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सुबह का नाश्ता करना क्यों है जरूरी? नजरअंदाज करने से कई नुकसान

नई दिल्ली, 2 मार्च (आईएएनएस)। सुबह का नाश्ता सिर्फ भूख मिटाने का साधन नहीं, बल्कि पूरे दिन की सेहत और ऊर्जा का सबसे बड़ा आधार है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, जो लोग सुबह का नाश्ता नियमित रूप से करते हैं, वे दिनभर ज्यादा सक्रिय, तरोताजा रहते हैं।

नाश्ता छोड़ने से शरीर और दिमाग दोनों पर बुरा असर पड़ता है, जिससे कई तरह की परेशानियां हो सकती हैं।

नेशनल हेल्थ मिशन बताता है कि सुबह का नाश्ता क्यों जरूरी है, रातभर के लंबे उपवास के बाद शरीर में ऊर्जा की कमी हो जाती है। सुबह का नाश्ता इस कमी को पूरा करता है और शरीर को तुरंत एनर्जी देता है। इससे मेटाबॉलिज्म तेजी से सक्रिय हो जाता है, जो पूरे दिन कैलोरी जलाने की प्रक्रिया को बेहतर बनाता है। अगर नाश्ता नहीं किया जाए, तो मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ जाता है, जिससे वजन बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है।

नाश्ता करने से मूड भी अच्छा रहता है। सुबह पौष्टिक भोजन लेने से सेरोटोनिन और डोपामाइन जैसे हार्मोन बेहतर तरीके से काम करते हैं, जिससे व्यक्ति तनावमुक्त, खुश और एनर्जेटिक महसूस करता है।

वहीं नाश्ता छोड़ने से चिड़चिड़ापन, थकान और कमजोरी का अहसास होता है। वजन नियंत्रण के लिए भी सुबह का नाश्ता बहुत फायदेमंद है। अध्ययनों से पता चलता है कि जो लोग नाश्ता करते हैं, उनमें मोटापे का खतरा काफी कम होता है। नाश्ता छोड़ने पर दिन में ज्यादा भूख लगती है और लोग ज्यादा खाने लगते हैं, खासकर जंक फूड की ओर रुझान बढ़ता है।

नाश्ता दिमाग के लिए भी वरदान है। यह एकाग्रता, याददाश्त और निर्णय लेने की क्षमता को बढ़ाता है। स्कूल-कॉलेज जाने वाले बच्चों और ऑफिस जाने वालों के लिए सुबह का पौष्टिक नाश्ता बेहद जरूरी है। इसमें प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और मिनरल्स से भरपूर चीजें जैसे दूध, फल, ओट्स, दलिया, उपमा, पोहा, इडली, पराठा, नट्स आदि शामिल करने चाहिए।

नाश्ता न करने से थकान और कमजोरी महसूस हो सकती है। एकाग्रता और याददाश्त में कमी मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ना और वजन बढ़ने के साथ ही एसिडिटी, सिरदर्द और चक्कर आना भी शामिल है। इससे दिनभर चिड़चिड़ापन और तनाव के साथ शुगर लेवल भी अनियंत्रित हो सकता है।

--आईएएनएस

एमटी/वीसी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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स्वास्थ्य के लिए खतरनाक गुस्सा, इन उपायों से करें कंट्रोल

नई दिल्ली, 2 मार्च (आईएएनएस)। क्रोध इंसानी भावना का हिस्सा है; यह कभी-कभी आपके अंदर हिम्मत भरता है, तो कभी गुस्से के अनियंत्रित होने पर स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल सकता है। गुस्से पर अगर कंट्रोल न किया जाए तो यह लंबे समय में दिल की बीमारियों, ब्लड प्रेशर की समस्या और मानसिक तनाव का कारण बन सकता है।

आयुर्वेद में भी गुस्सा कफ और पित्त के असंतुलन का संकेत माना गया है, जो तन और मन दोनों को प्रभावित करता है। इसलिए अचानक गुस्सा आने पर तुरंत कुछ उपाय करना जरूरी है, ताकि इसे नियंत्रित किया जा सके।

जब गुस्सा आता है, तो आपका मस्तिष्क और शरीर दोनों तनाव में आ जाते हैं। ऐसे में दिल तेजी से धड़कने लगता है। इस स्थिति में सबसे पहला और आसान तरीका है सांस पर ध्यान देना। अपनी आंखें बंद करें और लंबी, गहरी सांस लें। विज्ञान और आयुर्वेद दोनों मानते हैं कि सांस पर नियंत्रण नर्वस सिस्टम को शांत करता है। इसके लिए चार सेकंड के लिए सांस अंदर लें, सात सेकंड तक रोकें और आठ सेकंड में धीरे-धीरे बाहर छोड़ें। इस प्रक्रिया से आपका मस्तिष्क अपने इमोशनल मोड से लॉजिकल मोड में आता है, जिससे गुस्सा कम होता है और आप बेहतर निर्णय ले सकते हैं।

गुस्सा आने पर शरीर का तापमान बढ़ जाता है। ऐसे में एक गिलास ठंडा पानी धीरे-धीरे पीना लाभकारी साबित होता है। यह न केवल शरीर को ठंडक देता है बल्कि मस्तिष्क को भी शांत करता है। आयुर्वेद में भी पानी के सेवन को मन और शरीर को संतुलित करने वाला माना गया है।

गुस्से की स्थिति में तुरंत बहस या प्रतिक्रिया करने के बजाय वहां से थोड़ी दूरी बनाना सबसे असरदार उपाय है। पांच मिनट के लिए मौन धारण करना और किसी शांत जगह पर जाना गुस्से की तीव्रता को कम करने में मदद करता है। यह दूरी आपको स्थिति को बेहतर तरीके से समझने और नियंत्रित प्रतिक्रिया देने का अवसर देती है।

आयुर्वेद में गुस्सा को शांत करने के लिए हल्दी, अश्वगंधा और तुलसी जैसी जड़ी-बूटियों की सलाह दी जाती है। तुलसी के पत्ते चबाने या तुलसी की चाय पीने से मन शांत होता है। हल्दी दूध भी मानसिक शांति बढ़ाने वाला उपाय माना जाता है। इसके अलावा, योग और ध्यान करना भी गुस्से को नियंत्रित करने में मददगार है। नियमित प्राणायाम, खासकर अनुलोम-विलोम और कपालभाति जैसे अभ्यास नर्वस सिस्टम को संतुलित करते हैं और पित्त की तीव्रता कम करते हैं।

--आईएएनएस

पीके/एएस

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