राठी स्टील मनी लॉन्ड्रिंग मामला सुनवाई, सुप्रीम कोर्ट ने ED को हाई कोर्ट जाने का निर्देश दिया
राठी स्टील एंड पावर लिमिटेड से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) को दिल्ली हाई कोर्ट जाने का निर्देश दिया है। मामला छत्तीसगढ़ के केसल नॉर्थ कोयला ब्लॉक के आवंटन से जुड़ा है। विशेष अदालत ने ईडी की शिकायत पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया था। अब सुप्रीम कोर्ट ने एजेंसी से कहा है कि वह इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दे।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला वर्ष 2008 में छत्तीसगढ़ के केसल नॉर्थ कोयला ब्लॉक के आवंटन से संबंधित है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने आरोप लगाया था कि कोयला ब्लॉक हासिल करने के लिए कंपनी ने अपनी जमीन और परियोजना की तैयारी से जुड़ी जानकारी गलत तरीके से पेश की थी। इस मामले में कंपनी और उसके तीन अधिकारियों को वर्ष 2016 में दोषी ठहराया गया था।
इसके बाद ईडी ने धन शोधन निवारण कानून (PMLA) के तहत कार्रवाई शुरू की। एजेंसी का आरोप था कि कोयला ब्लॉक का आवंटन पत्र अपराध से हासिल संपत्ति के दायरे में आता है। ईडी ने यह भी दावा किया कि आवंटन की जानकारी कंपनी की वार्षिक रिपोर्ट में आने के बाद तरजीही शेयर जारी करके करीब 3.08 करोड़ रुपये जुटाए गए। एजेंसी ने इस रकम को कथित अपराध से जुड़ा बताया।
विशेष अदालत ने ईडी की शिकायत क्यों खारिज की?
दिल्ली की राउज एवेन्यू स्थित विशेष अदालत ने 6 मार्च 2026 को ईडी की शिकायत पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया था। अदालत का मानना था कि उपलब्ध सामग्री से यह साबित नहीं होता कि कोयला ब्लॉक का आवंटन अपराध से हासिल संपत्ति के बराबर था।
अदालत ने ध्यान दिलाया कि आवंटन के बाद न तो खनन पट्टा जारी हुआ और न ही कोयला निकालने का काम शुरू हुआ। ऐसे में केवल आवंटन पत्र के आधार पर यह मान लेना उचित नहीं होगा कि कंपनी को अपराध से आर्थिक लाभ हुआ।
शेयर जारी करके जुटाई गई रकम के संबंध में भी अदालत ने सवाल उठाए। ईडी को यह दिखाना था कि इस रकम का कथित मूल अपराध से सीधा संबंध है। विशेष अदालत को उपलब्ध सामग्री से ऐसा संबंध स्थापित होता नहीं दिखा। इसी आधार पर उसने शिकायत पर आगे कार्रवाई करने से इनकार कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट में क्या दलील दी गई?
सुनवाई के दौरान आरोपियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिमन्यु भंडारी ने कहा कि ईडी को विशेष अदालत के आदेश के खिलाफ पहले हाई कोर्ट जाना चाहिए था। उनका कहना था कि इस मामले में सीधे सुप्रीम कोर्ट आने के बजाय तय कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए।
आरोपियों की ओर से यह भी दलील दी गई कि मनी लॉन्ड्रिंग का मामला चलाने के लिए अपराध से हासिल संपत्ति का होना जरूरी है। उनके मुताबिक, जब कोयला ब्लॉक से कंपनी को वास्तविक आर्थिक फायदा ही नहीं हुआ, तो ईडी के आरोपों पर विचार करना जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट ने ईडी को हाई कोर्ट का रुख करने का निर्देश दिया। हाई कोर्ट इस बात पर विचार कर सकेगा कि अपराध से हासिल संपत्ति का आधार साबित हुए बिना मनी लॉन्ड्रिंग का मामला चलाया जा सकता है या नहीं। अदालत ने हाई कोर्ट से मामले पर जल्द विचार करने का अनुरोध भी किया।
संपत्तियों पर यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित संपत्तियों के मामले में यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश भी दिया है। यह व्यवस्था तब तक लागू रहेगी, जब तक अदालत की ओर से कोई उचित अंतरिम आदेश पारित नहीं किया जाता।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि इस निर्देश का मतलब मामले के अंतिम नतीजे पर कोई राय देना नहीं है। अदालत ने फिलहाल मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की सच्चाई पर फैसला नहीं सुनाया है।
अब मामले में अगली कार्रवाई दिल्ली हाई कोर्ट में होगी। वहां ईडी विशेष अदालत के आदेश को चुनौती देने के लिए अपनी दलीलें रखेगी। कंपनी और उसके अधिकारियों को भी अपना पक्ष रखने का मौका मिलेगा।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने मामले के गुण-दोष पर अंतिम फैसला देने के बजाय ईडी को उचित कानूनी मंच पर जाने का निर्देश दिया है। अब हाई कोर्ट की सुनवाई से यह साफ होगा कि ईडी की शिकायत पर आगे कार्रवाई का रास्ता बनता है या नहीं।
