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अमेरिका: तीन सैनिकों को 'मेडल ऑफ ऑनर' से सम्मानित करेंगे राष्ट्रपति ट्रंप

वाशिंगटन, 27 फरवरी (आईएएनएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वितीय विश्व युद्ध, वियतनाम युद्ध और अफगानिस्तान युद्ध के दौरान कर्तव्य की पुकार से परे वीरता और साहस के कार्यों को मान्यता देते हुए दो मार्च को तीन अमेरिकी सैनिकों को प्रतिष्ठित मेडल ऑफ ऑनर से सम्मानित करेंगे।

व्हाइट हाउस ने घोषणा की है कि देश के सर्वोच्च सैन्य सम्मान से मास्टर सार्जेंट रोडरिक (रॉडी) डब्ल्यू. एडमंड्स को मरणोपरांत, स्टाफ सार्जेंट माइकल एच. ओलिस को मरणोपरांत और कमांड सार्जेंट मेजर टेरी पी. रिचर्डसन (सेवानिवृत्त) को सम्मानित किया जाएगा।

मास्टर सार्जेंट एडमंड्स को 27 जनवरी से 30 मार्च 1945 के बीच जर्मनी में युद्धबंदी के रूप में उनके अदम्य साहस के लिए सम्मानित किया जा रहा है। जीगेनहेन स्थित स्टालैग आईएक्सए शिविर पहुँचने पर उन्हें नाजी सेना के उस क्रूर आदेश का सामना करना पड़ा, जिसमें केवल यहूदी-अमेरिकी कैदियों को अलग से हाजिर होने का निर्देश दिया गया था। ऐसा न करने पर मृत्युदंड की चेतावनी दी गई थी।

200 से अधिक यहूदी-अमेरिकी युद्धबंदियों पर मंडराते संभावित नरसंहार के खतरे को भांपते हुए, एडमंड्स ने एकजुटता का परिचय दिया और सभी 1,200 अमेरिकी सैनिकों को एक साथ उपस्थित होने का आदेश दिया।

जब क्रोधित नाजी कमांडेंट ने उनकी कनपटी पर पिस्तौल तानकर यहूदी कैदियों की पहचान उजागर करने या मारे जाने की धमकी दी, तब भी एडमंड्स विचलित नहीं हुए। उन्होंने निडरता से कमांडेंट को चेतावनी दी कि उनकी हत्या एक गंभीर युद्ध अपराध माना जाएगा। अंततः, एडमंड्स के इरादों के आगे नाजी अधिकारी को झुकना पड़ा और वह बिना किसी कैदी को नुकसान पहुंचाए वहां से पीछे हट गया।।

कुछ हफ़्तों बाद, जब मित्र देशों की सेनाएं आगे बढ़ीं, तो एडमंड्स ने प्रतिरोध का नेतृत्व किया। जर्मन परिवहन के आने पर उन्होंने कैदियों को अपनी कतारें तोड़ने और अपनी बैरकों में लौटने का आदेश दिया, जिससे गार्डों को शिविर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा और 1,200 अमेरिकी सैनिक वहीं रह गए।

स्टाफ सार्जेंट ओलिस को 28 अगस्त, 2013 को अफगानिस्तान के फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस गजनी में हुए एक जटिल और समन्वित दुश्मन हमले के दौरान असाधारण साहस और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय देने के लिए सम्मानित किया जा रहा है। यह हमला बहुस्तरीय था, जिसमें वाहन में लगाए गए तात्कालिक विस्फोटक उपकरण, आत्मघाती हमले, अप्रत्यक्ष गोलीबारी तथा छोटे हथियारों से की गई फायरिंग शामिल थी।

हमले के दौरान ओलिस ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए तुरंत अपने साथी सैनिकों को सुरक्षित बंकरों में जाने का निर्देश दिया। इसके बाद भी वे स्वयं जोखिम उठाकर हताहतों की स्थिति जानने के लिए दोबारा एक इमारत में दाखिल हुए। जब दुश्मन बल घेराबंदी तोड़कर परिसर के भीतर घुस आए, तो उन्होंने मोर्चा संभालते हुए उनका सामना किया।

गठबंधन सेना के एक अधिकारी के साथ, केवल राइफलों से लैस होकर, ओलिस ने अन्य बलों के साथ मिलकर जवाबी कार्रवाई की और हमले को विफल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके साहस, नेतृत्व और त्वरित निर्णय क्षमता ने न केवल कई सैनिकों की जान बचाई, बल्कि हमले की गंभीरता को भी कम किया।

व्हाइट हाउस ने कहा कि लगातार गोलीबारी के बीच, एक विद्रोही ने उन पर करीब से हमला किया। अपनी जान की परवाह न करते हुए, ओलिस ने खुद को विद्रोही और घायल अधिकारी के बीच खड़ा कर दिया। उन्होंने गोली चलाई और हमलावर को निष्क्रिय कर दिया, लेकिन विद्रोही की आत्मघाती जैकेट फट गई, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए।

तत्कालीन स्टाफ सार्जेंट टेरी पी. रिचर्डसन को 14 सितंबर, 1968 को वियतनाम गणराज्य के लोक निन्ह के पास किए गए कार्यों के लिए सम्मानित किया जा रहा है। व्हाइट हाउस ने कहा कि उत्तरी वियतनामी सेना की एक बटालियन की भीषण गोलीबारी के बीच, उन्होंने घायल सैनिकों को बचाने के लिए तीन बार भारी मशीन गन की गोलीबारी का सामना किया।

