Gold-Silver Price Hike: मध्य पूर्व में चल रही जंग या कुछ और है सोने-चांदी की कीमतों में उछाल की वजह?
Gold-Silver Price Hike: सोने-चांदी की कीमतों में एक बार फिर से तेजी शुरू हो गई है. फरवरी के दूसरे सप्ताह में दोनों धुताओं की कीमतों में भारी गिरावट देखने को मिली थी. उसके बाद से सोने और चांदी की कीमतों में हर दिन उतार चढ़ाव देखने को मिल रहा था लेकिन 28 फरवरी को अचानक इजरायल और अमेरिका ने ईरान पर हमला कर दिया. उसके बाद पूरा मध्य पूर्व युद्ध की आग में झुलसने लगा. जिसका नतीजा ये हुआ कि सोने और चांदी की कीमतों में एक बार फिर से जबरदस्त तेजी शुरू हो गई है. जो आज भी देखने को मिल रही है.
ऐसे में समझने वाली बात ये है कि सोने और चांदी के दाम में मध्य पूर्व में जारी जंग के चलते ही उछाल देखने को मिल रहा है या फिर इसके पीछे कुछ और भी कारण हो सकते हैं. क्योंकि इस जंग ने कमोडिटी मार्केट में हाहाकार मचा दिया है और कच्चे तेल के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं. जबकि दुनियाभर के शेयर बाजारों का हाल बुरा है और इनमें जबरदस्त गिरावट देखने को मिल रही है.
मंगलवार को आई थी सोने-चांदी की कीमत में भारी गिरावट
होली की छुट्टी के चलते मंगलवार को दोपहर बाद खुले मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने और चांदी की कीमतों में जबरदस्त गिरावट देखने को मिली थी, इसके साथ ही विदेशी बाजार यानी यूएस कॉमेक्स पर भी सोना और चांदी सस्ता हुआ था लेकिन बुधवार को दोनों धातुओं ने फिर से तेजी लौट आई जिससे सोना करीब चार हजार और चांदी करीब 10 हजार रुपये ऊपर चढ़ गई.
आज क्या है सर्राफा बाजार का हाल?
आज भी बाजार में तेजी बनी हुई है. फिलहाल सोना 320 रुपये प्रति 10 ग्राम के उछाल के साथ कारोबार कर रहा है तो वहीं चांदी 3500 रुपये के उछाल के साथ कारोबार कर रही है. इसके बाद 22 कैरेट सोने की कीमत 148,885 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गई हैं तो 24 कैरेट गोल्ड का भाव 162,420 रुपये प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहा है. वहीं चांदी का भाव 269,860 रुपये प्रति किग्रा पर पहुंच गया है.
MCX और US Comex पर सोने-चांदी का भाव
उधर मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर भी सोने-चांदी की कीमतों में तेजी का रुख बना हुआ है. यहां सोने 343 रुपये यानी 0.21 प्रतिशत उछाल के साथ 161,868 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है तो वहीं चांदी 4,090 रुपये या 1.54 फीसदी चढ़कर 269,650 रुपये प्रति 10 पर ट्रेड कर रही है. जबकि विदेशी बाजार यानी यूएस कॉमेक्स पर सोना 46 डॉलर या 0.90 प्रतिशत उछाल के साथ 5,180.70 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा है. जबकि चांदी का भाव 1.56 डॉलर यानी 1.88 फीसदी तेजी के साथ 84.75 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया है.
सोने-चांदी की कीमतों में क्यों हो रही बै लगातार बढ़ोतरी?
आर्थिक अनिश्चितता: वैश्विक आर्थिक मंदी या वित्तीय संकट के समय, निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की ओर रुख करते हैं. इस बदलाव से मांग बढ़ती है, जिससे कीमतों में उछाल आता है. यानी मंदी के दौरान, लोग अस्थिर संपत्तियों की तुलना में सोने को अपने पास रखना पसंद करते हैं.
भू-राजनीतिक तनाव: विश्व भर में संघर्ष, युद्ध या राजनीतिक अस्थिरता जैसे कि अभी मध्य पूर्व में के हालात हैं वैसे हालातों में वित्तीय बाजारों में भय का माहौल पैदा होता है. जिससे अपनी स्थिरता के लिए प्रसिद्ध सोना एक पसंदीदा विकल्प बन जाता है, और यही एक प्रमुख कारण है कि युद्ध जैसे हालातों में सोने की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखने को मिलती है.
मुद्रास्फीति से बचाव: इसके अलावा मुद्रास्फीति बढ़ने पर मुद्रा का मूल्य घट जाता है. चूंकि सोना अपना मूल्य बनाए रखता है, इसलिए निवेशक क्रय शक्ति को बनाए रखने के लिए अपना पैसा सोने में निवेश करते हैं, जिससे कीमतें बढ़ जाती हैं.
मुद्रा का कमजोर होना: रुपये के कमजोर होने से भारत में सोने के आयात की लागत बढ़ जाती है. इससे घरेलू सोने की कीमतें बढ़ जाती हैं, खासकर तब जब अंतरराष्ट्रीय दरें मजबूत बनी रहती हैं.
केंद्रीय बैंक की नीतियां: जब केंद्रीय बैंक ब्याज दरें कम करते हैं या तरलता बढ़ाने के उपाय लागू करते हैं, तो सोना रखने की अवसर लागत कम हो जाती है. सोने पर ऋण की कम ब्याज दर सोने को एक परिसंपत्ति के रूप में और भी आकर्षक बनाती है.
बढ़ती वैश्विक मांग: भारत और चीन जैसे देशों में सांस्कृतिक और त्योहारों के दौरान सोने की लगातार मांग बनी रहती है. यह वैश्विक मांग सोने की कीमतों में लगातार वृद्धि का एक प्रमुख कारण है.
