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जेन एक्स भारत में वित्त वर्ष 30 तक खपत में 500 अरब डॉलर का योगदान देंगे : रिपोर्ट

मुंबई, 27 फरवरी (आईएएनएस)। जेन एक्स ( 1965 से 1980 के बीच पैदा हुए लोग) वित्त वर्ष 30 तक खपत (वस्तु और सेवा) में 500 अरब डॉलर से अधिक का योगदान दे सकते हैं। इस खपत में प्रीमियम गुड्स की हिस्सेदारी में इजाफा देखने को मिल सकता है। यह जानकारी शुक्रवार को जारी की गई रिपोर्ट दी गई।

मार्केट रिसर्च फर्म रेडसीर की रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रति व्यक्ति उपभोग में लगातार वृद्धि से उपभोग वृद्धि को समर्थन मिलेगा।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जनरेशन एक्स द्वारा स्वास्थ्य देखभाल पर किया जाने वाला खर्च वित्त वर्ष 2030 तक 17 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) से बढ़कर 73 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।

रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि न्यूट्रास्यूटिकल्स पर खर्च वित्त वर्ष 2030 तक 20 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जो 25 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ रहा है। यह स्वास्थ्य और रोजमर्रा की सेहत को बेहतर बनाने के लिए परिणामों पर केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाता है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जनरेशन एक्स का सौंदर्य और व्यक्तिगत देखभाल उत्पादों पर खर्च वित्त वर्ष 2030 तक 8 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है, क्योंकि उनकी प्राथमिकताएं रुझानों से हटकर उपचारों की ओर बढ़ रही हैं।

जनरेशन एक्स के लोग अब धीमी गति से, अधिक आरामदेह और सुख-सुविधाओं पर ध्यान केंद्रित करते हुए यात्रा कर रहे हैं। वैकल्पिक आवास और बुटीक होटलों में ठहरने की मांग में सालाना 25 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि इस पीढ़ी के लोग अवकाश के लिए प्रीमियम केबिन और पांच सितारा होटलों में ठहरना पसंद करते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, जनरेशन एक्स के माता-पिता के लिए शिक्षा अभी भी एक पारंपरिक खर्च है। शहरी परिवार प्रति बच्चे सालाना 10-20 लाख रुपए तक खर्च कर रहे हैं, साथ ही कैम्ब्रिज और आईबी स्कूलों के साथ-साथ विदेशों में शिक्षा कार्यक्रमों को भी तेजी से अपनाया जा रहा है।

रेडसीर स्ट्रैटेजी कंसल्टेंट्स के पार्टनर मृगांक गुटगुटिया ने कहा, जनरेशन एक्स शायद भारत के उपभोग परिदृश्य में अब तक की सबसे कम आंकी गई शक्ति है। हालांकि वे आर्थिक रूप से सुरक्षित हैं, डिजिटल रूप से आत्मविश्वासी हैं और अपने मूल्यों को लेकर स्पष्ट हैं।

गुटगुटिया ने आगे कहा, यह एक ऐसी पीढ़ी है जो अब विवेकाधीन प्रयोग से आगे बढ़कर बेहतर स्वास्थ्य, गहन यात्रा अनुभव, बेहतर डिज़ाइन वाले घरों और टिकाऊ गुणवत्ता वाली वस्तुओं पर सोच-समझकर खर्च करती है।

एक अन्य हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का वेतनभोगी वर्ग, विशेष रूप से युवा पेशेवर, भारत के उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं के बाजार की वृद्धि को गति देंगे, जिसकी अनुमानित वार्षिक वृद्धि दर 11 प्रतिशत है और यह 2029 तक 3 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच जाएगा।

--आईएएनएस

एबीएस/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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भारतीय बच्चों की प्राइवेसी खतरे में है? डीपीडीपी एक्ट के तहत डेटा ब्रीच की चिंताओं का आकलन

नई दिल्ली, 27 फरवरी (आईएएनएस)। स्कूलों में पढ़ाई के दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते उपयोग ने नई बहस को जन्म दे दिया है। यह चर्चा अब केवल पढ़ाई को आसान और प्रभावी बनाने तक सीमित नहीं रही, बल्कि बच्चों की सुरक्षा और उनके अधिकारों तक पहुंच गई है। खास तौर पर छात्रों के डेटा के संभावित दुरुपयोग का खतरा वैश्विक स्तर पर एक गंभीर और चिंताजनक सच्चाई के रूप में सामने आ रहा है।

