BJD ने Odisha में Nuclear Power Plant प्रस्ताव का विरोध किया, सुरक्षा पर उठाए सवाल
भुवनेश्वर, छह अगस्त ओडिशा में विपक्षी पार्टी बीजू जनता दल (बीजद) ने परमाणु ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने की कथित कोशिश का विरोध करते हुए राज्य में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार पर कॉरपोरेट हितों के लिए लोगों की सुरक्षा से समझौता करने का आरोप लगाया है। बीजद का यह विरोध एक निजी कंपनी के प्रतिनिधि की ओडिशा के उप मुख्यमंत्री के.वी. सिंह देव से मुलाकात के कुछ दिनों बाद सामने आया है। सिंह देव ऊर्जा विभाग के प्रभारी भी हैं।
बीजद की वरिष्ठ महासचिव लेखाश्री सामंतसिंहर ने बुधवार को यहां संवाददाता सम्मेलन में दावा किया कि ओडिशा में परमाणु ऊर्जा संयंत्र लगाने से लोगों की सेहत और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘डबल-इंजन सरकार’ का झुकाव निजी कंपनियों की तरफ है और इसी वजह से उसने ओडिशा के लोगों की सुरक्षा को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया है। बीजद नेता के मुताबिक, एक निजी कंपनी ने ओडिशा में 3,000 मेगावाट का परमाणु ऊर्जा संयंत्र लगाने का प्रस्ताव दिया है।
उन्होंने कहा, ‘‘जब भी परमाणु ऊर्जा की बात आती है तो लोगों के मन में स्वाभाविक रूप से डर पैदा होता है। वर्ष 1945 में परमाणु बम हमले में जापान के शहर हिरोशिमा और नागासाकी बर्बाद हो गए थे और 1986 में चेरनोबिल परमाणु ऊर्जा संयंत्र (यूक्रेन में) में जबरदस्त धमाका हुआ था और 2011 में फुकुशिमा परमाणु ऊर्जा संयंत्र (जापान में) में भी ऐसी ही तबाही हुई थी।’’ हालांकि सरकार ने बीजद के इन आरोपों का कोई जवाब नहीं दिया है।
Ashok Gehlot ने Dangawas Case फैसले को बताया चिंताजनक, जांच में बताई खामी
जयपुर, छह अगस्त राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने नागौर डांगावास हत्याकांड में स्थानीय अदालत के फैसले को बेहद चिंताजनक बताया है। उन्होंने कहा कि 11 साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बावजूद इंसाफ नहीं मिलना जांच और अभियोजन की गंभीर खामियों की ओर इशारा करता है। उल्लेखनीय है कि नागौर जिले के विशिष्ट न्यायालय (अनुसूचित जाति व अनुसूचित जन जाति) ने डांगावास हत्याकांड के सभी 40 आरोपियों को बुधवार को बरी कर दिया।
साल 2015 में इस हत्याकांड में जमीन विवाद को लेकर पांच दलितों की हत्या कर दी गई थी। गहलोत ने एक बयान में कहा, ‘‘नागौर के डांगावास हत्याकांड में 11 साल बाद आया फैसला बेहद चिंताजनक है। 2015 में जमीन विवाद में पांच दलितों समेत छह लोगों की निर्मम हत्या हुई थी और अब एससी-एसटी विशेष अदालत ने सभी 40 आरोपियों को संदेह का लाभ देकर बरी कर दिया।
पीड़ित परिवारों का सवाल जायज है, अगर 40 आरोपी बरी हो गए तो इन छह लोगों की हत्या आखिर किसने की?’’ पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘11 साल की लंबी कानूनी लड़ाई, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच और सुनवाई के बावजूद इंसाफ नहीं मिलना जांच और अभियोजन की गंभीर खामियों की ओर इशारा करता है।’’ उन्होंने राज्य की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार पर भी निशाना साधा। गहलोत ने कहा, ‘‘भाजपा सरकार के शासन में 11 साल पहले ऐसी घटना होना और अब उन्हीं के शासन में प्रतिकूल फैसला आना दिखाता है कि भाजपा न्याय के पक्ष में नहीं है। दलित समाज के साथ हुए इस अन्याय में जवाबदेही तय होनी चाहिए।’’ उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमेशा दलित समाज के सम्मान और अधिकारों के लिए खड़ी रही है।
पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए इस फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील की प्रक्रिया मजबूती से आगे बढ़नी चाहिए, राज्य सरकार को इसमें सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
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