हरियाणा की आगामी राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले चुनावों में एक अप्रत्याशित मोड़ आ गया है। एक निर्दलीय उम्मीदवार मैदान में उतर गया है। इससे पहले जो मुकाबला सीधा-सादा लग रहा था, उसमें अब और भी रहस्य जुड़ गया है। निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नंदल गुरुवार को कुछ निर्दलीय विधायकों के साथ नामांकन पत्र दाखिल करने पहुंचे, जिससे चुनावी समीकरण में एक संभावित बदलाव का संकेत मिला है। खबरों के मुताबिक, तीन निर्दलीय विधायकों - सावित्री जिंदल, देवेंद्र कडियान और राजेश जून - ने सतीश नंदल को अपना समर्थन दिया है।
नंदल ने बताया कि वे वर्तमान में भाजपा में उपाध्यक्ष हैं। उन्होंने आगे कहा कि नामांकन पत्रों की जांच प्रक्रिया कल होगी, जिसके बाद स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। नंदाल ने आगे कहा कि वे सभी 90 विधायकों से संपर्क करके उनका समर्थन प्राप्त करेंगे। कांग्रेस पार्टी ने राज्य से अनुसूचित जाति के प्रमुख नेता कमरवीर बौध को अपना उम्मीदवार बनाया है। वहीं, भारतीय जनता पार्टी ने करनाल के पूर्व लोकसभा सांसद संजय भाटिया को मैदान में उतारा है। भाटिया को हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल खट्टर का करीबी माना जाता है।
शुरुआत में दोनों प्रमुख पार्टियों की आसान जीत की उम्मीद थी। हरियाणा विधानसभा के 90 सदस्यों में भाजपा को 48 विधायकों का समर्थन प्राप्त है, जबकि कांग्रेस को 37 विधायकों का समर्थन प्राप्त है, जिससे उनके उम्मीदवारों की जीत लगभग तय लग रही थी। हालांकि, तीसरे उम्मीदवार के मैदान में उतरने से इस दौड़ में अनिश्चितता और राजनीतिक दिलचस्पी का एक नया मोड़ आ गया है, जिससे मुकाबले की दिशा में बदलाव की संभावना है।
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