ट्स की मानें तो भारत के पास एलपीजी के वैकल्पिक सप्लायर ढूंढने के विकल्प बहुत सीमित हैं. कुछ अतिरिक्त सप्लाई अमेरिका, रूस या अर्जेंटीना से मिल सकती है, लेकिन इसकी मात्रा ज्यादा नहीं होगी. साथ ही यह पूरी तरह वैश्विक कीमतों और जहाजों की उपलब्धता पर निर्भर करेगी.

केवल 30 दिन का बचा है स्टॉक

एक सरकारी अधिकारी के अनुसार फिलहाल भारत के पास करीब एक महीने यानी लगभग 30 दिनों का एलपीजी स्टॉक मौजूद है. अगर पश्चिम एशिया में तनाव ज्यादा समय तक बना रहता है तो सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ सकता है. इस स्थिति को देखते हुए भारतीय रिफाइनरी कंपनियों ने सरकार के साथ बैठक भी की है और ऊर्जा आपूर्ति को बनाए रखने के लिए आपातकालीन योजना पर चर्चा की गई है.

CNG-PNG पर भी पड़ सकता है असर

यह भी ध्यान देने वाली बात है कि भारत अपनी करीब दो-तिहाई एलएनजी और लगभग आधा कच्चा तेल भी इसी क्षेत्र से आयात करता है. ऐसे में अगर हालात बिगड़ते हैं तो केवल एलपीजी ही नहीं बल्कि सीएनजी और पीएनजी की सप्लाई भी प्रभावित हो सकती है. हालांकि भारत सरकार ने लोगों को भरोसा दिलाया है कि फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है.

सरकार का क्या प्लान

सरकार के अनुसार देश में एलपीजी और एलएनजी का भंडार संतोषजनक है और सप्लाई लगातार जारी है. अधिकारियों का कहना है कि ऊर्जा सुरक्षा को लेकर भारत की स्थिति मजबूत है और जरूरत पड़ने पर दूसरे देशों से भी आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी. सरकार का कहना है कि रोजाना स्टॉक की भरपाई की जा रही है और आम लोगों या उद्योगों पर इसका असर नहीं पड़ने दिया जाएगा. इसलिए फिलहाल लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन पश्चिम एशिया की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है.

यह भी पढ़ें: 'सहेली पिंक स्मार्ट कार्ड' से लेकर फ्री LPG सिलेंडर, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जल्द करेंगी 4 बड़ी योजनाओं का शुभारंभ

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रिपोर्ट: पाकिस्तान के युवाओं के सामने दो विकल्प, चुप रहो या देश छोड़ो

इस्लामाबाद, 5 मार्च (आईएएनएस)। पाकिस्तानी अधिकारी युवाओं की नाराजगी को आर्थिक विफलता के बजाय सुरक्षा समस्या के रूप में पेश करते रहे हैं। यहां युवा सड़कों पर या ऑनलाइन खुलकर बोलने या विरोध करने के बजाय देश छोड़कर विदेश जाने को अधिक सुरक्षित और व्यावहारिक विकल्प मानते हैं। वर्षों से चले आ रहे दमन ने युवा प्रदर्शनकारियों के बीच एकता को कमजोर कर दिया है। यह दावा गुरुवार को प्रकाशित एक रिपोर्ट में क‍िया गया।

गैर-लाभकारी समाचार एजेंसी द न्यू ह्यूमैनिटेरियन की रिपोर्ट में कहा गया, “पिछले दो वर्षों में 8 लाख से अधिक युवा पाकिस्तान छोड़ चुके हैं। इसके पीछे केवल गंभीर आर्थिक अस्थिरता ही नहीं, बल्कि सड़कों पर होने वाले विरोध प्रदर्शनों और डिजिटल माध्यमों पर असहमति व्यक्त करने पर राज्य का कड़ा नियंत्रण भी एक बड़ा कारण है।”

रिपोर्ट में आगे कहा गया कि लगभग 25 करोड़ की आबादी वाले देश के लिए यह चिंताजनक आंकड़ा है, जिसे दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्रों में से एक होना चाहिए। पाकिस्तान की करीब 75 प्रतिशत आबादी 35 वर्ष से कम उम्र की है, जबकि युवाओं में बेरोजगारी दर लगभग 10 प्रतिशत के आसपास है, इसलिए यह स्थिति आश्चर्यजनक नहीं है।

रिपोर्ट के अनुसार, जब भी पाकिस्तान में युवा बदलाव के लिए संगठित होते हैं, तो उन्हें हिंसा और सरकार के लगाए गए सेंसरशिप का सामना करना पड़ता है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि अक्टूबर 2025 में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के मुजफ्फराबाद क्षेत्र में युवाओं ने नागरिक अधिकार संगठन अवामी एक्शन कमेटी (एएसी) के नेतृत्व में प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारियों ने सरकारी अधिकारियों की आलीशान जीवनशैली की आलोचना की, जबकि स्थानीय लोग गेहूं और बिजली जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहे थे। पाकिस्तानी अधिकारियों की हिंसक कार्रवाई में 10 लोगों की मौत हो गई और सरकार ने इंटरनेट बंद कर दिया।

रिपोर्ट में कहा गया, “मुजफ्फराबाद में युवाओं के विरोध प्रदर्शन पर इतनी कठोर प्रतिक्रिया पाकिस्तान में कोई असामान्य बात नहीं है। यह दरअसल एक बड़े मुद्दे का संकेत है। नेताओं को वास्तविक डर है कि पूरे महाद्वीप में फैल रहे तथाकथित जेन-ज़ी के विरोध प्रदर्शनों की लहर पाकिस्तान तक भी पहुंच सकती है।”

रिपोर्ट के अनुसार, दशकों से पाकिस्तान में छात्र संघों पर प्रतिबंध लगा हुआ है, जो संगठित छात्र आंदोलनों के प्रति राज्य के गहरे डर को दर्शाता है।

रिपोर्ट में कहा गया, “बांग्लादेश और नेपाल के उलट, जहां स्टूडेंट्स पॉलिटिकली अवेयर और एक्टिव हैं, पाकिस्तानी कैंपस पर कड़ी नज़र रखी जाती है, जहां बोलने की आज़ादी या पॉलिटिकल राय के लिए कोई प्लेटफ़ॉर्म नहीं है। पाकिस्तानी यूनिवर्सिटीज़ में भी स्टूडेंट्स के गायब होने की लहर आई है, खासकर बलूच स्टूडेंट्स, जिन्होंने लंबे समय से सरकार पर बलूचिस्तान के अमीर रिसोर्सेज़ का इस्तेमाल करने और लोकल आबादी को अलग-थलग करने का आरोप लगाया है।”

रिपोर्ट में कहा गया कि पाकिस्तान के कई शिक्षित और कुशल युवा देश में किसी सार्थक बदलाव की उम्मीद नहीं देखते। जिंदा रहने के लिए चुप रहना या अपना देश छोड़ देना ही अब उनके पास बचे दो विकल्प बन गए हैं।

--आईएएनएस

एवाई/डीएससी

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