T20 World Cup 2026 में कौन जीतेगा प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट का अवार्ड, ये 3 खिलाड़ी हैं प्रबल दावेदार
T20 World Cup 2026: भारत और श्रीलंका की मेजबानी टी20 वर्ल्ड कप 2026 का आयोजन हो रहा है. ये टूर्नामेंट अब अपने अंतिम पड़ाव की ओर पहुंच चुका है. अभी सुपर-8 के मुकाबले खेले जा रहे हैं, इसके बाद दो सेमीफाइनल होंगे और फिर 8 मार्च को टी20 वर्ल्ड कप 2026 का फाइनल मैच खेला जाएगा. इसके साथ ही फैंस ये जानना चाह रहे हैं कि कौन इस बार प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट का अवार्ड अपने नाम करेगा. तो आइए आज हम आपको उसके बारे में बताने वाले हैं.
1 - साहिबजादा फरहान
पाकिस्तान के सलामी बल्लेबाज साहिबजादा फरहान अपने पहले ही टी20 वर्ल्ड कप में शतक जड़कर सुर्खियां बटोरी हैं. अब वो टूर्नामेंट में प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट अवार्ड अपने नाम किया. उन्होंने शानदार बल्लेबाजी करते हुए अबतक 5 मैचों में 70 की औसत और 158 के स्ट्राइक रेट के साथ 283 रन बनाए हैं. नामीबिया के सामने साहिबजादा फरहान ने 57 गेंदों में शतक लगाया था. वह ऐसा करने वाले टी20 वर्ल्ड कप के इतिहास में दूसरे पाकिस्तानी खिलाड़ी बने हैं.
A good start from Sahibzada Farhan gets Pakistan going in their key Super 8 clash against England ????
— ICC (@ICC) February 24, 2026
His half-century is one of our @marriottbonvoy Milestones of the #T20WorldCup ???? pic.twitter.com/i3fR7gs4x6
2 - शिमरोन हेटमायर
वेस्टइंडीज क्रिकेट टीम के बाएं हाथ के बल्लेबाज शिमरोन हेटमायर भी इस बार प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट अवार्ड जीतने वाले खिलाड़ियों की लिस्ट में प्रबल दावेदार हैं. हेटमायर ने वेस्टइंडीज के लिए नंबर-3 पर बल्लेबाजी करते हुए 5 पारियों में 54 की औसत के साथ 219 रन बनाए हैं. इस वक्त वो टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले दूसरे बल्लेबाज बने हुए हैं.
3 - ईशान किशन
इंडियन क्रिकेट टीम के सलामी विकेटकीपर बल्लेबाज ईशान किशन भी टी20 वर्ल्ड कप 2026 में प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट का खिताब अपने नाम कर सकते हैं. वो अब तक टूर्नामेंट में भारत के लिए सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज बने हुए हैं. ईशान ने अब तक 5 मैचों में 193 की स्ट्राइक-रेट के साथ 176 रन बना चुके हैं. उन्होंने 40 गेंदों में 77 रन की पारी पाकिस्तान के खिलाफ खेली थी, जो भारत की जीत का कारण बना था.
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भारत की जीडीपी वृद्धि दर वित्त वर्ष 2026-27 में 6.8-7.2 प्रतिशत के बीच रहने की उम्मीद: ईवाई रिपोर्ट
नई दिल्ली, 26 फरवरी (आईएएनएस)। भारत की अर्थव्यवस्था की विकास दर वित्त वर्ष 27 में 6.8 प्रतिशत से लेकर 7.2 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान है। इसकी वजह देश का बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते करना, अमेरिकी टैरिफ के प्रभाव को कम करने के लिए केंद्र द्वारा आर्थिक सुधारों को लागू करना है। यह जानकारी ईवाई की ताजा रिपोर्ट में दी गई।
ईवाई इंडिया के चीफ पॉलिसी एडवाइजर डीके श्रीवास्ताव ने कहा कि दुनिया के प्रमुख आर्थिक समूहों और अर्थव्यवस्थाओं के साथ भारत के द्विपक्षीय व्यापार समझौते से, देश के मध्यम अवधि में विकास की संभावनाएं बढ़ गई हैं।
विश्लेषण में कहा गया कि सरकार के दीर्घकालिक विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कर-से-जीडीपी अनुपात में निरंतर वृद्धि की आवश्यकता होगी, जो मुख्य रूप से नए संरचनात्मक सुधारों के बजाय मजबूत अनुपालन के माध्यम से होगा, क्योंकि अधिकांश प्रमुख कर सुधार पहले ही लागू किए जा चुके हैं।
ईवाई इकोनॉमी वॉच रिपोर्ट में कहा गया है कि चालू वित्त वर्ष में प्रमुख कर सुधार किए गए, विशेष रूप से व्यक्तिगत आयकर और जीएसटी ढांचे से संबंधित हैं। इन दोनों सुधारों का उद्देश्य परिवारों की व्यय योग्य आय को बढ़ाना था ताकि निजी उपभोग मांग को समर्थन मिल सके। हालांकि, इसका असर सरकार की आय पर भी पड़ा है, जिसके कारण यह वित्त वर्ष 2026 के बजट अनुमानों से कम रहने की आशंका है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि आय में इस कमी की आशंका के बावजूद, सरकार से वित्त वर्ष 2026 के लिए बजट में निर्धारित राजकोषीय घाटे के लक्ष्य का पालन करने की व्यापक रूप से उम्मीद है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2026-27 के लिए राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 4.3 प्रतिशत तक और कम करने का अनुमान लगाया है। सरकार आर्थिक विकास को स्थिरता के साथ सुनिश्चित करने के लिए राजकोषीय समेकन के पथ पर अग्रसर है।
1 फरवरी को अपने बजट भाषण में उन्होंने कहा कि सरकार ने 2025-26 के बजट में राजकोषीय घाटे को 4.4 प्रतिशत तक कम करने की अपनी प्रतिबद्धता पूरी कर ली है और अब राजकोषीय विवेक के पथ पर अग्रसर रहते हुए इसे और कम करके 4.3 प्रतिशत तक लाएगी।
उन्होंने कहा कि यह लक्ष्य आर्थिक गति को बनाए रखने और सार्वजनिक वित्त को स्थिर रखने के बीच संतुलन को दर्शाता है। राजकोषीय घाटा सरकार के कुल व्यय और कुल राजस्व के बीच का अंतर होता है।
वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार वित्त वर्ष 2027 में अपने राजकोषीय घाटे को पूरा करने के लिए नियत प्रतिभूतियों से 11.7 लाख करोड़ रुपए का शुद्ध ऋण लेगी, जबकि सकल बाजार ऋण 17.2 लाख करोड़ रुपए आंका गया है।
--आईएएनएस
एबीएस/
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