चीन के उच्च गुणवत्ता वाले आर्थिक विकास की मजबूत प्रेरक शक्ति बन रही एआई
बीजिंग, 5 मार्च (आईएएनएस)। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) चीन के उच्च-गुणवत्ता वाले आर्थिक विकास के लिए एक मजबूत प्रेरक शक्ति के रूप में उभर रही है। वर्ष 2025 तक चीन के प्रमुख कृत्रिम बुद्धिमत्ता उद्योग का कुल आकार 12 खरब युआन से अधिक हो चुका है और इस क्षेत्र में 6,200 से अधिक उद्यम सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। यह जानकारी चीन के उद्योग और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री ली लेछंग ने 5 मार्च को 14वीं राष्ट्रीय जन प्रतिनिधि सभा के चौथे सत्र के दौरान आयोजित “मंत्रियों का गलियारा” नामक साक्षात्कार कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बातचीत में दी।
ली लेछंग ने बताया कि चीन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विकास ने कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति हासिल की है। उन्होंने इस संदर्भ में तीन प्रमुख पहलुओं पर विशेष रूप से प्रकाश डाला। पहला, चीन के बड़े पैमाने के एआई मॉडल वैश्विक स्तर पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। दूसरा, एआई तकनीक विभिन्न उद्योगों में उत्पादन क्षमता को सशक्त बना रही है। तीसरा, स्मार्ट उपकरण और बुद्धिमान डिवाइस आम लोगों के दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बनते जा रहे हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि चीनी कंपनियों ने अब तक 300 से अधिक ह्यूमनॉइड रोबोट मॉडल विकसित और लॉन्च किए हैं, जो वैश्विक स्तर पर उपलब्ध कुल मॉडलों के आधे से भी अधिक हैं।
ली लेछंग ने आगे कहा कि वर्ष 2026 में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और विनिर्माण क्षेत्र के बीच दोतरफा सहयोग को और अधिक मजबूत करने के लिए व्यापक प्रयास किए जाएंगे। विशेष रूप से “एआई + विनिर्माण” मॉडल को सक्रिय रूप से प्रोत्साहित किया जाएगा।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
--आईएएनएस
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यूपीः आयुष्मान भारत योजना में बड़ा बदलाव, अब AI करेगा हेल्थ क्लेम्स का फैसला
देश की प्रमुख स्वास्थ्य योजना आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना में एक बड़ा तकनीकी बदलाव होने जा रहा है. अब इस योजना के तहत अस्पतालों द्वारा किए जाने वाले इलाज के क्लेम्स की जांच और मंजूरी डॉक्टरों की बजाय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से की जाएगी.
इस नई व्यवस्था के लिए नेशनल हेल्थ अथॉरिटी ने पायलट प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है. इस प्रयोग की शुरुआत सबसे पहले यूपी और एमपी में की जाएगी. माना जा रहा है कि इससे क्लेम प्रक्रिया तेज, पारदर्शी और अधिक भरोसेमंद बन सकेगी.
मैनुअल सिस्टम से डिजिटल सिस्टम की ओर कदम
अब तक आयुष्मान भारत योजना में क्लेम्स की जांच पूरी तरह मैनुअल प्रक्रिया से होती थी. अस्पताल इलाज के बाद क्लेम भेजते थे और डॉक्टरों तथा अधिकारियों की टीम दस्तावेजों की जांच करती थी.
इस प्रक्रिया में अक्सर कई दिन लग जाते थे, जिससे अस्पतालों को भुगतान मिलने में देरी होती थी. कई मामलों में कागजी जांच के कारण क्लेम्स अटक भी जाते थे.
नई एआई आधारित प्रणाली के आने से साधारण क्लेम्स की जांच कुछ घंटों में ही पूरी हो सकेगी. यह सिस्टम निर्धारित मेडिकल गाइडलाइंस के आधार पर क्लेम्स की जांच करेगा और सही मामलों को तेजी से मंजूरी देगा.
यूपी में बनेगा ऑटोमेटेड एडजुडिकेशन सिस्टम
उत्तर प्रदेश में इस पायलट प्रोजेक्ट को लागू करने की जिम्मेदारी स्टेट एजेंसी फॉर कॉम्प्रेन्हेंसिव हेल्थ एंड इंटीग्रेटेड सर्विस को दी गई है. यह एजेंसी एक ऑटोमेटेड एडजुडिकेशन सिस्टम विकसित करेगी.
यह सिस्टम अस्पतालों द्वारा भेजे गए क्लेम्स का डिजिटल विश्लेषण करेगा और तय करेगा कि क्लेम सही है या नहीं. शुरुआती चरण में यह प्रयोग खास इलाजों, जैसे किडनी से जुड़े उपचार और डायलिसिस क्लेम्स से शुरू किया जा सकता है.
फर्जी क्लेम्स पर लगेगी रोक
सरकार का मानना है कि एआई आधारित सिस्टम से स्वास्थ्य योजना में होने वाली धोखाधड़ी पर काफी हद तक लगाम लग सकेगी. एआई एल्गोरिद्म मेडिकल रिकॉर्ड, इलाज की प्रकृति और खर्च के पैटर्न का विश्लेषण करके यह पहचान सकेगा कि कोई क्लेम संदिग्ध है या नहीं. इससे फर्जी बिलिंग और गलत क्लेम्स को जल्दी पकड़ा जा सकेगा.
इससे न सिर्फ सरकारी संसाधनों की बचत होगी, बल्कि योजना का लाभ वास्तव में जरूरतमंद मरीजों तक पहुंच सकेगा.
अस्पतालों को जल्दी मिलेगा भुगतान
नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा अस्पतालों को मिलेगा. अभी क्लेम मंजूरी में देरी के कारण अस्पतालों को भुगतान मिलने में लंबा समय लग जाता है.
एआई आधारित प्रणाली के लागू होने से क्लेम्स तेजी से प्रोसेस होंगे और अस्पतालों को जल्दी भुगतान मिल सकेगा। इससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बेहतर होने की उम्मीद है.
मरीजों को भी मिलेगा बेहतर लाभ
आयुष्मान भारत योजना के तहत गरीब और कमजोर वर्ग के परिवारों को हर साल 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिलता है. नई तकनीक लागू होने से मरीजों को भी बेहतर और तेज स्वास्थ्य सेवाएं मिलने की संभावना है। साथ ही योजना के संचालन में पारदर्शिता और दक्षता भी बढ़ेगी.
सफल होने पर पूरे देश में लागू हो सकता है मॉडल
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहा, तो इसे देश के अन्य राज्यों में भी लागू किया जा सकता है. हालांकि विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि एआई का उपयोग करते समय डेटा सुरक्षा, मरीजों की गोपनीयता और सिस्टम की सटीकता पर विशेष ध्यान देना जरूरी होगा.
कुल मिलाकर, यह पहल भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में डिजिटल परिवर्तन की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है, जो भविष्य में हेल्थकेयर सेवाओं को और आधुनिक और प्रभावी बना सकती है.
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