US-Israel Attacks Iran LIVE: ईरान के बाद अब Lebanon पर इजराइल का हमला, बमों के धमाकों से दहला Beirut
मिडिल ईस्ट में उबाल बढ़ता जा रहा है. ईरान ने US-इज़रायल के जॉइंट हमलों के खिलाफ़ जवाबी कार्रवाई बढ़ा दी है. दोनों तरफ से हमले जारी हैं. वहीं, अब लेबनान के मिलिटेंट ग्रुप हिज्बुल्लाह की भी एंट्री हो गई है. हिज़्बुल्लाह ने उत्तरी इज़रायल में हाइफ़ा के पास एक मिलिट्री बेस पर रॉकेट और ड्रोन से हमला किया, जिसके बाद इज़रायली जेट ने लेबनान के बेरूत पर बमबारी की है. #alikhameneideath #abudhabi #IsraelAttacksIran #IsraelIranWar #TehranBlasts #atwebvideos #aajtaknews #aajtakdigital #israel #iran #israeliranconflict #middleeast #breakingnews #worldnews #iranattack #israelstrike #aajtak आजतक के साथ देखिये देश-विदेश की सभी महत्वपूर्ण और बड़ी खबरें | Watch the latest Hindi news Live on the World's Most Subscribed News Channel on YouTube. #LatestNews #Aajtak #HindiNews Aaj Tak News Channel: आज तक भारत का सर्वश्रेष्ठ हिंदी न्यूज चैनल है । आज तक न्यूज चैनल राजनीति, मनोरंजन, बॉलीवुड, व्यापार और खेल में नवीनतम समाचारों को शामिल करता है। आज तक न्यूज चैनल की लाइव खबरें एवं ब्रेकिंग न्यूज के लिए बने रहें । #hindinews #newsinhindi #hindisamachar #breakingnews #aajtak #samachar #news अधिक समाचारों के लिए यहां क्लिक करें: https://www.youtube.com/@aajtak?sub_confirmation=1 About Channel: Aaj Tak is India's Best Hindi News Channel. Aaj Tak News Channel Covers The Latest News, Breaking News, Politics, Entertainment News, Business News and Sports News. Stay tuned for all the News in Hindi. Join Aaj Tak Whatsapp Channel: https://whatsapp.com/channel/0029Va7Rxc32ER6hBAuIL222 Watch Our Prime Shows on Aaj Tak: Vardaat — Real-life crime stories that shook the nation https://youtube.com/playlist?list=PLP-nGFpz3fa_WLJqwFuJlwfhAepqcOd3I&si=tJXqsrKVHOvxy4BJ Black & White with Anjana Om Kashyap - Big debates, sharp opinions, and political analysis https://youtube.com/playlist?list=PLP-nGFpz3fa_aLomcIgk-c_dRhuYOBphp&si=1wAaQfSUIfZ0OrIy Halla Bol — The nation’s most powerful debate on today’s top issues https://youtube.com/playlist?list=PLP-nGFpz3fa-ZT2YKfqzI-ayeZV0n8qAh&si=nnRN8_9u02p8QlG_ DasTak 2025: https://youtube.com/playlist?list=PLP-nGFpz3fa9q68r5rws67UxSUdhcHupG&si=QMiiUiKyXUP76DUk ताज़ा खबरों और LIVE अपडेट्स के लिए जुड़े रहें Aaj Tak के साथ - https://youtube.com/live/Nq2wYlWFucg?feature=share https://youtube.com/live/gH6ftEJDLGo?feature=share Download Aaj Tak APP, India’s No.1 Hindi News App: https://aajtak.link/yyJu Subscribe to Aaj Tak YouTube Channel: https://www.youtube.com/c/aajtak Visit Aaj Tak website: https://www.aajtak.in/ Follow us on Facebook: https://www.facebook.com/aajtak Follow us on Twitter: https://twitter.com/aajtak Follow us on Instagram: https://www.instagram.com/aajtak/ Subscribe our other Popular YouTube Channels: India Today: https://www.youtube.com/c/indiatoday SoSorry: https://www.youtube.com/c/sosorrypolitoons Good News Today: https://www.youtube.com/c/GoodNewsTodayOfficial AajTak AI: https://www.youtube.com/channel/UClZU5ouD9LkfgrelmL2auTg
राजस्थान का गांव, जो पंचायत चुनाव पर लेगा बड़ा फैसला:डीजे, शराब-आतिशबाजी पर पाबंदी, होलिका दहन की लपटें बताती हैं कि मानसून कैसा रहेगा
