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एपस्टीन कांड में अब नया मोड़, ट्रंप से जुड़े वो 'सीक्रेट' पन्ने, जो इस हफ्ते दुनिया के सामने आएंगे

अमेरिकी राजनीति और न्याय के गलियारों में इस समय एक ही नाम गूंज रहा है जेफ्री एपस्टीन. दशकों तक रईसों और रसूखदारों के बीच रहने वाले एपस्टीन की मौत के बाद भी उसके काले कारनामों के पन्ने एक-एक कर खुल रहे हैं. ताजा मामला यह है कि अमेरिकी न्याय विभाग (DoJ) इस हफ्ते के अंत तक उन फाइलों की एक नई खेप जारी करने वाला है, जिसमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम एक महिला द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के साथ जुड़ा हुआ है.

वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) की रिपोर्ट ने इस मामले में आग में घी डालने का काम किया है. बताया जा रहा है कि सरकार की वेबसाइट से अचानक हजारों फाइलें हटा दी गई थीं, जिससे कई सवाल खड़े हो गए थे. आइए जानते हैं क्या है इस पूरे मामले का सच और क्यों ये फाइलें ट्रंप के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती हैं?

40,000 से ज्यादा फाइलों का 'गायब' होना?

जब न्याय विभाग ने एपस्टीन से जुड़ी फाइलों को सार्वजनिक करना शुरू किया, तो लोगों ने गौर किया कि करीब 47,635 फाइलें गायब हैं. इतनी बड़ी संख्या में दस्तावेजों का गायब होना किसी बड़े कवर-अप की तरफ इशारा कर रहा था. लेकिन जब हंगामा बढ़ा, तो न्याय विभाग के प्रवक्ता ने सफाई दी कि इन फाइलों को 'दोबारा रिव्यू' के लिए ऑफलाइन लिया गया है.

सरकार ने इसके पीछे तीन मुख्य कारण बताए हैं.पीड़ितों के नाम और उनकी पहचान को पूरी तरह गुप्त रखना. फाइलों पर गलती से गलत लेबल लग गए थे, जिन्हें ठीक करना जरूरी था. फाइलों में मौजूद आपत्तिजनक तस्वीरों और सामग्री को सार्वजनिक होने से रोकना.

विभाग का दावा है कि वे अब तक का सबसे पारदर्शी काम कर रहे हैं और काट-छांट (Redaction) पूरी होते ही सारी फाइलें फिर से ऑनलाइन डाल दी जाएंगी.

ट्रंप पर लगे आरोपों का 'फॉर्म 302' कनेक्शन

इस पूरे मामले का सबसे संवेदनशील हिस्सा वे फाइलें हैं जिन्हें 'फॉर्म 302' कहा जाता है. ये असल में FBI द्वारा किए गए इंटरव्यू की समरी होती हैं. इन पन्नों में एक महिला के बयान दर्ज हैं, जिसने 2019 में आरोप लगाया था कि 1980 के दशक में, जब वह नाबालिग थी, तब जेफ्री एपस्टीन और डोनाल्ड ट्रंप दोनों ने उसके साथ गलत व्यवहार किया था.

वॉल स्ट्रीट जर्नल ने साफ किया है कि ये आरोप अभी तक साबित नहीं हुए हैं. डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ही इन सब दावों को सिरे से खारिज कर दिया है. उनका कहना है कि पिछली फाइलों ने उन्हें 'पूरी तरह बेकसूर' साबित कर दिया था और ये सब उनकी छवि बिगाड़ने की कोशिश है.

कानून जो किसी को नहीं छोड़ता

अमेरिका में 'एपस्टीन फाइल्स ट्रांसपेरेंसी एक्ट' नाम का एक कड़ा कानून है. यह कानून सरकार को मजबूर करता है कि वे एपस्टीन और उसकी साथी घिसलेन मैक्सवेल से जुड़ी हर जानकारी जनता के सामने रखें. इस कानून की सबसे बड़ी खासियत यह है कि सरकार किसी भी दस्तावेज को सिर्फ इसलिए नहीं छिपा सकती क्योंकि उससे किसी बड़े नेता या पब्लिक फिगर की बेइज्जती (Embarrassment) हो सकती है.

हालांकि, कुछ शर्तों पर फाइलें रोकी जा सकती हैं, जैसे कि अगर वे फाइलें किसी पुरानी फाइल की फोटोकॉपी (Duplicate) हों. अगर वे अभी चल रही किसी जांच में बाधा डाल सकती हों. अगर उनका एपस्टीन केस से कोई लेना-देना न हो.

लेकिन ट्रंप से जुड़े इन पन्नों को लेकर अब विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता भी हमलावर हो गए हैं. उन्होंने संसद (Congress) में इस बात की जांच कराने की योजना बनाई है कि आखिर इन फाइलों को सार्वजनिक करने में इतनी देरी क्यों हो रही है?

