ईरान युद्ध के चलते गेल को कतर से एलएनजी सप्लाई बंद, भारत में गैस सप्लाई पर पड़ सकता है असर
नई दिल्ली, 5 मार्च (आईएएनएस)। इजरायल-अमेरिका-ईरान युद्ध और मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब भारत की गैस सप्लाई पर भी दिखने लगा है। सरकारी गैस कंपनी गेल (इंडिया) लिमिटेड ने बताया है कि कतर से मिलने वाली तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की सप्लाई फिलहाल पूरी तरह बंद हो गई है। कंपनी ने चेतावनी दी है कि अगर हालात ऐसे ही बने रहे तो डाउनस्ट्रीम ग्राहकों को गैस आपूर्ति में कटौती करनी पड़ सकती है।
कंपनी ने एक्सचेंज फाइलिंग में बताया कि उसके दीर्घकालिक सप्लायर पेट्रोनेट एलएनजी लिमिटेड (पीएलएल) ने 3 मार्च को फोर्स मेजर नोटिस जारी किया है। यह कदम इसलिए उठाया गया क्योंकि कतर और भारत के बीच एलएनजी जहाजों के आवागमन में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में समुद्री नेविगेशन प्रतिबंधों के कारण बाधाएं आ रही हैं। इसके अलावा कतर के रास लाफान में स्थित एलएनजी लिक्विफिकेशन प्लांट भी बंद कर दिया गया है।
फाइलिंग के मुताबिक, पेट्रोनेट के अपस्ट्रीम सप्लायर कतर एनर्जी ने भी क्षेत्र में हालिया सैन्य टकराव के कारण संभावित फोर्स मेजर की स्थिति की जानकारी दी है। इसी वजह से पेट्रोनेट द्वारा गेल को दिए जाने वाले एलएनजी कोटे को 4 मार्च 2026 से शून्य कर दिया गया है।
गेल ने कहा है कि वह इस स्थिति का आकलन कर रही है और जरूरत पड़ने पर अपने ग्राहकों को गैस सप्लाई में कटौती करने का फैसला ले सकती है। हालांकि, कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि अन्य स्रोतों से मिलने वाली एलएनजी सप्लाई फिलहाल प्रभावित नहीं हुई है। कंपनी लगातार हालात पर नजर रखे हुए है और किसी भी बड़े अपडेट की जानकारी शेयर बाजार को देती रहेगी।
भारत में गेल करीब 11,400 किलोमीटर लंबे प्राकृतिक गैस पाइपलाइन नेटवर्क का संचालन करती है और देश में गैस ट्रांसमिशन के क्षेत्र में लगभग 75 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी रखती है। यह नेटवर्क कई गैस स्रोतों को बड़े औद्योगिक उपभोक्ताओं और अन्य ग्राहकों से जोड़ता है।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में भी हलचल देखी जा रही है। एशिया में स्पॉट एलएनजी की कीमतें तीन साल के उच्च स्तर के करीब पहुंचने के बाद गुरुवार को थोड़ी नरम हुईं। ट्रेडर्स के अनुसार, एशिया में स्पॉट एलएनजी की कीमत लगभग 23.80 डॉलर प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट कर गिर गई, जो पिछले सप्ताह की तुलना में अभी भी दोगुनी से ज्यादा है।
ऊर्जा बाजार में यह उछाल उस समय आया जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर संयुक्त हवाई हमला किया, जिसके जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिसके बाद क्षेत्र में तेल और गैस सप्लाई को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं।
बाजार को सबसे ज्यादा चिंता स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला बेहद अहम समुद्री मार्ग है। इसी रास्ते से मिडिल ईस्ट से बड़ी मात्रा में तेल और गैस की सप्लाई दुनिया भर में होती है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कतर के रास लाफान एलएनजी प्लांट (दुनिया का सबसे बड़ा एलएनजी निर्यात प्लांट) पर भी परिचालन रोक दिया गया है। इसके अलावा, कुछ एलएनजी टैंकरों ने यूरोप की बजाय एशिया की ओर अपना रास्ता बदल लिया है, जिससे सप्लाई के लिए प्रतिस्पर्धा और तेज हो गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव लंबे समय तक जारी रहा तो वैश्विक ऊर्जा बाजार और भी अस्थिर हो सकता है, जिसका असर भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों पर भी पड़ सकता है।
--आईएएनएस
डीबीपी/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
महाराष्ट्र में गैरकानूनी एग डोनेशन रैकेट पर एनसीडब्ल्यू का संज्ञान, कई महिलाओं के शोषण का खुलासा
मुंबई, 5 मार्च (आईएएनएस)। महाराष्ट्र के बदलापुर में सामने आए एक बड़े गैरकानूनी इंसानी अंडे (एग) निकालने और बेचने के रैकेट को लेकर राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन को मामले की विस्तृत जांच करने के निर्देश दिए हैं।
21 फरवरी को एक मीडिया रिपोर्ट सामने आने के बाद राष्ट्रीय महिला आयोग की चेयरपर्सन ने महाराष्ट्र के डीजीपी को निर्देश दिया कि पूरे नेटवर्क की पहचान कर समयबद्ध तरीके से जांच पूरी की जाए। आयोग ने प्रभावित महिलाओं को तत्काल मेडिकल और मनोवैज्ञानिक सहायता उपलब्ध कराने को भी कहा है।
इसके साथ ही डीजीपी से पांच दिनों के भीतर विस्तृत एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) आयोग को सौंपने को कहा गया है। इस बीच महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग ने भी पुलिस और स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर मामले की गंभीरता पर चर्चा की है।
बता दें कि इस रैकेट का खुलासा तब हुआ जब एक महिला ने एक हेल्थ सेंटर को शिकायत दी कि उससे एग डोनेशन की प्रक्रिया कराई गई, लेकिन उसे तय की गई राशि नहीं दी गई। शिकायत के बाद मामले की जांच शुरू हुई, जिसमें सामने आया कि कई महिलाओं को आर्थिक तंगी का फायदा उठाकर इस अवैध नेटवर्क में फंसाया गया था।
पुलिस को संदेह है कि इस रैकेट के जरिए कम से कम 40 महिलाओं का शोषण किया गया। जांच में एक बेहद गंभीर मामला भी सामने आया, जिसमें एक पीड़ित महिला से 33 बार अंडे निकाले गए। विशेषज्ञों के अनुसार, इतनी बार एग निकालना महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है और इससे गंभीर शारीरिक जटिलताएं पैदा हो सकती हैं।
जांच में यह भी सामने आया कि यह पूरा ऑपरेशन असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (रेगुलेशन) एक्ट, 2021 का उल्लंघन करते हुए चलाया जा रहा था। इस कानून के तहत एक महिला को जीवन में केवल एक बार एग डोनेशन की अनुमति है और इसके बदले किसी तरह के व्यावसायिक लाभ पर रोक है।
पुलिस के मुताबिक, इस रैकेट में शामिल लोग आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को 25,000 से 30,000 देने का लालच देते थे। इसके बाद उन्हें प्राइवेट घरों में हार्मोनल इंजेक्शन दिए जाते थे और फिर अंडे निकालने के लिए अलग-अलग आईवीएफ सेंटर भेजा जाता था।
मामले में अब तक कम से कम चार महिलाओं और एक पुरुष को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें इस पूरे नेटवर्क की संदिग्ध सरगना सुलक्षणा गाडेकर का नाम भी शामिल है। पुलिस अन्य आरोपियों और जुड़े क्लीनिकों की पहचान करने में जुटी हुई है।
--आईएएनएस
एसएके/पीयूष
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