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भारतीय अर्थशास्त्री को शिकागो यूनिवर्सिटी ने एलुमनाई अवॉर्ड से नवाजा

वॉशिंगटन, 5 मार्च (आईएएनएस)। भारतीय अर्थशास्त्री कृष्णमूर्ति वी. सुब्रमण्यम को प्रोफेशनल अचीवमेंट के लिए यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो के एलुमनाई अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है। 85 साल के इतिहास में यह सम्मान पाने वाले वह पहले भारतीय अर्थशास्त्री हैं।

सुब्रमण्यम ने 2018 से 2021 तक भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार के तौर पर काम किया। बाद में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) में एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के तौर पर भारत का प्रतिनिधित्व किया।

यह पुरस्कार उन्हें उन प्रतिष्ठित हस्तियों की सूची में शामिल करता है, जिनमें नोबेल पुरस्कार विजेता पॉल सैमुएलसन, गैरी बेकर, क्लाउडिया गोल्डिन, कार्ल सागन और फिलिप कोटलर जैसे वैश्विक विचारक भी शामिल रहे हैं।

यूनिवर्सिटी ने सुब्रमण्यम के सरकार में रहने के दौरान भारत के आर्थिक सर्वे पर किए गए काम का जिक्र किया। साइटेशन में इन रिपोर्ट्स को लैंडमार्क डॉक्यूमेंट्स बताया गया। इसमें कहा गया कि इनसे भारत के आत्मनिर्भरता के नजरिए के लिए इंटेलेक्चुअल बेस मिला, जो कॉम्पिटिटिव मार्केट, पॉलिसी ऑटोनॉमी और विकास पर आधारित था।

साइटेशन में कोविड-19 से पैदा हुए आर्थिक झटके पर उनके शुरुआती विश्लेषण का भी उल्लेख किया गया। इसमें कहा गया कि संकट को सप्लाई-साइड व्यवधान के रूप में उनकी पहचान और वी-आकार की रिकवरी को लेकर दिए गए उनके सार्वजनिक बयानों ने “भारत की आर्थिक मजबूती पर भरोसा बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।”

मुख्य आर्थिक सलाहकार के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान सुब्रमण्यम ने तीन आर्थिक सर्वे तैयार किए। सर्वे में आर्थिक सुधारों, सार्वजनिक निवेश और दीर्घकालिक विकास रणनीतियों का विस्तृत विश्लेषण किया गया। ये रिपोर्टें ऐसे दौर में प्रकाशित हुईं जब महामारी के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था गहरी अनिश्चितता से गुजर रही थी।

यूनिवर्सिटी ने बताया कि अवॉर्ड से पहचाने गए ज्यादातर काम भारत से किए गए थे। इसने यह भी कहा कि काम बड़ी उभरती अर्थव्यवस्था के सामने आने वाली पॉलिसी चुनौतियों पर फोकस था।

सुब्रमण्यम ने बाद में आईएमएफ में भारत के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के तौर पर काम किया। इस भूमिका में, उन्होंने दक्षिण एशिया और उभरते मार्केट पर असर डालने वाले आर्थिक मुद्दों पर काम किया। इस दौरान सप्लाई चेन, विकासशील अर्थव्यवस्था में कर्ज का दबाव और ग्लोबलाइजेशन के भविष्य पर वैश्विक बहस भी हुई।

इस पहचान पर प्रतिक्रिया देते हुए सुब्रमण्यम ने कहा, “इस एकेडमिक लाइन में शामिल होना बहुत विनम्र करने वाला है। जो बात इसे सार्थक बनाती है, वह यह है कि यह भारत से और भारत के लिए किए गए काम के लिए पहचान है। अपने विनम्र तरीके से, भारत में अपना सबसे अच्छा काम करने वाले भारतीयों के प्रेरणा देने वाले नक्शेकदम पर चलना, सी. वी. रमन और होमी जे. भाभा से लेकर विक्रम साराभाई और एम. एस. स्वामीनाथन तक, एक सच्चा सौभाग्य है।”

सुब्रमण्यम अभी इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस में फाइनेंस के प्रोफेसर के तौर पर काम कर रहे हैं। उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो बूथ स्कूल ऑफ बिजनेस से पीएचडी की है। उन्होंने आईआईटी कानपुर से बीटेक और आईआईएम कलकत्ता से एमबीए भी किया है।

इस पहचान के साथ सुब्रमण्यम को अपने तीनों पुराने संस्थानों, आईआईटी कानपुर, आईआईएम कलकत्ता और यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो से खास एलुमनस ऑनर्स मिला है।

हाल के सालों में भारत सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनकर उभरा है। नीति बनाने वालों ने ग्रोथ को मजबूत करने के लिए स्ट्रक्चरल रिफॉर्म, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और सप्लाई-चेन डाइवर्सिफिकेशन पर जोर दिया है।

शिकागो विश्वविद्यालय लंबे समय से आधुनिक आर्थिक विचारधारा पर अपने प्रभाव के लिए जाना जाता रहा है। यहां के अर्थशास्त्रियों और विद्वानों ने वैश्विक स्तर पर बाजार व्यवस्था, मौद्रिक नीति और आर्थिक विकास से जुड़ी बहसों को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

