यूपीः आयुष्मान भारत योजना में बड़ा बदलाव, अब AI करेगा हेल्थ क्लेम्स का फैसला
देश की प्रमुख स्वास्थ्य योजना आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना में एक बड़ा तकनीकी बदलाव होने जा रहा है. अब इस योजना के तहत अस्पतालों द्वारा किए जाने वाले इलाज के क्लेम्स की जांच और मंजूरी डॉक्टरों की बजाय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से की जाएगी.
इस नई व्यवस्था के लिए नेशनल हेल्थ अथॉरिटी ने पायलट प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है. इस प्रयोग की शुरुआत सबसे पहले यूपी और एमपी में की जाएगी. माना जा रहा है कि इससे क्लेम प्रक्रिया तेज, पारदर्शी और अधिक भरोसेमंद बन सकेगी.
मैनुअल सिस्टम से डिजिटल सिस्टम की ओर कदम
अब तक आयुष्मान भारत योजना में क्लेम्स की जांच पूरी तरह मैनुअल प्रक्रिया से होती थी. अस्पताल इलाज के बाद क्लेम भेजते थे और डॉक्टरों तथा अधिकारियों की टीम दस्तावेजों की जांच करती थी.
इस प्रक्रिया में अक्सर कई दिन लग जाते थे, जिससे अस्पतालों को भुगतान मिलने में देरी होती थी. कई मामलों में कागजी जांच के कारण क्लेम्स अटक भी जाते थे.
नई एआई आधारित प्रणाली के आने से साधारण क्लेम्स की जांच कुछ घंटों में ही पूरी हो सकेगी. यह सिस्टम निर्धारित मेडिकल गाइडलाइंस के आधार पर क्लेम्स की जांच करेगा और सही मामलों को तेजी से मंजूरी देगा.
यूपी में बनेगा ऑटोमेटेड एडजुडिकेशन सिस्टम
उत्तर प्रदेश में इस पायलट प्रोजेक्ट को लागू करने की जिम्मेदारी स्टेट एजेंसी फॉर कॉम्प्रेन्हेंसिव हेल्थ एंड इंटीग्रेटेड सर्विस को दी गई है. यह एजेंसी एक ऑटोमेटेड एडजुडिकेशन सिस्टम विकसित करेगी.
यह सिस्टम अस्पतालों द्वारा भेजे गए क्लेम्स का डिजिटल विश्लेषण करेगा और तय करेगा कि क्लेम सही है या नहीं. शुरुआती चरण में यह प्रयोग खास इलाजों, जैसे किडनी से जुड़े उपचार और डायलिसिस क्लेम्स से शुरू किया जा सकता है.
फर्जी क्लेम्स पर लगेगी रोक
सरकार का मानना है कि एआई आधारित सिस्टम से स्वास्थ्य योजना में होने वाली धोखाधड़ी पर काफी हद तक लगाम लग सकेगी. एआई एल्गोरिद्म मेडिकल रिकॉर्ड, इलाज की प्रकृति और खर्च के पैटर्न का विश्लेषण करके यह पहचान सकेगा कि कोई क्लेम संदिग्ध है या नहीं. इससे फर्जी बिलिंग और गलत क्लेम्स को जल्दी पकड़ा जा सकेगा.
इससे न सिर्फ सरकारी संसाधनों की बचत होगी, बल्कि योजना का लाभ वास्तव में जरूरतमंद मरीजों तक पहुंच सकेगा.
अस्पतालों को जल्दी मिलेगा भुगतान
नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा अस्पतालों को मिलेगा. अभी क्लेम मंजूरी में देरी के कारण अस्पतालों को भुगतान मिलने में लंबा समय लग जाता है.
एआई आधारित प्रणाली के लागू होने से क्लेम्स तेजी से प्रोसेस होंगे और अस्पतालों को जल्दी भुगतान मिल सकेगा। इससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बेहतर होने की उम्मीद है.
मरीजों को भी मिलेगा बेहतर लाभ
आयुष्मान भारत योजना के तहत गरीब और कमजोर वर्ग के परिवारों को हर साल 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिलता है. नई तकनीक लागू होने से मरीजों को भी बेहतर और तेज स्वास्थ्य सेवाएं मिलने की संभावना है। साथ ही योजना के संचालन में पारदर्शिता और दक्षता भी बढ़ेगी.
सफल होने पर पूरे देश में लागू हो सकता है मॉडल
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहा, तो इसे देश के अन्य राज्यों में भी लागू किया जा सकता है. हालांकि विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि एआई का उपयोग करते समय डेटा सुरक्षा, मरीजों की गोपनीयता और सिस्टम की सटीकता पर विशेष ध्यान देना जरूरी होगा.
कुल मिलाकर, यह पहल भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में डिजिटल परिवर्तन की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है, जो भविष्य में हेल्थकेयर सेवाओं को और आधुनिक और प्रभावी बना सकती है.
अमेरिकी कार्रवाई के बाद विश्व व्यवस्था गड़बड़ाई
बीजिंग, 5 मार्च (आईएएनएस)। दूसरे विश्व युद्ध के बाद कुछ अपवादों को छोड़ दें तो दुनिया ने सभ्य होने की तरफ लगातार कदम बढ़ाए, लेकिन इक्कीसवीं सदी का चौथाई हिस्सा बीतने के बाद लग रहा है कि एक बार फिर दुनिया आधुनिकता की चादर लपेटे मध्य युगीन बर्बरता की ओर बढ़ रही है।
28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमले के बाद ऐसी सोच वैश्विक स्तर पर बढ़ी है। इस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला रूहोल्लाह मुसावी खोमैनी समेत कई सैन्य अधिकारियों की मौत ने दुनिया को एक बार फिर हिलाकर रख दिया है। दुनिया के कमजोर देश एक बार फिर आशंकित हो उठे हैं। उन्हें यह डर सताने लगा है कि अमेरिका के खिलाफ अगर उन्होंने नीतियां अपनाईं, तो हो सकता है कि अमेरिका अपने तरीके से योजना बनाकर उस पर हमला कर दे।
अमेरिका ने ईरान पर हमले के लिए जिन कारणों को गिनाया है, उनमें सबसे प्रमुख कारण ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकना, ईरान की मिसाइल क्षमताओं को खत्म करना और वहां की मौजूदा शासन व्यवस्था को बदलना है। अमेरिका ने तर्क दिया है कि ईरान परमाणु हथियार विकसित करने के करीब था, जो दुनिया और क्षेत्रीय सहयोगियों के लिए एक अस्वीकार्य सुरक्षा खतरा है। ट्रंप का कहना है कि ईरान ने अपनी परमाणु महत्वाकांक्षाओं को त्यागने के हर अवसर को ठुकरा दिया था।
ईरान पर हमले के बाद यह भी हो सकता है कि आतंकी घटनाएं बढ़ें। इससे दुनिया की चिंताएं बढ़ना अस्वाभाविक नहीं है।
अमेरिका दावा करता है कि वह लोकतांत्रिक देश है। वह पूरी दुनिया में अपनी तरह लोकतंत्र स्थापित करने का दावा करता है। लेकिन जहां भी वह कार्रवाई करता है, वहां लोकतंत्र आते हुए नहीं दिखता। ट्रंप के दौर में ऐसी कार्रवाइयों से विश्व आर्डर गड़बड़ा गया है।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
--आईएएनएस
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