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दुनिया के 160 देशों में 1.08 लाख से ज्यादा अमेरिकी सैनिक तैनात, पेंटागन ने दी जानकारी
वॉशिंगटन, 5 मार्च (आईएएनएस)। मध्यपूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने सैन्य अभियानों को व्यापक रूप दे दिया है। इस बात का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वर्तमान में 108,000 से ज्यादा अमेरिकी सैनिक दुनिया के 160 देशों में तैनात या अग्रिम रूप से मौजूद हैं।
यह तैनाती ऐसे समय में है, जब अमेरिका, ईरान के साथ जारी संघर्ष का सामना कर रहा है और चीन व रूस से बढ़ते सुरक्षा खतरों से भी निपट रहा है।
पेंटागन के शीर्ष अधिकारियों ने बुधवार (स्थानीय समय) को सीनेट सशस्त्र सेवा उपसमिति ऑन रेडीनेस के समक्ष गवाही देते हुए कहा कि अमेरिकी सेना मध्य पूर्व में चल रहे सक्रिय सैन्य अभियानों के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर अपने अभियानों को बनाए रखने में सक्षम है।
अमेरिकी सेना के वाइस चीफ जनरल क्रिस्टोफर लानेव ने सीनेटरों से कहा कि अमेरिकी बल एक साथ कई क्षेत्रों में सक्रिय हैं और बदलते खतरों के बीच प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखे हुए हैं।
लानेव ने कहा, “आज 1,08,000 से अधिक अमेरिकी सैनिक 160 देशों में तैनात या अग्रिम रूप से तैनात हैं जो पश्चिमी गोलार्ध में हमारे हितों की सुरक्षा कर रहे हैं।
लानेव ने कहा कि मध्य पूर्व में तैनात अमेरिकी सैनिक इस समय ईरान और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ जारी संघर्ष के बीच जटिल और खतरनाक माहौल में काम कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, वे मिसाइलों और ड्रोन को रोकने वाली अमेरिकी सेना और साझेदारों का बचाव और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर की रक्षा कर रहे हैं।
लानेव ने कहा कि अमेरिकी सैनिक खतरों का तेजी से जवाब देने के लिए इंटेलिजेंस और जॉइंट फायर के साथ सहयोग करते हुए थिएटर में फ्यूल, गोला-बारूद और मेडिकल सपोर्ट पहुंचाना जारी रखे हुए हैं।
नौसेना के ऑपरेशंस के वाइस चीफ एडमिरल जेम्स किल्बी ने सांसदों को बताया कि पिछले साल अमेरिकी नेवी ने कई सैन्य मिशन चलाए और संयुक्त बलों को समर्थन दिया। नौसेना ने दुश्मनों के खिलाफ हमले किए और मध्य पूर्व में अपने सहयोगियों की सुरक्षा भी की। अमेरिकी नेवी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में लगातार सक्रिय है। यहां वह चीन की बढ़ती गतिविधियों पर नजर रख रही है और अपने सहयोगी देशों के साथ मिलकर काम कर रही है।
किल्बी ने बताया कि नेवी अपनी तैयारी मजबूत करने के लिए जहाजों की मरम्मत में हो रही देरी कम कर रही है और शिपयार्ड को आधुनिक बना रही है। साथ ही वह इस लक्ष्य की ओर बढ़ रही है कि उसके 80 प्रतिशत युद्ध के लिए तैयार जहाज, विमान और पनडुब्बियां हमेशा तैनाती के लिए तैयार रहें।
मरीन कॉर्प्स के अधिकारियों ने कहा कि उनकी सेना दुनिया के किसी भी हिस्से में जल्दी तैनात होने के लिए तैयार रहती है, खासकर हिंद-प्रशांत क्षेत्र में, जहां चीन के साथ तनाव बढ़ रहा है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि मरीन कॉर्प्स वैश्विक स्तर पर तुरंत प्रतिक्रिया देने वाली सेना है और हिंद-प्रशांत में लगातार सक्रिय भूमिका निभा रही है।
एयर फोर्स के वाइस चीफ ऑफ स्टाफ जनरल जेम्स लामोंटेग्ने ने कहा कि वायुसेना अपने विमानों को आधुनिक बना रही है और नए पायलटों को प्रशिक्षण दे रही है। उन्होंने बताया कि वायुसेना का मुख्य काम विमानों को उड़ाने और उन्हें अच्छी स्थिति में रखना है, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।
उन्होंने कहा कि एयर फोर्स हर साल करीब 1,500 नए पायलटों को ट्रेनिंग दे रही है और बी-21 बॉम्बर जैसे नए विमान और आधुनिक लड़ाकू प्रणालियां भी विकसित कर रही है।
स्पेस फोर्स के अधिकारी जनरल माइकल गुएटलीन ने कहा कि आधुनिक युद्ध में अंतरिक्ष की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने बताया कि हाल ही में मिसाइल चेतावनी, नेविगेशन और अंतरिक्ष निगरानी के लिए नए उपग्रह भी लॉन्च किए गए हैं।
हालांकि गवर्नमेंट अकाउंटेबिलिटी ऑफिस (जीएओ) ने चेतावनी दी है कि अमेरिकी सेना को अभी भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। जीएओ अधिकारी डायना मौरर ने कहा कि अमेरिका के पास दुनिया की सबसे मजबूत सेना है, लेकिन पुराने हथियार, मरम्मत में देरी और स्पेयर पार्ट्स की कमी जैसी समस्याएं तैयारी को प्रभावित कर रही हैं।
--आईएएनएस
केके/वीसी
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