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'हम समझौता नहीं करेंगे, युद्ध की शुरुआत उन्होंने की', US-इजरायल से जंग के बीच बोले ईरानी राजदूत मोहम्मद फथली

US-Israel-India War: ईरान में अमेरिकी और इजरायली सेनाएं ताबड़तोड़ हमले कर रही हैं. ईरान भी इजरायल समेत मध्य पूर्व के देशों पर मिसाइलें बरसा रहा है. इस बीच ईरान ने कहा कि अमेरिका के साथ फिलहाल कोई बातचीत नहीं होगी, क्योंकि युद्ध उन्होंने शुरू किया है. ये बात गुरुवार को दिल्ली में ईरान के राजदूत मोहम्मद फथली ने मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए कही. भारत में ईरान के राजदूत फथाली से जब पूछा गया कि क्या ईरान अमेरिका के साथ किसी प्रकार के समझौते के लिए तैयार है तो उन्होंने कहा कि, बिल्कुल नहीं.

ईरान ने लगाया जानबूझकर युद्ध भड़काने का आरोप

ईरानी राजदूत मोहम्मद फथली ने अमेरिका और इजराइल की कड़ी आलोचना करते हुए उन पर चल रही वार्ता के दौरान जानबूझकर युद्ध भड़काने और पूरे पश्चिम एशियाई क्षेत्र को अस्थिर करने का आरोप लगाया. उनका ये बयान बुधवार की उस घटना के बाद आया है, जिसमें हिंद महासागर में ईरानी नौसैनिक फ्रिगेट IRIIS डेना पर अमेरिकी पनडुब्बी ने हमला कर दिया. जिसकी तेहरान ने "समुद्र में एक अत्याचार" कहकर निंदा की है.

इजराइल का इरादा मध्य पूर्व क्षेत्र को नष्ट करना- ईरानी राजदूत

राजदूत फथली ने संघर्ष को भड़काने के लिए वाशिंगटन और तेल अवीव को दोषी ठहराते हुए कहा कि दोनों देश ईरान की रणनीतिक और भौगोलिक स्थिति से पूरी तरह परिचित हैं. उन्होंने कहा कि, इजराइल को "जायोनी शासन" बताते हुए कहा कि, इजराइल का इरादा मध्य पूर्व क्षेत्र को नष्ट करना है. उन्होंने आगे कहा कि, "वे अच्छी तरह जानते हैं कि ईरान कहां है और उसकी स्थिति क्या है. लेकिन दुर्भाग्य से, जायोनी शासन पूरे क्षेत्र को, इस क्षेत्र की सभी संपत्तियों को नष्ट और अस्त-व्यस्त करना चाहता है.

'हम अपने पड़ोसियों पर नहीं कर रहे हमला'

उन्होंने कहा कि ईरान अपने पड़ोसियों पर हमला नहीं कर रहा है. हम अपने पड़ोसियों पर हमला नहीं करते; वे हमें ठिकाने मुहैया कराते हैं. आपने सुना होगा कि तीन F-15 विमानों को मार गिराया गया. हमारे अपने पड़ोसियों के साथ अच्छे संबंध हैं. हमने सभी पड़ोसियों को घोषणा कर दी है कि हम संयुक्त राज्य अमेरिका के ठिकानों पर हमला करेंगे." जब उनसे पूछा गया कि क्या ईरान इस संकट के संबंध में भारत के साथ संपर्क में है, तो फथली ने स्पष्ट किया, 'नहीं, हमारी कोई बातचीत नहीं हुई है. हमारे पास कोई संदेश नहीं है. आप भारतीय पक्ष से पूछ सकते हैं.'

'हम युद्ध नहीं चाहते, उन्होंने की इसकी शुरुआत'

होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर जताई जा रही चिंताओं पर उन्होंने कहा कि, "इस मामले में हमारे पास कोई खबर नहीं है, कोई जानकारी नहीं है, लेकिन मैं कहना चाहता हूं कि ईरान ने ईमानदारी दिखाई और उन्होंने खुली शत्रुता प्रदर्शित की और उन्होंने ही इसकी शुरुआत की. वे ईरान की क्षमता और सामर्थ्य को भली-भांति जानते हैं. हम युद्ध नहीं चाहते. उन्होंने ही इसकी शुरुआत की."

हमने एक महान हस्ती को खो दिया- ईरानी राजदूत

ईरानी राजदूत फथली ने कहा कि, "हमने एक महान हस्ती, अपने नेता, अपने पिता को खो दिया है, और उन्होंने हमेशा हमें इतिहास के सही पक्ष में खड़े होने का सर्वोत्तम प्रयास करने की सलाह दी थी. मेरा मानना ​​है कि उन्होंने इतिहास के सही पक्ष में खड़े होकर अपना पक्ष रखा और उन्हें इसका फल मिला." अमेरिका द्वारा चल रही वार्ताओं के बीच हमले करने की कड़ी आलोचना करते हुए उन्होंने कहा, "हम उनके इरादों को जानते हुए भी वार्ता की मेज पर बैठे, लेकिन समय उन्होंने तय किया; उससे पहले ही उन्होंने हमला कर दिया, और हमने जवाबी कार्रवाई की घोषणा कर दी. दुर्भाग्य से, क्षेत्र में कई समस्याएं थीं, और जायोनी शासन हमारे क्षेत्र की सभी संपत्तियों को नष्ट करना और अशांति फैलाना चाहता था." उन्होंने कहा कि एलिमेंट्री स्कूल को निशाना बयाना गया. उन्होंने 160 स्कूली बच्चों की हत्या कर दी. यह भयानक है.

