कैशलेस इलाज, रोबोटिक्स पार्क और पशुपालन मिशन, योगी कैबिनेट ने 22 प्रस्तावों को दी मंजूरी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई उत्तर प्रदेश कैबिनेट की बैठक में 22 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई. बैठक में शिक्षकों और कर्मचारियों को कैशलेस इलाज की सुविधा देने, मैनपुरी में सैनिक स्कूल के विस्तार के लिए मुफ्त जमीन उपलब्ध कराने और ग्रेटर नोएडा में रोबोटिक्स पार्क बनाने जैसे अहम फैसले लिए गए. इसके अलावा पशुपालन को बढ़ावा देने, जलयानों के पंजीकरण और साइबर सुरक्षा से जुड़े प्रस्तावों पर भी मुहर लगी.
पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए स्टेट लाइवस्टॉक मिशन
पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश में पशुधन की संख्या सबसे अधिक है, लेकिन कम उत्पादन और बाजार से जुड़ी समस्याएं अब भी बनी हुई हैं. सरकार पशुपालन के जरिए किसानों की आय बढ़ाने पर जोर दे रही है. उन्होंने कहा कि राज्य में पहली बार स्टेट लाइवस्टॉक मिशन का गठन किया गया है. इसके तहत दूध उत्पादन बढ़ाने, पशुओं की नस्ल सुधारने और पशुपालकों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए काम किया जाएगा. कृत्रिम गर्भाधान के जरिए गायों की दूध उत्पादन क्षमता बढ़ाने की योजना भी है. सरकार गरीब परिवारों को मुर्गी पालन के लिए 100 चूजे मुफ्त दे रही है. इसके अलावा गायों का बीमा कराने की व्यवस्था भी होगी. बीमा प्रीमियम का 85 प्रतिशत हिस्सा सरकार और 15 प्रतिशत हिस्सा किसान को देना होगा। मंत्री के मुताबिक, गाय पर 50 प्रतिशत सब्सिडी देने का भी प्रावधान है.
कंपनियों के मर्जर और डी-मर्जर के पंजीकरण की व्यवस्था
स्टाम्प एवं पंजीयन मंत्री रविंद्र जायसवाल ने बताया कि कंपनियों के विलय यानी मर्जर और डी-मर्जर के पंजीकरण के लिए पंजीयन विभाग में नई व्यवस्था की जाएगी. प्रस्ताव के तहत कंपनी के शेयर मूल्य पर 0.50 प्रतिशत स्टाम्प शुल्क लगेगा. अभी तक इस तरह का पंजीकरण कंपनी सेक्रेटरी के स्तर पर होता था. स्पष्ट नीति नहीं होने के कारण कंपनियों के विलय या विभाजन के दौरान उनकी पूरी कीमत पर कर लगने की स्थिति बन सकती थी. इस प्रस्ताव को विधानसभा से पारित कराने के बाद भारत सरकार को भेजा जाएगा.
नाव और स्टीमर के पंजीकरण के नियम तय
परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने बताया कि कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश अंतर्देशीय जलयान नियमावली को मंजूरी दे दी है. इसके तहत प्रदेश में नाव, स्टीमर और दूसरे जलयानों के संचालन और पंजीकरण के नियम तय होंगे. नियमावली में यांत्रिक और गैर-यांत्रिक जलयानों के पंजीकरण की व्यवस्था होगी. अलग-अलग क्षमता वाली नावों के लिए शुल्क निर्धारित किया जाएगा. गैर-यांत्रिक नाव के पंजीकरण के लिए 50 रुपये शुल्क तय किया गया है. इसके साथ ही यात्रियों और नाविकों के बीमा का प्रावधान भी किया जाएगा.
प्रयागराज में बनेंगे 845 आवास
वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि प्रयागराज में उच्च न्यायालय के क्लास वन और क्लास टू अधिकारियों के लिए 845 आवास बनाए जाएंगे. इनका निर्माण इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (ईपीसी) मॉडल पर किया जाएगा. परियोजना पर करीब 543 करोड़ रुपये खर्च होंगे.
मैनपुरी में सैनिक स्कूल के विस्तार के लिए मुफ्त जमीन
कैबिनेट ने मैनपुरी में सैनिक स्कूल के विस्तार के लिए निशुल्क जमीन उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी. इसके अलावा सहकारिता विभाग से जुड़े प्रस्ताव के तहत झांसी में 30 हजार मीट्रिक टन और ललितपुर में 38 हजार मीट्रिक टन क्षमता बढ़ाने के लिए भूमि उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई.
ग्रेटर नोएडा में बनेगा रोबोटिक्स पार्क
कैबिनेट ने ग्रेटर नोएडा में प्रगति रोबोटिक्स पार्क के निर्माण के प्रस्ताव को मंजूरी दी है. इसके लिए सरकार एक रुपये की लीज पर जमीन उपलब्ध कराएगी. यह प्रस्ताव आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग से संबंधित है. इसके अलावा उत्तर प्रदेश साइबर सिक्योरिटी ऑपरेशंस सेंटर के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी आईआईटी कानपुर को तीन साल के लिए सौंपने के प्रस्ताव को भी मंजूरी मिली है. इस काम पर 104 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे.