पीड़ित महिला और 2019 का वो केस

जिस महिला के बयानों की बात इन फाइलों में हो रही है, उसने 2019 में एपस्टीन की संपत्ति (Estate) पर मुकदमा किया था. उसने आरोप लगाया था कि एपस्टीन ने न सिर्फ उसका शोषण किया, बल्कि उसे रईस और ताकतवर मर्दों तक भी पहुंचाया. हालांकि, 2021 में उसने खुद ही इस केस को वापस ले लिया था. FBI को दिए गए उसके बयानों में कई रसूखदार नाम शामिल थे, लेकिन ट्रंप का नाम सामने आने से मामला पूरी तरह राजनीतिक हो गया है.

न्याय विभाग ने पहले ही चेतावनी दी है कि जनता द्वारा FBI को दी गई बहुत सी जानकारियां झूठी या आधी-अधूरी हो सकती हैं, इसलिए किसी भी नतीजे पर पहुंचने से पहले पूरी रिपोर्ट का इंतजार करना जरूरी है.

आगे क्या हो सकता है?

अगर ये 40,000 से ज्यादा फाइलें इस हफ्ते जारी होती हैं, तो अमेरिकी चुनाव और वहां की राजनीति में एक बड़ा भूचाल आ सकता है. क्या ये फाइलें वाकई ट्रंप को बेकसूर साबित करेंगी या उनके लिए नई कानूनी मुसीबतें खड़ी करेंगी, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा.

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IND vs ENG: सेमीफाइनल में इंग्लैंड के ये 5 खिलाड़ी भारत के लिए बन सकते हैं चुनौती, टीम इंडिया को रहना होगा सावधान

IND vs ENG Semi-finals:भारत और साउथ अफ्रीका के बीच टी20 वर्ल्ड कप 2026 का दूसरा सेमीफाइनल मैच 5 मार्च को मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेला जाएगा. टीम इंडिया इतिहास रचने से सिर्फ 2 कदम दूर है, क्योंकि टी20 वर्ल्ड कप के इतिहास में अब तक लगातार 2 बार कोई टीम खिताब अपने नाम नहीं कर पाई है, लेकिन टीम इंडिया के सामने इंग्लैंड की चुनौती है, जिसे भारतीय टीम को पार करनी होगी, जो आसान नहीं होना वाला है. इंग्लैंड के 5 खिलाड़ी टीम इंडिया की टेंशन बढ़ा सकते हैं. 

हैरी ब्रूक

इंग्लैंड के कप्तान हैरी ब्रूक सेमीफाइनल मैच में भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन सकते हैं. वो पूरे टूर्नामेंट में अकेले टीम के लिए वन मैन आर्मी बने हुए हैं. ब्रूक अब तक टी20 वर्ल्ड कप 2026 में 228 रन बना चुके हैं. इस दौरान उन्होंने एक शतक और एक अर्धशतक लगाए हैं. ऐसे में भारतीय गेंदबाजों को हैरी ब्रूक को जल्दी पवेलियन भेजना होगा. 

सैम करन

टी20 वर्ल्ड कप 2026 में इंग्लैंड के स्टार ऑलराउंडर सैम करन ने अब तक शानदार प्रदर्शन किया है. उन्होंने गेंद और बल्ले दोनों से कमाल किया है और टीम के लिए ट्रम्प कार्ड साबित हुए हैं. उन्होंने 7 पारियों में बल्ले से 149 रन बनाए हैं. जबकि 6 विकेट भी अपने नाम कर चुके हैं. 

आदिल रशिद

इंग्लैंड के स्टार स्पिनर आदिल रशिद का इस टूर्नामेंट में अब तक शानदार प्रदर्शन देखने को मिला है. वो अब तक 7 मैचों में कुल 11 विकेट चटका चुके हैं. उनके पास अच्छा अनुभव है और वो विकेट निकालने के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने टी20 वर्ल्ड कप 2026 में 8 से भी कम की स्ट्राइक रेट से रन बनाए हैं. ऐसे में वो टीम इंडिया के लिए टेंशन बन सकते हैं. 

विल जैक्स

टी20 वर्ल्ड कप 2026 में विल जैक्स 4 बार प्लेयर ऑफ द मैच का अवॉर्ड जीत चुके हैं. इसी के अंदाजा लगाया जा सकता है कि वो कितने खतरनाक फॉर्म में हैं. उन्होंने 7 पारियों में कुल 191 रन बनाए हैं. उन्होंने 177 के शानदार स्ट्राइक रेट से रन बनाए हैं. इसके अलावा उन्होंने 7 विकेट भी अपने नाम किए हैं. ऐसे में विल जैक्स टीम इंडिया के खिलाफ इंग्लैंड के लिए ट्रंप कॉर्ड साबित हो सकते हैं. 

फिल साल्ट

फिल साल्ट अब तक इस टूर्नामेंट में कुछ खास नहीं कर पाए हैं, लेकिन साल्ट अगर टिक गए तो वो मैच को भारत से दूर ले जा सकते हैं. बता दें कि टी20 इंटरनेशनल मैचों में वानखेड़े स्टेडियम में फिल साल्ट का स्ट्राइक रेट भी 220 का रहा है. ऐसे में टीम इंडिया को इनसे भी सावधान रहना होगा. 

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