ये भी पढ़ें: ईरान अब कुछ बड़ा करने वाला है! इजरायल को दी सख्त चेतावनी, कहा-सत्ता बदलने का हथकंडा सफल नहीं होगा

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ईरान युद्ध के चलते गेल को कतर से एलएनजी सप्लाई बंद, भारत में गैस सप्लाई पर पड़ सकता है असर

नई दिल्ली, 5 मार्च (आईएएनएस)। इजरायल-अमेरिका-ईरान युद्ध और मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब भारत की गैस सप्लाई पर भी दिखने लगा है। सरकारी गैस कंपनी गेल (इंडिया) लिमिटेड ने बताया है कि कतर से मिलने वाली तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की सप्लाई फिलहाल पूरी तरह बंद हो गई है। कंपनी ने चेतावनी दी है कि अगर हालात ऐसे ही बने रहे तो डाउनस्ट्रीम ग्राहकों को गैस आपूर्ति में कटौती करनी पड़ सकती है।

कंपनी ने एक्सचेंज फाइलिंग में बताया कि उसके दीर्घकालिक सप्लायर पेट्रोनेट एलएनजी लिमिटेड (पीएलएल) ने 3 मार्च को फोर्स मेजर नोटिस जारी किया है। यह कदम इसलिए उठाया गया क्योंकि कतर और भारत के बीच एलएनजी जहाजों के आवागमन में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में समुद्री नेविगेशन प्रतिबंधों के कारण बाधाएं आ रही हैं। इसके अलावा कतर के रास लाफान में स्थित एलएनजी लिक्विफिकेशन प्लांट भी बंद कर दिया गया है।

फाइलिंग के मुताबिक, पेट्रोनेट के अपस्ट्रीम सप्लायर कतर एनर्जी ने भी क्षेत्र में हालिया सैन्य टकराव के कारण संभावित फोर्स मेजर की स्थिति की जानकारी दी है। इसी वजह से पेट्रोनेट द्वारा गेल को दिए जाने वाले एलएनजी कोटे को 4 मार्च 2026 से शून्य कर दिया गया है।

गेल ने कहा है कि वह इस स्थिति का आकलन कर रही है और जरूरत पड़ने पर अपने ग्राहकों को गैस सप्लाई में कटौती करने का फैसला ले सकती है। हालांकि, कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि अन्य स्रोतों से मिलने वाली एलएनजी सप्लाई फिलहाल प्रभावित नहीं हुई है। कंपनी लगातार हालात पर नजर रखे हुए है और किसी भी बड़े अपडेट की जानकारी शेयर बाजार को देती रहेगी।

भारत में गेल करीब 11,400 किलोमीटर लंबे प्राकृतिक गैस पाइपलाइन नेटवर्क का संचालन करती है और देश में गैस ट्रांसमिशन के क्षेत्र में लगभग 75 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी रखती है। यह नेटवर्क कई गैस स्रोतों को बड़े औद्योगिक उपभोक्ताओं और अन्य ग्राहकों से जोड़ता है।

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में भी हलचल देखी जा रही है। एशिया में स्पॉट एलएनजी की कीमतें तीन साल के उच्च स्तर के करीब पहुंचने के बाद गुरुवार को थोड़ी नरम हुईं। ट्रेडर्स के अनुसार, एशिया में स्पॉट एलएनजी की कीमत लगभग 23.80 डॉलर प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट कर गिर गई, जो पिछले सप्ताह की तुलना में अभी भी दोगुनी से ज्यादा है।

ऊर्जा बाजार में यह उछाल उस समय आया जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर संयुक्त हवाई हमला किया, जिसके जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिसके बाद क्षेत्र में तेल और गैस सप्लाई को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं।

बाजार को सबसे ज्यादा चिंता स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला बेहद अहम समुद्री मार्ग है। इसी रास्ते से मिडिल ईस्ट से बड़ी मात्रा में तेल और गैस की सप्लाई दुनिया भर में होती है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, कतर के रास लाफान एलएनजी प्लांट (दुनिया का सबसे बड़ा एलएनजी निर्यात प्लांट) पर भी परिचालन रोक दिया गया है। इसके अलावा, कुछ एलएनजी टैंकरों ने यूरोप की बजाय एशिया की ओर अपना रास्ता बदल लिया है, जिससे सप्लाई के लिए प्रतिस्पर्धा और तेज हो गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव लंबे समय तक जारी रहा तो वैश्विक ऊर्जा बाजार और भी अस्थिर हो सकता है, जिसका असर भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों पर भी पड़ सकता है।

--आईएएनएस

डीबीपी/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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