कैबिनेट के फैसलों से कई क्षेत्रों पर असर
मंगलवार की बैठक में मंजूर प्रस्तावों का संबंध शिक्षा, स्वास्थ्य, पशुपालन, परिवहन, न्यायिक आवास, सहकारिता, औद्योगिक विकास और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों से है. सरकार के इन फैसलों का उद्देश्य कर्मचारियों को सुविधाएं देने, पशुपालन को प्रोत्साहित करने और तकनीकी क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देना है.
राठी स्टील मनी लॉन्ड्रिंग मामला सुनवाई, सुप्रीम कोर्ट ने ED को हाई कोर्ट जाने का निर्देश दिया
राठी स्टील एंड पावर लिमिटेड से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) को दिल्ली हाई कोर्ट जाने का निर्देश दिया है। मामला छत्तीसगढ़ के केसल नॉर्थ कोयला ब्लॉक के आवंटन से जुड़ा है। विशेष अदालत ने ईडी की शिकायत पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया था। अब सुप्रीम कोर्ट ने एजेंसी से कहा है कि वह इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दे।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला वर्ष 2008 में छत्तीसगढ़ के केसल नॉर्थ कोयला ब्लॉक के आवंटन से संबंधित है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने आरोप लगाया था कि कोयला ब्लॉक हासिल करने के लिए कंपनी ने अपनी जमीन और परियोजना की तैयारी से जुड़ी जानकारी गलत तरीके से पेश की थी। इस मामले में कंपनी और उसके तीन अधिकारियों को वर्ष 2016 में दोषी ठहराया गया था।
इसके बाद ईडी ने धन शोधन निवारण कानून (PMLA) के तहत कार्रवाई शुरू की। एजेंसी का आरोप था कि कोयला ब्लॉक का आवंटन पत्र अपराध से हासिल संपत्ति के दायरे में आता है। ईडी ने यह भी दावा किया कि आवंटन की जानकारी कंपनी की वार्षिक रिपोर्ट में आने के बाद तरजीही शेयर जारी करके करीब 3.08 करोड़ रुपये जुटाए गए। एजेंसी ने इस रकम को कथित अपराध से जुड़ा बताया।
विशेष अदालत ने ईडी की शिकायत क्यों खारिज की?
दिल्ली की राउज एवेन्यू स्थित विशेष अदालत ने 6 मार्च 2026 को ईडी की शिकायत पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया था। अदालत का मानना था कि उपलब्ध सामग्री से यह साबित नहीं होता कि कोयला ब्लॉक का आवंटन अपराध से हासिल संपत्ति के बराबर था।
अदालत ने ध्यान दिलाया कि आवंटन के बाद न तो खनन पट्टा जारी हुआ और न ही कोयला निकालने का काम शुरू हुआ। ऐसे में केवल आवंटन पत्र के आधार पर यह मान लेना उचित नहीं होगा कि कंपनी को अपराध से आर्थिक लाभ हुआ।
शेयर जारी करके जुटाई गई रकम के संबंध में भी अदालत ने सवाल उठाए। ईडी को यह दिखाना था कि इस रकम का कथित मूल अपराध से सीधा संबंध है। विशेष अदालत को उपलब्ध सामग्री से ऐसा संबंध स्थापित होता नहीं दिखा। इसी आधार पर उसने शिकायत पर आगे कार्रवाई करने से इनकार कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट में क्या दलील दी गई?
सुनवाई के दौरान आरोपियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिमन्यु भंडारी ने कहा कि ईडी को विशेष अदालत के आदेश के खिलाफ पहले हाई कोर्ट जाना चाहिए था। उनका कहना था कि इस मामले में सीधे सुप्रीम कोर्ट आने के बजाय तय कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए।
आरोपियों की ओर से यह भी दलील दी गई कि मनी लॉन्ड्रिंग का मामला चलाने के लिए अपराध से हासिल संपत्ति का होना जरूरी है। उनके मुताबिक, जब कोयला ब्लॉक से कंपनी को वास्तविक आर्थिक फायदा ही नहीं हुआ, तो ईडी के आरोपों पर विचार करना जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट ने ईडी को हाई कोर्ट का रुख करने का निर्देश दिया। हाई कोर्ट इस बात पर विचार कर सकेगा कि अपराध से हासिल संपत्ति का आधार साबित हुए बिना मनी लॉन्ड्रिंग का मामला चलाया जा सकता है या नहीं। अदालत ने हाई कोर्ट से मामले पर जल्द विचार करने का अनुरोध भी किया।
संपत्तियों पर यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित संपत्तियों के मामले में यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश भी दिया है। यह व्यवस्था तब तक लागू रहेगी, जब तक अदालत की ओर से कोई उचित अंतरिम आदेश पारित नहीं किया जाता।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि इस निर्देश का मतलब मामले के अंतिम नतीजे पर कोई राय देना नहीं है। अदालत ने फिलहाल मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की सच्चाई पर फैसला नहीं सुनाया है।
अब मामले में अगली कार्रवाई दिल्ली हाई कोर्ट में होगी। वहां ईडी विशेष अदालत के आदेश को चुनौती देने के लिए अपनी दलीलें रखेगी। कंपनी और उसके अधिकारियों को भी अपना पक्ष रखने का मौका मिलेगा।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने मामले के गुण-दोष पर अंतिम फैसला देने के बजाय ईडी को उचित कानूनी मंच पर जाने का निर्देश दिया है। अब हाई कोर्ट की सुनवाई से यह साफ होगा कि ईडी की शिकायत पर आगे कार्रवाई का रास्ता बनता है या नहीं।
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