राजस्थान का एक ऐसा गांव, जहां होली पर पूरा गांव इकट्ठा होता है। बुजुर्गों की अगुवाई में यहीं पर लिए जाते हैं सामाजिक सरोकार से जुड़े फैसले। ये फैसले पंच नहीं, बल्कि पूरा गांव मिलकर लेता है। इस बार ये गांव पंचायत और शराब से जुड़े दो बड़े फैसले लेने की तैयारी कर रहा है। ये गांव है नगौर जिले का ईनाणियां। नागौर से 13 किलोमीटर दूर ये गांव मूंडवा पंचायत समिति में आता है। 11 हजार आबादी वाले इस गांव में करीब साढ़े सात हजार वोटर हैं, जो इस होली पर पंचायत चुनाव से जुड़ा फैसला लेंगे। सालों से चली आ रही इस परंपरा का असर ये रहा कि गांव में डीजे से लेकर शराब और आतिशबाजी तक बैन है। एक खास बात ये भी है यहां के लोग अपने नाम के साथ जाति की जगह गांव का नाम ‘ईनाणियां’ लगाते हैं। इतना ही नहीं यहां होलिका दहन के दिन अंगारों पर चल कर और आग की लपटों को देखकर मानसून का आंकलन किया जाता है। होली पर पढि़ए इस गांव से जुड़ी यह खास रिपोर्ट… होलिका दहन के दिन चलते हैं अंगारों पर, बारिश का शगुन देखते हैं होलिका दहन से पहले खेजड़ी की पूजा कर उसे लाया जाता है। होलिका दहन के दिन गांव के रूपावतों के बास, गोगामंड और चंवरी के बास के लोग होलिका उखाड़ने के लिए दो खेजड़ी लेकर आते हैं। पूजन के साथ इन्हें गांव के बीच रोपा जाता है। होलिका दहन के दौरान इन दोनों खेजड़ी को रस्सों से बांधा जाता है। इस दिन दो दल बनाए जाते हैं। प्रत्येक दल में 25-25 लोग होते हैं। इन दो दलों की हार-जीत और आग की लपटों के अनुसार साल के मौसम का अनुमान लगाया जाता है। पंडित लूणकरण दाधिच यज्ञ की ओर से इसकी पूजा करवाई जाती है। होलिका दहन के बाद दोनों दल के लोग जलते अंगारों पर दौड़ते हैं। एक दल होलिका को बचाने का प्रयास करता है और दूसरा होलिका को जलाने का। गांव के लोग होलिका को जलाने वाले दल के साथ रहते हैं, क्योंकि मान्यता है कि यदि वह बच गई तो अकाल पड़ेगा। जब होलिका को जलाने वाला दल जीत जाता है तो होलिका की लपटों को देखा जाता है। मान्यता है कि दक्षिण दिशा में यदि लपटें जाती हैं तो इस बार बारिश नहीं आएगी। बाकी किसी दिशा में लपटें जाती हैं, तो माना जाता है कि इस बार बारिश उसी दिशा से आएगी और मानसून अच्छा रहेगा। खेजड़ी के एक हिस्से के बदले 100 पेड़ लगाने की परंपरा होलिका दहन में परंपरा के अनुसार खेजड़ी के पेड़ के ऊपरी हिस्से को उपयोग में लिया जाता है। इसे तोड़ने से पहले विधिवत पूजा की जाती है। इस टहनी की भरपाई के लिए भी गांव वालों ने नियम बना रखा है। इस नुकसान की भरपाई के लिए ग्रामीण होली के बाद 100 खेजड़ी के पेड़ लगाते हैं। ताकि वे खेजड़ी का संरक्षण कर सकें। इतना ही नहीं जिस खेजड़ी के पेड़ के हिस्से को होलिका दहन में उपयोग किया जाता है, उसे घर ले जाने की बजाय मंदिर में रखा जाता है। 1358 में 12 खेड़ों को मिल बना था गांव मान्यता है- 1358 में शोभराज के बेटे इंदरसिंह ने गांव बसाया। यहां 12 खेड़ों में 12 जातियां थीं। सबको मिलाकर ईनाणा बनाया। यह नाम इंदरसिंह के नाम पर पड़ा। तब से लोग अपने जाति की जगह ‘ईनाणियां’ ही लिखते हैं। इंदरसिंह के दो अन्य भाई थे, जो गौ रक्षक थे। इनमें एक हरूहरपाल गायों की रक्षा में शहीद हो गए थे, जिन्हें पूरा गांव कुलदेवता के रूप में पूजता है। गांव में नायक, मेघवाल, खाती, जाट, कुम्हार, ब्राह्मण, तेली, लोहार, गोस्वामी व महाजन आदि जातियां हैं। इस गांव की सबसे बड़ी पहचान इसका नाम है। यहां चाहे कोई किसी भी जाति का हो, लेकिन सबका सरनेम एक ही है ईनाणियां। हालांकि यह परम्परा यहां दशकों पहले ही शुरू कर दी गई थी। इसकी वजह से यहां किसी प्रकार का जातिगत भेदभाव नहीं है। आधार कार्ड तक में यहां के लोगों के नाम जाति की जगह गांव का नाम (ईनाणियां) लिखा है। 