--आईएएनएस

केके/पीयूष

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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लगातार चार दिन की गिरावट के बाद बाजार में हरियाली; सेंसेक्स 260 अंक चढ़ा, निफ्टी 24,550 के पार

मुंबई, 5 मार्च (आईएएनएस)। वैश्विक शेयर बाजारों में तेजी के चलते लगातार चार दिन की गिरावट का सिलसिला तोड़ते हुए भारतीय शेयर बाजार ने गुरुवार को तेजी के साथ हरे निशान में खुला। इस दौरान घरेलू बाजार के प्रमुख बेंचमार्कों में अच्छी तेजी देखी गई। 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स अपने पिछले बंद (79,116.19) से 414.29 अंकों की बढ़त के साथ 79,530.48 पर खुला, तो वहीं एनएसई निफ्टी ने भी अपने पिछले बंद (24,480.50) से 135.45 अंकों की तेजी के साथ 24,615.95 पर खुला।

खबर लिखे जाने तक (सुबह 9.33 बजे के करीब) सेंसेक्स 266.22 अंकों यानी 0.34 प्रतिशत की बढ़त के साथ 79,382.41 पर ट्रेड कर रहा था, तो वहीं निफ्टी में 98.80 (0.40 प्रतिशत) अंकों की बढ़त दर्ज की गई और वह 24,579.30 पर कारोबार करता नजर आया।

व्यापक बाजारों ने बेंचमार्क सूचकांकों से बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी मिडकैप और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स क्रमशः 0.82 प्रतिशत और 0.83 प्रतिशत की बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे।

वहीं सेक्टरवार बात करें तो, निफ्टी रियल्टी शीर्ष लाभ कमाने वाला इंडेक्स बनकर उभरा, उसके बाद निफ्टी ऑयल एंड गैस और निफ्टी ऑटो इंडेक्स का स्थान रहा।

सेंसेक्स पैक में सन फार्मा, अदाणी पोर्ट्स, एलएंडटी, बीईएल, एनटीपीसी और टाटा स्टील टॉप गेनर्स वाले शेयरों में शामिल रहे, जबकि एचसीएल टेक, टीसीएस, एचयूएल, टेक महिंद्रा और एशियन पेंट्स सबसे ज्यादा नुकसान झेलने वाले शेयर रहे।

गुरुवार को शुरुआती कारोबार में एशिया-प्रशांत क्षेत्र के अधिकांश बाजारों में तेजी देखी गई, क्योंकि वॉल स्ट्रीट सूचकांकों में रात भर की रिकवरी के बाद बाजार का सेंटिमेंट बेहतर हुआ। दक्षिण कोरिया का कोस्पी 12 प्रतिशत से अधिक उछला और पिछले सत्र की गिरावट की भरपाई की। वहीं, जापान का निक्केई 225 4 प्रतिशत से अधिक बढ़ा।

बता दें कि अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध के कारण वैश्विक शेयर बाजारों में बिकवाली और तेल की कीमतों में वृद्धि के चलते बुधवार को भारतीय शेयर बाजार बड़ी गिरावट के साथ खुला और शुरुआती कारोबार में ही दोनों प्रमुख बेंचमार्क 2 प्रतिशत से ज्यादा गिर गए थे।

चॉइस ब्रोकिंग के रिसर्च एनालिस्ट हितेश टेलर ने बताया कि तकनीकी नजरिए से देखें तो 24,300-24,350 का दायरा निफ्टी के लिए अहम सपोर्ट माना जा रहा है। वहीं 24,600-24,650 का स्तर तत्काल रेजिस्टेंस के रूप में सामने आ सकता है। रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (आरएसआई) 30.37 पर है, जो 50 से नीचे है और बाजार में कमजोरी का संकेत देता है।

साथ ही एक्सपर्ट ने बताया कि पिछले कारोबारी सत्र में विदेशी निवेशकों (एफआईआई) ने लगातार चौथे सत्र में बिकवाली करते हुए करीब 8,752 करोड़ रुपए के शेयर बेच दिए। दूसरी ओर घरेलू निवेशकों (डीआईआई) ने लगातार छठे दिन खरीदारी जारी रखते हुए 12,000 करोड़ रुपए से ज्यादा के शेयर खरीदे। इससे बाजार में विदेशी निवेशकों की बिकवाली का असर कुछ हद तक संतुलित हुआ।

मार्केट एक्सपर्ट ने आगे कहा कि वैश्विक अनिश्चितता और बाजार में बढ़ती अस्थिरता को देखते हुए निवेशकों को फिलहाल सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। गिरावट के दौरान मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों पर ही ध्यान देना चाहिए। निफ्टी में नई खरीदारी की रणनीति तभी बनानी चाहिए जब इंडेक्स 25,000 के ऊपर मजबूत और लगातार ब्रेकआउट दे। इससे बाजार में मजबूती का स्पष्ट संकेत मिलेगा और एक बुलिश स्ट्रक्चर बनने की पुष्टि हो सकती है।

--आईएएनएस

डीबीपी/

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