Holi 2026: श्रीकृष्ण को प्रसन्न करने के लिए होली पर करें 108 नामों का जाप, जीवन से दूर होंगे सारे कष्ट
Holi 2026: होली आने में अब बस कुछ ही समय बाकी है. मान्यता है कि होली और भगवान श्रीकृष्ण का गहरा संबंध है. होली पर राधा-कृष्ण की बात भी होती है. कहते हैं कि उनके शाश्वत प्रेम के उत्सव के रूप में ब्रज में होली खेली जाती है. होली पर भगवान कृष्ण की पूजा करने से जातक के जीवन में खुशियां आती हैं. साथ ही भक्तों को मनवांछित फल मिलता है. मान्यता है कि होली के पावन त्योहार पर भगवान श्रीकृष्ण के 108 नामों का जाप करने से आपकी हर दुविधा दूर जाएंगी. साथ ही मानसिक शांति और आरोग्य मिलता है. आइए जानते हैं भगवान श्रीकृष्ण के 108 नाम.
भगवान श्रीकृष्ण के 108 नाम का करें जाप
वासुदेव
सनातन
कमलनाथ
यशोदावत्सल
कृष्ण
सर्वभूतात्मका
दयानिधि
वेदवेद्या
तीर्थकरा
सर्वग्रहरुपी
पुण्य श्लॊक
जलक्रीडा समासक्त गोपीवस्त्रापहाराक
पन्नगाशन वाहन
परात्पराय
परब्रह्म
नारायण
दानवेन्द्र विनाशक
यज्ञभोक्त
दामोदर
कालीयफणिमाणिक्य रञ्जित श्रीपदाम्बुज
गीतामृत महोदधी
अव्यक्त
पार्थसारथी
बर्हिबर्हावतंसक
युधिष्ठिर प्रतिष्ठात्रे
बाणासुर करान्तकृत
वृषभासुर विध्वंसि
वॆणुनाद विशारद
जगन्नाथ
जगद्गुरू
भीष्ममुक्ति प्रदायक
विष्णु
सुभद्रा पूर्वज
जयी
सत्यभामारता
सत्य सङ्कल्प
सत्यवाचॆ
विश्वरूपप्रदर्शक
दुर्यॊधनकुलान्तकृत
शिशुपालशिरश्छेत्त
कृष्णाव्यसन कर्शक
अनादि ब्रह्मचारिक
नाराकान्तक
मुरारी
कंसारिर
संसारवैरी
मुष्टिकासुर चाणूर मल्लयुद्ध विशारदाय
परमपुरुष
मायिने
कुब्जा कृष्णाम्बरधराय
नरनारयणात्मकाय
स्यमन्तकमणेर्हर्त्रे
तुलसीदाम भूषनाय
बृन्दावनान्त सञ्चारिणे
बलि
द्वारकानायक
मथुरानाथ
मधुघ्ने
कञ्जलोचनाय
कामजनक
निरञ्जन
अजाय
सर्वपालकाय
गोपाल
गोवर्थनाचलोद्धर्त्रे
पारिजातापहारकाय
पीतवससे
यदूद्वहाय
यादवेंद्र
परंज्योतिष
वनमालिने
इलापति
कोटिसूर्य समप्रभा
योगी
गोप गोपीश्वर
तमाल श्यामल कृता
उत्तलोत्तालभेत्रे
यमलार्जुन भञ्जन
तृणी-कृत-तृणावर्ताय
धेनुकासुरभञ्जनाय
अनन्त
वत्सवाटि चराय
योगीपति
गोविन्द
मधुराकृत
त्रिभङ्गी
षोडशस्त्री सहस्रेश
मुचुकुन्द प्रसादक
नवनीतनटन
नवनीत विलिप्ताङ्ग
सच्चिदानन्दविग्रह
शुकवागमृताब्दीन्दवे
नन्दव्रज जनानन्दिन
शकटासुर भञ्जन
पूतना जीवित हर
बलभद्र प्रियनुज
यमुनावेगा संहार
श्रीशाय
देवाकीनन्दन
सङ्खाम्बुजा युदायुजाय
नन्दव्रज जनानन्दिन
चतुर्भुजात्त चक्रासिगदा
हरि
लीलामानुष विग्रह
नन्दगोप प्रियात्मज
पुण्य
वसुदेवात्मज
श्रीवत्स कौस्तुभधराय
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स्पेस से दिखने वाली पृथ्वी की अनोखी 'एयरग्लो', जानें क्या कहते हैं वैज्ञानिक