1995 में हुआ था शराबबंदी पर फैसला, पांच किलोमीटर में कोई ठेका नहीं इस गांव से कुरीतियों को मिटाने की परंपरा की शुरुआत 31 साल पहले साल 1995 में हो गई थी। ये वो दौर था जब गांव-गांव शराब के ठेके खोले जा रहे थे। गांव के कुछ लोगों को शराब की लत लग गई। आखिर गांव वालों ने फैसला लिया कि गांव में पूरी तरह से शराब पर पाबंदी रहेगी। गांव वालों का दावा है कि उस समय उन्होंने गांव में आवंटित हुए ठेके तक को निरस्त करवा दिया था। इस नियम का आज भी पालन हो रहा है। गांव के आस-पास करीब 5 किलोमीटर तक कोई शराब ठेका नहीं है। इसके बाद गांव के लोगों ने परंपरा शुरू की कि वे हर साल होली और दीपावली के दिन समाज और गांव के हित में फैसले लेंगे। इस बार पंचायत चुनाव और शराब से जुड़े दो फैसले लेने की तैयारी धुलंडी के दिन गांव में रामा-श्यामा यानी एक-दूसरे से मिलने की परंपरा है। लेकिन, ये परंपरा किसी के घर नहीं बल्कि गांव की चौपाल पर निभाई जाती है। गांव के सभी लोग एक ही चौपाल पर इकट्ठे होते हैं और होली की एक-दूसरे को राम-राम करते हैं। इस बार इसी चौपाल पर गांव के लोग पंचायत और शराब से जुड़े दो फैसले लेने की तैयारी कर रहे हैं। पहला- रुपए और शराब बांटने पर नामांकन रद्द करवाएंगे: गांव वालों की मानें तो इस बार पंचायत चुनाव से जुड़ा फैसला लिया जा सकता है। इसमें पंचायत चुनाव का उम्मीदवार किसी भी मदताता को शराब और पैसा नहीं बांट सकेगा। यदि वह ऐसा करता पाया गया तो गांव वाले मिलकर इस उम्मीदवार का नामांकन खारिज करवाएंगे। दूसरा- जमानत के लिए नहीं आएंगे गांव वाले: गांव वालों के अनुसार दूसरा मुद्दा अवैध नशे के कारोबार से जुड़ा है। यदि कोई अवैध रूप से नशे का कारोबार या नशा करता है और पुलिस गिरफ्तार करती है तो उसकी जमानत केवल उसके घर वाले देंगे। यानि घरवालों के अलावा गांव का कोई दूसरा व्यक्ति जमानत नहीं करवाएगा। (नोट: ये दोनों निर्णय गांव वालों की आम सहमति बनने पर लागू किए जाएंगे।) शराब, डीजे, पतंगबाजी और आतिशबाजी तक पाबंदी इस गांव में शराब, डीजे, पतंगबाजी से लेकर आतिशबाजी तक पर पाबंदी है। गांव में डीजे बजाना पूरी तरह से प्रतिबंधित है। यानी शादी-समारोह में केवल बैंड या फिर ढोल थाली ही आएंगे। शादी समारोह में आतिशबाजी पर भी पाबंदी लगा रखी है। दीपावली पर भी मात्र शगुन के नाम पर पटाखे जलाए जाते हैं। मकर संक्रांति पर मांझे की वजह से पक्षी घायल हो जाते थे। ऐसे में यहां पर पतंगबाजी तक पर रोक लगा दी गई। गांव के लोगों ने जब शराब पर प्रतिबंध लगाया तो इसका असर ये हुआ कि गांव में गुटखा, पान मसाला, सिगरेट, बीड़ी और तंबाकू तक बिकना बंद हो गया। आज गांव में ये चीजें भी नहीं मिलती हैं। मृत्युभोज बंद गांव में किसी की मौत के बाद मृतक के रिश्तेदारों, ससुराल और ननिहाल पक्ष द्वारा कपड़े और रुपए देने का रिवाज होता है। इसमें भी काफी पैसा खर्च होता है। गांव के लोगों ने इसे कुप्रथा मानते हुए इस पर रोक लगा दी और मृत्युभोज बंद कर दिया। रंगों वाली होली खेलने पर पाबंदी होली पर केमिकल वाले रंगों से होने वाले नुकसान को देखते हुए यहां होली पर केवल गुलाल का उपयोग होता है। 2016 में हुई चौपाल में किसी भी प्रकार के केमिकल वाले रंगों का उपयोग होली खेलने में पूरी तरह से प्रतिबंधित है। वहीं मारवाड़ पर होली के त्योहार पर नवजात बच्चे के ढूंढ का आयोजन किया जाता है। इसमें पूरा गांव होली के बाद बच्चे के घर आशीर्वाद देने जाता है। ये परंपरा इस गांव में भी निभाई जाती है। लेकिन, इस परंपरा के तहत मिलने वाले रुपए-पैसे लोगों में नहीं बांटकर, उन रुपए से हर साल गर्मी में प्याऊ लगाई जाती है।
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