भारतीय अर्थव्यवस्था के वित्त वर्ष 27 में 7.2 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान, चालू वित्त वर्ष में भी मजबूत रहेगी विकास दर: रिपोर्ट
नई दिल्ली, 2 मार्च (आईएएनएस)। भारत की जीडीपी की वृद्धि दर वित्त वर्ष 27 में 7.2 प्रतिशत और वित्त वर्ष 26 में 7.8 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह जानकारी सोमवार को जारी रिपोर्ट में दी गई।
एचडीएफसी बैंक की रिपोर्ट में कहा गया कि नए जीडीपी बेस ईयर 2022-23 ने भारत के इस वित्त वर्ष में मजबूत प्रदर्शन की पुष्टि की है। साथ ही, चौथी तिमाही के हाई-फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर्स से मिल रहे मजबूत संकेतों के कारण आने वाले समय में भी विकास दर का अनुमान बढ़ने की उम्मीद है।
रिपोर्ट में आगे कहा गया कि वित्त वर्ष 27 में नॉमिनल वृद्धि दर 10.5 से 11 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। देश में निजी खपत तेजी से बढ़ रही है और वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही में इसमें 8.7 प्रतिशत की दर से वृद्धि हुई है। वित्त वर्ष 25 में यह दर 5.8 प्रतिशत थी।
रिपोर्ट में कहा गया, जीडीपी आंकड़ों से पता चलता है कि वित्त वर्ष 2025 में उपभोक्ता खर्च की 40 प्रतिशत वस्तुओं (जैसे कपड़े, जूते, फर्नीचर, घरेलू उपकरण आदि) पर खर्च में कमजोरी देखी गई, जबकि भोजन, आवास, उपयोगिताएं और स्वास्थ्य जैसी आवश्यक वस्तुओं पर खर्च में वृद्धि जारी रही।
रिपोर्ट में बताया गया है कि वित्त वर्ष 2026 की शुरुआत में वृद्धि धीमी रही, लेकिन हाल की तिमाहियों में इसमें कुछ सुधार हुआ है।
रिपोर्ट के अनुसार, खपत में सुधार और क्षमता उपयोग दर में वृद्धि के साथ, वित्त वर्ष 2027 में निवेश में और अधिक तेजी आने की उम्मीद है। विनिर्माण, वित्तीय, रियल एस्टेट, पेशेवर सेवाओं और आतिथ्य क्षेत्रों में पहले से ही उच्च वृद्धि देखी जा रही है।
बैंक ने बताया गया कि वित्त वर्ष 2027 के लिए नॉमिनल जीडीपी में बदलाव के कारण नई सीरीज में डेट टू जीडीपी रेश्यो 57.5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया जा रहा है, जो कि पिछली सीरीज में 55.6 प्रतिशत था।
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डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
सुबह का नाश्ता करना क्यों है जरूरी? नजरअंदाज करने से कई नुकसान
नई दिल्ली, 2 मार्च (आईएएनएस)। सुबह का नाश्ता सिर्फ भूख मिटाने का साधन नहीं, बल्कि पूरे दिन की सेहत और ऊर्जा का सबसे बड़ा आधार है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, जो लोग सुबह का नाश्ता नियमित रूप से करते हैं, वे दिनभर ज्यादा सक्रिय, तरोताजा रहते हैं।
नाश्ता छोड़ने से शरीर और दिमाग दोनों पर बुरा असर पड़ता है, जिससे कई तरह की परेशानियां हो सकती हैं।
नेशनल हेल्थ मिशन बताता है कि सुबह का नाश्ता क्यों जरूरी है, रातभर के लंबे उपवास के बाद शरीर में ऊर्जा की कमी हो जाती है। सुबह का नाश्ता इस कमी को पूरा करता है और शरीर को तुरंत एनर्जी देता है। इससे मेटाबॉलिज्म तेजी से सक्रिय हो जाता है, जो पूरे दिन कैलोरी जलाने की प्रक्रिया को बेहतर बनाता है। अगर नाश्ता नहीं किया जाए, तो मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ जाता है, जिससे वजन बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है।
नाश्ता करने से मूड भी अच्छा रहता है। सुबह पौष्टिक भोजन लेने से सेरोटोनिन और डोपामाइन जैसे हार्मोन बेहतर तरीके से काम करते हैं, जिससे व्यक्ति तनावमुक्त, खुश और एनर्जेटिक महसूस करता है।
वहीं नाश्ता छोड़ने से चिड़चिड़ापन, थकान और कमजोरी का अहसास होता है। वजन नियंत्रण के लिए भी सुबह का नाश्ता बहुत फायदेमंद है। अध्ययनों से पता चलता है कि जो लोग नाश्ता करते हैं, उनमें मोटापे का खतरा काफी कम होता है। नाश्ता छोड़ने पर दिन में ज्यादा भूख लगती है और लोग ज्यादा खाने लगते हैं, खासकर जंक फूड की ओर रुझान बढ़ता है।
नाश्ता दिमाग के लिए भी वरदान है। यह एकाग्रता, याददाश्त और निर्णय लेने की क्षमता को बढ़ाता है। स्कूल-कॉलेज जाने वाले बच्चों और ऑफिस जाने वालों के लिए सुबह का पौष्टिक नाश्ता बेहद जरूरी है। इसमें प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और मिनरल्स से भरपूर चीजें जैसे दूध, फल, ओट्स, दलिया, उपमा, पोहा, इडली, पराठा, नट्स आदि शामिल करने चाहिए।
नाश्ता न करने से थकान और कमजोरी महसूस हो सकती है। एकाग्रता और याददाश्त में कमी मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ना और वजन बढ़ने के साथ ही एसिडिटी, सिरदर्द और चक्कर आना भी शामिल है। इससे दिनभर चिड़चिड़ापन और तनाव के साथ शुगर लेवल भी अनियंत्रित हो सकता है।
--आईएएनएस
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