CM धामी ने विधानसभा में पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चन्द्र खण्डूड़ी को दी श्रद्धांजलि, कहा- उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा
CM Dhami: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को भराड़ीसैंण (गैरसैंण) स्थित विधानसभा में पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय मेजर जनरल भुवन चन्द्र खण्डूड़ी (सेवानिवृत्त) के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वर्गीय खण्डूड़ी जी एक अनुशासित सैनिक, समर्पित जनसेवक और कुशल प्रशासक थे। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन देश और समाज की सेवा के लिए समर्पित किया। उनका जीवन सादगी, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज सदन में ऐसे महान व्यक्तित्व का स्मरण करना अत्यंत भावुक क्षण है। विधानसभा अध्यक्ष श्रीमती ऋतु खण्डूड़ी भूषण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि एक बेटी के लिए उसके पिता ही उसके पहले नायक होते हैं, लेकिन जनरल खण्डूड़ी जी केवल उत्तराखण्ड के ही नहीं, बल्कि पूरे देश के नायक रहे। उन्होंने जीवन में जो भी जिम्मेदारी संभाली, उसे पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ निभाया। उच्च पदों पर रहते हुए भी उन्होंने कभी अपने मूल्यों और सिद्धांतों से समझौता नहीं किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वर्गीय खण्डूड़ी जी ने भारतीय सेना में रहते हुए वर्ष 1971 के भारत-पाक युद्ध में अपने साहस और रणनीतिक कौशल का परिचय दिया। सेना की इंजीनियरिंग सेवाओं में रहते हुए उन्होंने सीमांत क्षेत्रों में आधारभूत ढांचे के निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें अति विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया गया। सेना में उनका अनुशासित और समर्पित जीवन देशसेवा का उत्कृष्ट उदाहरण रहा।
1991 में गढ़वाल के बने थे सांसद
मुख्यमंत्री ने कहा कि सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद खण्डूड़ी जी ने जनसेवा के क्षेत्र में नई पारी शुरू की। वर्ष 1991 में वे गढ़वाल लोकसभा क्षेत्र से सांसद निर्वाचित हुए और पांच बार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने संसद में उत्तराखण्ड की आकांक्षाओं और पृथक राज्य की मांग को मजबूती से उठाया। उनके ओजस्वी वक्तव्यों और स्पष्ट विचारों ने उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन को नई गति और वैचारिक मजबूती प्रदान की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री के रूप में भी खण्डूड़ी जी ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना जैसी महत्वपूर्ण पहलों को आगे बढ़ाने में उनकी अहम भूमिका रही। देश में सड़क संपर्क को मजबूत बनाने के उनके प्रयासों का लाभ आज भी करोड़ों लोगों को मिल रहा है।
अनुशासित शासन की पेश की थी मिसाल
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2007 और वर्ष 2011 में उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने पारदर्शी, भ्रष्टाचार मुक्त और अनुशासित शासन की मिसाल पेश की। प्रदेश में मजबूत लोकायुक्त व्यवस्था की दिशा में उनकी पहल भ्रष्टाचार के विरुद्ध उनके सख्त रुख और स्वच्छ प्रशासन के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उनका मानना था कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना भी है। उनकी कार्यशैली में सेना के अनुशासन और जनता के प्रति संवेदनशीलता एवं सेवाभाव का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि खण्डूड़ी जी ने उत्तराखण्ड की राजनीति और जनमानस में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। उनके व्यक्तित्व और कार्यों ने मेरे जैसे अनेक युवाओं को भी देवभूमि की सेवा के लिए प्रेरित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह उनका सौभाग्य रहा कि उन्हें खण्डूड़ी जी का स्नेह और मार्गदर्शन निरंतर प्राप्त होता रहा।
19 मई 2026 को हुआ था निधन
मुख्यमंत्री ने कहा कि 19 मई 2026 को 91 वर्ष की आयु में खण्डूड़ी जी का निधन प्रदेश और राष्ट्र के सार्वजनिक जीवन के लिए अपूरणीय क्षति है। उनके जाने से वास्तव में एक युग का अंत हुआ है। महान व्यक्तित्व अपने कार्यों और आदर्शों के माध्यम से सदैव जनमानस के हृदय में जीवित रहते हैं। स्वर्गीय खण्डूड़ी जी का अनुशासित जीवन, ईमानदार कार्यशैली और प्रदेश के विकास के प्रति समर्पण आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करता रहेगा।
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