अयातुल्ला अली खामेनेई के बाद ईरान में सत्ता का संकट
वॉशिंगटन, 1 मार्च (आईएएनएस)। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के मारे जाने की खबरों के बाद इस्लामिक गणराज्य अनिश्चितता के दौर में प्रवेश कर गया है। अमेरिका के सांसदों और ईरानी अधिकारियों के बयानों से यह स्पष्ट है कि तेहरान की सत्ता संरचना में आगे क्या होगा, इसे लेकर गहरी असमंजस की स्थिति है।
अमेरिकी सीनेट इंटेलिजेंस कमेटी के चेयरमैन टॉम कॉटन ने सीएनएन से बातचीत में कहा कि सैन्य अभियान जारी रहेगा। उन्होंने कहा, “आने वाले दिनों में अमेरिकी जनता ईरान की मिसाइलों, उनके लॉन्चरों और अंततः उनकी मिसाइल निर्माण क्षमता पर व्यवस्थित और सुनियोजित कार्रवाई देखेगी।”
सीबीएस न्यूज से बातचीत में कॉटन ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति की “ईरान के भीतर बड़े पैमाने पर जमीनी सेना भेजने की कोई योजना नहीं है”, बल्कि एक विस्तारित हवाई और नौसैनिक अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि ईरान क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों, अरब सहयोगियों और इज़रायल को निशाना बनाना जारी रख सकता है।
वहीं, सीनेट इंटेलिजेंस कमेटी के वाइस चेयरमैन मार्क वार्नर ने सीएनएन से कहा कि खामेनेई के हटने के बाद ईरान के भीतर क्या होगा, इसे लेकर अमेरिका के पास “बहुत कम स्पष्टता” है।
एबीसी न्यूज पर डेमोक्रेटिक सीनेटर एडम शिफ ने व्यापक सैन्य अभियान की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “शासन परिवर्तन के उद्देश्य से इतना बड़ा सैन्य अभियान चलाने का कोई आधार नहीं था।” शिफ ने यह भी कहा कि ईरान से अमेरिका पर कोई तात्कालिक हमले का खतरा नहीं था। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वह “खुश हैं कि वह शासन चला गया” और “उस भयानक शासन का नेता अब नहीं रहा”, लेकिन अमेरिकी सैनिकों द्वारा किसी आंतरिक विद्रोह का समर्थन करने की अपेक्षा से सावधान रहने की जरूरत है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिकी दावों को खारिज करते हुए कहा, “अमेरिका जो कर रहा है वह आक्रामकता का कृत्य है, और हम जो कर रहे हैं वह आत्मरक्षा है।” उन्होंने जोर देकर कहा, “हम अपनी रक्षा कर रहे हैं, चाहे इसके लिए जो भी करना पड़े।”
वॉशिंगटन, जहां सैन्य दबाव बनाए रखने के संकेत दे रहा है, वहीं तेहरान इन हमलों को अवैध आक्रामकता बता रहा है। इन परस्पर विरोधी बयानों से यह साफ है कि ईरान में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया किस दिशा में जाएगी, इस पर अभी गहरा संशय बना हुआ है।
--आईएएनएस
डीएससी
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यूएई में क्षेत्रीय तनाव के कारण हवाई सेवाएं प्रभावित होने के बाद एक एयरपोर्ट पर आपात स्थिति पैदा हो गई. भारतीय मूल के एक प्रोफेशनल ने पेशेवर नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म LinkedIn पर साझा पोस्ट में बताया कि किस तरह अधिकारियों ने स्थिति को संगठित और शांत तरीके से संभाला. उनके अनुसार, यात्रियों की दिल्ली के लिए निर्धारित दोपहर 1 बजे की उड़ान कई घंटों की प्रतीक्षा के बाद बोर्डिंग तक पहुंची. हालांकि रात लगभग 3 बजे यात्रियों को अचानक विमान से उतरने के लिए कहा गया, जब खबरें आईं कि ईरान द्वारा यूएई पर हमले के कारण हवाई यातायात बाधित हो गया है.
विमान के भीतर अनिश्चितता का माहौल
प्रोफेशनल ने विमान के भीतर के माहौल का वर्णन करते हुए लिखा कि उस समय असमंजस और तनाव का वातावरण था. यात्रियों के बीच धीमी बातचीत हो रही थी और मोबाइल फोन पर समाचार अलर्ट चमक रहे थे. उन्होंने इसे “सामूहिक खामोशी” का क्षण बताया, जब किसी को समझ नहीं आ रहा था कि क्या कहा जाए. स्थिति की गंभीरता के बावजूद, उन्होंने कहा कि विमान से उतरने के तुरंत बाद प्रशासन सक्रिय हो गया.
त्वरित और संगठित प्रतिक्रिया
पोस्ट के अनुसार, प्रभावित यात्रियों के लिए थोड़े ही समय में एक समर्पित प्रतीक्षा क्षेत्र तैयार कर दिया गया. वहां स्पष्ट निर्देश, शांत वातावरण और नियमित अपडेट उपलब्ध कराए गए. सबसे उल्लेखनीय कदम के रूप में उन्होंने आपातकालीन वीजा जारी करने की प्रक्रिया का जिक्र किया. कई यात्री केवल ट्रांजिट में थे और उनके पास न तो ठहरने की योजना थी और न ही होटल बुकिंग. ऐसे में अधिकारियों ने तुरंत आपात वीजा जारी कर उन्हें कानूनी रूप से देश में रुकने की अनुमति दी. उन्होंने लिखा कि भू-राजनीतिक संकट और बंद हो रहे हवाई क्षेत्र के बीच यह कदम यात्रियों की सुरक्षा और वैधानिक स्थिति सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया.
पैसेंजर्स के लिए सुविधाएं
प्रोफेशनल ने यह भी बताया कि अधिकारियों ने लाउंज की व्यवस्था की, भोजन उपलब्ध कराया और यात्रियों को नियमित रूप से स्थिति की जानकारी दी. उनके अनुसार, कई देशों में ऐसी स्थिति यात्रियों को भ्रम और अनिश्चितता में छोड़ सकती थी, लेकिन यहां समन्वित प्रबंधन देखने को मिला. पोस्ट के अंत में उन्होंने व्यक्तिगत टिप्पणी करते हुए लिखा कि वह अपनी अगली उड़ान का इंतजार कर रहे हैं, सुरक्षित हैं और इस अनुभव के बाद स्वयं को यूएई में आधारित होने पर गर्व महसूस कर रहे हैं. यह घटना क्षेत्रीय तनाव के बीच संकट प्रबंधन और यात्री सुरक्षा के संदर्भ में प्रशासनिक तैयारी की एक मिसाल के रूप में देखी जा रही है.
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