नई दिल्ली, 1 मार्च (आईएएनएस)। अंतरिक्ष से पृथ्वी की कल्पना करते ही अक्सर हमारे मानस पटल पर नीले ग्रह की सुंदर तस्वीरें उभरती हैं। हालांकि, पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थित अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) से देखने पर एक अद्भुत नजारा दिखाई देता है। पृथ्वी से महज 300 मील की ऊंचाई पर ऊपरी वायुमंडल में लाल, हरी, बैंगनी और पीली रोशनी की चमकीली परतें नजर आती हैं। वैज्ञानिक शब्दावली में इसे एयरग्लो कहा जाता है। यह पृथ्वी की वह प्राकृतिक आभा है, जो रात के समय आकाश को पूरी तरह अंधेरा होने से बचाती है और हमारे वायुमंडल की जटिल प्रक्रियाओं को दर्शाती है।
अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के अनुसार, एयरग्लो तब होता है जब ऊपरी वायुमंडल में मौजूद एटम और मॉलिक्यूल सूरज की रोशनी से अधिक सक्रिय हो जाते हैं। वे अपनी अतिरिक्त ऊर्जा छोड़ने के लिए फोटॉन के रूप में रोशनी निकालते हैं। यह प्रक्रिया ऑरोरा से मिलती-जुलती है, लेकिन ऑरोरा सोलर विंड के हाई-एनर्जी पार्टिकल्स से बनता है, जबकि एयरग्लो रोजाना की सूरज की सामान्य रोशनी से ऊर्जा लेता है। कभी-कभी आयनाइज्ड एटम फ्री इलेक्ट्रॉन से टकराकर भी रोशनी पैदा करते हैं।
रात का आसमान कभी पूरी तरह काला नहीं होता। लाइट पॉल्यूशन, चांदनी और तारों को हटाकर देखें तो भी हल्की रंगीन चमक दिखती है और यही एयरग्लो है। यह सभी तारों की कुल रोशनी का लगभग दसवां हिस्सा होता है। स्पेस से देखने पर यह पृथ्वी को घेरे एक चमकदार बुलबुले जैसा लगता है। यह 50 से 400 मील की ऊंचाई पर फैला होता है, जहां आयनोस्फीयर स्थित है। इसी इलाके से हमारे जीपीएस सिग्नल गुजरते हैं और एस्ट्रोनॉट्स यहां से यात्रा करते हैं।
एयरग्लो के रंग अलग-अलग गैसों से आते हैं। हरी रोशनी सबसे चमकीली होती है, जो ऑक्सीजन एटम्स से बनती है। लाल और अन्य रंग नाइट्रोजन, ऑक्सीजन के कई रिएक्शन से निकलते हैं। कुछ रंग यूवी और इंफ्रारेड में होते हैं, जो आंखों को दिखाई नहीं देते। ऊपरी वायुमंडल पतला होने से एटम बिना टकराए ज्यादा समय तक उत्तेजित रहते हैं और रोशनी निकाल पाते हैं। निचले हिस्से में घने वायुमंडल में टक्करें ज्यादा होती हैं, इसलिए रोशनी कम बनती है। यह चमक लगातार बदलती रहती है क्योंकि यह सूरज की ऊर्जा और पृथ्वी के मौसम दोनों से प्रभावित होती है।
एयरग्लो आयनोस्फीयर में बदलावों का मार्कर काम करता है , जैसे हवा में धुआं दिखाता है कि हवा कैसे बह रही है, वैसे ही एयरग्लो पार्टिकल्स की गति और मौजूदगी बताता है। इससे तापमान, घनत्व और संरचना की जानकारी मिलती है, जो स्पेस वेदर और पृथ्वी के मौसम के बीच संबंध समझने में मदद करती है।
वैज्ञानिक इस खूबसूरत घटना का लगातार अध्ययन कर रहे हैं क्योंकि यह स्पेस और पृथ्वी के मौसम के जुड़ाव को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम है। आईएसएस से ली गई तस्वीरों में यह रंगीन पट्टियां साफ दिखती हैं, जो वैज्ञानिकों को ऊपरी वायुमंडल की गतिविधियों पर नजर रखने में सहायता करती हैं।
--आईएएनएस
एमटी/एएस
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