यूएनआरसी, यूनेस्को, यूएनआईसीआरआई और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय के ऑफिस समेत कई यूएन के विभागों के एक समूह ने संयुक्त बयान जारी किया है। इस बयान में एआई सिस्टम, टूल्स और प्लेटफॉर्म से इकट्ठा किए गए बच्चों के डेटा की सुरक्षा और प्राइवेसी की जरूरत पर जोर दिया गया।

साल 2025 में अमेरिका के टेक्सास में स्थित प्रमुख एडटेक कंपनी पावरस्कूल के खिलाफ बड़े डेटा ब्रीच को लेकर मुकदमा दायर किया गया। कंपनी पर आरोप है कि इस घटना में करीब 6 करोड़ से अधिक छात्रों और 1 करोड़ शिक्षकों की संवेदनशील जानकारी लीक हो गई, जिनमें कई मामलों में सोशल सिक्योरिटी नंबर जैसे निजी विवरण भी शामिल थे। पावरस्कूल एक स्टूडेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम के रूप में काम करती है।

भारत में की गई एक पायलट स्टडी ने भी चिंताजनक तस्वीरें पेश की हैं। इसके अनुसार, भारतीय शैक्षणिक संस्थानों को मात्र नौ महीनों के भीतर दो लाख से ज्यादा साइबर हमलों और लगभग चार लाख डेटा ब्रीच की घटनाओं का सामना करना पड़ा।

यह वैश्विक और राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य हाल ही में घोषित प्रथम और एंथ्रोपिक की साझेदारी को समझने के लिए महत्वपूर्ण है। प्रथम एक गैर-सरकारी संगठन है, जो शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय है, जबकि एंथ्रोपिक अमेरिका मुख्यालय वाली एआई कंपनी है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम विकसित करती है।

दोनों संस्थाओं के बीच हुई इस साझेदारी के तहत एंथ्रोपिक का बड़ा लैंग्वेज मॉडल ‘क्लॉड’ बच्चों के हाथ से लिखे उत्तर, उनकी शैक्षणिक प्रगति से जुड़े डेटा और व्यक्तिगत फीडबैक तैयार करने के लिए आवश्यक सूचनाओं तक पहुंच प्राप्त करता है।

प्रथम-एंथ्रोपिक पार्टनरशिप ने मिलकर फरवरी 2026 में अपने पहले प्रोडक्ट एनीटाइम टेस्टिंग मशीन (एटीएम) का ऐलान किया। एंथ्रोपिक के क्लॉड से पावर्ड, एटीएम करिकुलम-अलाइन्ड टेस्ट बनाता है। स्टूडेंट के हाथ से लिखे जवाबों को डिजिटाइज करता है। इसके अलावा, क्लॉड का इस्तेमाल करके रूब्रिक-बेस्ड ग्रेडिंग अप्लाई करता है और बाइलिंगुअल (हिंदी-इंग्लिश), पर्सनलाइज्ड फीडबैक देता है। भारत के डीपीडीपी एक्ट को देखते हुए असेसमेंट मॉडल में कुछ रिस्क हो सकते हैं।

डीपीडीपी अधिनियम की धारा 9 (1) में यह अनिवार्य है कि डेटा न्यासी को किसी बच्चे (18 वर्ष से कम उम्र के किसी भी व्यक्ति के रूप में परिभाषित) के किसी भी व्यक्तिगत डेटा को संसाधित करने से पहले माता-पिता या वैध अभिभावक की सत्यापन योग्य सहमति प्राप्त करनी होगी।

ड्राफ्ट डीपीडीपी नियम, 2025 (नियम 10) ओटीपी-आधारित अभिभावकीय सहमति और सरकार से जारी आईडी के साथ एकीकरण सहित ऐसी सहमति प्राप्त करने के तंत्र पर आगे का मार्गदर्शन प्रदान करता है।

हालांकि, एटीएम द्वारा बच्चों के डेटा का उपयोग करने के मामले में, माता-पिता पूरी तरह से यह नहीं समझ सकते हैं कि उनके बच्चे के हस्तलिखित कार्य की तस्वीरें ली जा रही हैं, क्लाउड-आधारित एआई प्रणाली पर अपलोड की जा रही हैं, अमेरिकी कंपनी के सर्वर द्वारा संसाधित की जा रही हैं और एक बड़े भाषा मॉडल द्वारा विश्लेषण की जा रही हैं।

--आईएएनएस

केके/एबीएम

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