अपनी कंपनी के घिर जाने का एहसास होने पर, वे सामरिक हवाई हमलों का निर्देशन करने के लिए हिल 222 की ओर बढ़े, लेकिन वहां उन्हें पता चला कि यह दुश्मन का रेजिमेंटल बेस कैंप था। स्नाइपर की गोली से घायल होने के बावजूद, उन्होंने सात घंटे तक हवाई हमलों का निर्देशन जारी रखा। बाद में उन्होंने चिकित्सा सहायता के लिए अस्पताल ले जाने से इनकार कर दिया। उनके इस कार्य से 85 साथी सैनिकों की जान बच गई।

बता दें कि मेडल ऑफ ऑनर उन सशस्त्र बलों के सदस्यों को दिया जाता है, जो अपने जीवन को जोखिम में डालकर, कर्तव्य की पुकार से परे, वीरता और साहस का असाधारण प्रदर्शन करते हैं। अमेरिकी गृहयुद्ध के दौरान इसकी स्थापना के बाद से, 3,500 से अधिक सैन्य कर्मियों को यह पदक प्राप्त हो चुका है। यह संयुक्त राज्य अमेरिका का सर्वोच्च सैन्य सम्मान है और विभिन्न युद्धों और पीढ़ियों में असाधारण युद्धकालीन कार्यों को मान्यता देते हुए राष्ट्रपति द्वारा कांग्रेस के नाम पर दिया जाता है।

--आईएएनएस

एसडी/एएस

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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युवा वेतनभोगी भारतीय 2029 तक उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं के बाजार को 3 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएंगे: रिपोर्ट

नई दिल्ली, 27 फरवरी (आईएएनएस)। भारत का उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं का बाजार 11 प्रतिशत की वार्षिक चक्रवृद्धि वृद्धि दर (सीएजीआर) से बढ़ते हुए 2029 तक 3 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है। इस वृद्धि में वेतनभोगी वर्ग, खासकर युवा पेशेवर, अहम भूमिका निभाएंगे। शुक्रवार को जारी जीआई ग्रुप होल्डिंग की रिपोर्ट में यह बात कही गई है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि युवा पेशेवर तेजी से बिकने वाले उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं (कंज्यूमर ड्यूरेबल्स) की बिक्री का 37 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं और लगभग 45 प्रतिशत खरीद फाइनेंस (कर्ज या ईएमआई) के जरिए होती है।

करीब 74 प्रतिशत जेन जेड उपभोक्ता ईएमआई या बाय नाउ, पे लेटर जैसे विकल्पों का उपयोग करते हैं। 68 प्रतिशत खरीदारों के लिए प्रोडक्ट की विशेषताएं खरीद का सबसे बड़ा कारण हैं। इसके बाद 61 प्रतिशत के लिए रिव्यू, 59 प्रतिशत के लिए कीमत और 55 प्रतिशत के लिए वारंटी अहम होती है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि लगभग 73 प्रतिशत खरीदार अभी भी पैसे के सही मूल्य वाले उत्पाद चुनते हैं, लेकिन करीब 70 प्रतिशत लोग बेहतर प्रदर्शन मिलने पर मिड-टियर या प्रीमियम उत्पादों में निवेश करने के लिए तैयार हैं।

महिलाएं भी अपग्रेड की इस मांग में बड़ी भूमिका निभा रही हैं। 61 प्रतिशत महिलाओं ने ज्यादा महत्वाकांक्षी खरीदारी की बात कही। वहीं, 46 प्रतिशत उपभोक्ता हर 2-3 साल में अपने ड्यूरेबल उत्पाद बदल रहे हैं और 63 प्रतिशत लोग अपग्रेड करते समय अक्सर ब्रांड भी बदल लेते हैं।

इस वजह से खरीद का अनुभव, बिक्री के बाद सेवा और भरोसेमंद सपोर्ट बाजार में महत्वपूर्ण अंतर पैदा करने वाले कारक बनते जा रहे हैं, क्योंकि अपग्रेड की इच्छा लगातार बनी हुई है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि अगली बड़ी लहर स्मार्ट लिविंग की है। 42 प्रतिशत लोगों के पास पहले से कम से कम एक स्मार्ट डिवाइस है और 67 प्रतिशत लोगों का कहना है कि उनकी अगली खरीद स्मार्ट फीचर वाली होगी।

जीआई ग्रुप होल्डिंग की कंट्री मैनेजर सोनल अरोड़ा ने कहा कि इस रिपोर्ट के निष्कर्ष बताते हैं कि कर्मचारियों का प्रशिक्षण, बेहतर रिटेल अनुभव, मजबूत बिक्री बाद सहायता और पीएलआई योजनाओं के जरिए विस्तार बेहद जरूरी है।

उन्होंने कहा कि जो कंपनियां इन बदलावों के अनुसार खुद को ढालेंगी, वे भारत के बढ़ते मध्यम वर्ग की जरूरतों को पूरा करने के लिए लचीली, रचनात्मक और ग्राहक-केंद्रित रणनीति बना सकेंगी।

--आईएएनएस

डीबीपी/

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