रीवा में Tata Power न्यूक्लियर प्रोजेक्ट पर विवाद, उमंग सिंघार का आरोप- ग्रामसभा के विरोध के बाद भी दी NOC
मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सोमवार को रीवा जिले के रोजौही-सरई कला क्षेत्र में टाटा पावर की प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा परियोजना को लेकर प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार पर निशाना साधा। सिंघार ने यहां संवाददाता सम्मेलन में दावा किया कि ग्रामसभा के विरोध के बावजूद परियोजना के लिए ड्रिलिंग की अनुमति दी गई। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव को प्रस्तावित परियोजना को किसी अन्य स्थान पर स्थापित करने पर विचार करना चाहिए, क्योंकि इससे क्षेत्र के दलित और आदिवासी परिवार विस्थापित होंगे।
सिंघार ने कहा, तीन सितंबर को हुई ग्रामसभा ने सर्वसम्मति से ड्रिलिंग की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। इसके बावजूद चार सितंबर के कथित सहमति पत्र का हवाला देकर 23 सितंबर को अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) जारी कर दिया गया। ग्राम पंचायत ने पांच सितंबर को ही जिला प्रशासन को पत्र लिखकर ग्रामसभा के फैसले की जानकारी दे दी थी।
उन्होंने बताया कि सरपंच कोमल संजय सिंह ने आठ अक्टूबर को संभागायुक्त और कलेक्टर से शिकायत कर कथित सहमति पत्र की जांच कराने और एनओसी रद्द करने की मांग की थी। कांग्रेस नेता सिंघार ने सवाल किया कि जब ग्रामसभा ने अनुमति नहीं दी थी, तो प्रशासन ने किस आधार पर ड्रिलिंग की मंजूरी दी। उन्होंने यह भी पूछा कि कथित सहमति पत्र की प्रामाणिकता की जांच के लिए क्या कदम उठाए गए।
उन्होंने दावा किया कि रोजौही और सरई कला में 1,500 से अधिक परिवार रहते हैं। पांच हजार से अधिक की आबादी वाले इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में आदिवासी, अनुसूचित जाति के परिवार, छोटे किसान और कृषि मजदूर शामिल हैं। चेर्नोबिल और फुकुशिमा परमाणु दुर्घटनाओं का उल्लेख करते हुए सिंघार ने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि प्रस्तावित संयंत्र में सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा है या नहीं और आसपास रहने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए क्या इंतजाम किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण प्रभाव आकलन, भूकंपीय जोखिम, जल उपलब्धता, विकिरण के संभावित प्रभाव और आपदा प्रबंधन योजनाओं से संबंधित जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए। साथ ही, सरकार को यह भी बताना चाहिए कि परियोजना से कितने गांव, परिवार, कृषि भूमि और वनाधिकार पट्टे प्रभावित हो सकते हैं। सिंघार ने कहा कि सरकार एक ओर सौर ऊर्जा और जैव ऊर्जा जैसे वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर परमाणु ऊर्जा परियोजनाएं प्रस्तावित कर रही है।
उन्होंने दावा किया कि क्षेत्र में परियोजना के विरोध में हुए प्रदर्शनों के दौरान विमला कोल नामक एक बुजुर्ग आदिवासी महिला की मौत हो गई थी। उन्होंने कहा कि वह इस मुद्दे को विधानसभा में उठाएंगे। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर भाजपा की आलोचना के बारे में पूछे जाने पर सिंघार ने कहा कि सत्तारूढ़ दल को चुनाव प्रक्रिया, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और लोकतंत्र से जुड़े सवालों का जवाब देना चाहिए।
उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी की।
यूरोप में कारोबार पर नियमों का भारी बोझ, Piyush Goyal ने The Hague में जताई चिंता
(राजेश राय) हेग, 26 अक्टूबर वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को यूरोप द्वारा व्यवसायों पर बढ़ते नियामकीय बोझ को लेकर चिंता जताई, जबकि नीदरलैंड के व्यापार मंत्री सोर्ड सोर्ड्समा ने कहा कि यूरोपीय संघ (ईयू) की कार्बन सीमा समायोजन प्रणाली (सीबीएएम) एक जरूरी उपाय है। गोयल ने कहा कि यूरोप व्यवसायों पर विनियामक बोझ बढ़ा रहा है, जबकि उद्योग जगत को सरल प्रक्रियाओं और कार्यप्रणाली की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि भारत नियमों को सरल बनाकर कंपनियों के लिए बड़े अवसर पैदा कर रहा है।
उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा, दुर्भाग्य से, आपको इस मामले में हमसे एक-दो सबक सीखने की जरूरत है। वाणिज्य मंत्री ने आगे कहा, ‘‘चूंकि यूरोप व्यवसायों पर विनियामक बोझ बढ़ा रहा है, मैं आपको बता दूं कि जब भी मैं यह बात कहता हूं, तो मैं आपके देशों की कंपनियों का चहेता बन जाता हूं... ऐसे कई अवसर आए हैं जब मैंने यूरोपीय आयोग के स्तर पर और कई यूरोपीय देशों में भारी विनियामक अतिरिक्त बोझ के बारे में बात की है।’’ मंत्री यहां भारत-नीदरलैंड व्यवसायी मंच को संबोधित कर रहे थे। वह दो दिन की आधिकारिक यात्रा पर यहां आए हैं।
नीदरलैंड यूरोपीय संघ (ईयू) का एक महत्वपूर्ण सदस्य है, जिसके साथ भारत ने एक मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिया है। इसके दिसंबर में हस्ताक्षरित होने और अगले साल मार्च-अप्रैल तक लागू होने की उम्मीद है। गोयल ने कहा, दुनिया अधिक स्वतंत्रता चाहती है... कारोबारी दुनिया कम अनुपालन, सरल प्रक्रियाओं, सरल कार्यप्रणाली और कम कागजी कार्रवाई चाहती है।
उन्होंने आगे कहा कि भारत में सरकार हमेशा कारोबार सुगमता को बढ़ावा देने के लिए उद्योग जगत से सुझाव मांगती है। भारत ने कई मौकों पर सीबीएएम और वनों की कटाई जैसे कई यूरोपीय संघ के नियमों पर चिंता जताई है। इस मौके पर नीदरलैंड के व्यापार मंत्री सोर्ड सोर्ड्समा ने कहा कि उन्हें सीबीएएम के किसी भी नए समझौते की उम्मीद नहीं है, और उन्होंने इसे एक आवश्यक उपाय बताया।
उन्होंने हालांकि कहा कि नीदरलैंड छोटे और मझोले उद्यमों (एमएमई) को नियमों को समझने और अनुपालन को आसान बनाने में मदद कर रहा है। यह पूछे जाने पर कि क्या यूरोपीय संघ (ईयू) सीबीएएम पर पुनर्विचार करेगा क्योंकि इससे आयात महंगा हो जाएगा, उन्होंने संवाददाताओं से कहा, मुझे नहीं लगता कि सीबीएएम पर कोई नया समझौता होगा क्योंकि हम इसे यह सुनिश्चित करने के लिए एक जरूरी उपाय के रूप में देखते हैं कि हम उन लक्ष्यों पर टिके रहें जिन पर पूरी दुनिया ने सहमति जताई है, यानी पेरिस जलवायु समझौते के लक्ष्य। उन्होंने पत्रकारों से कहा, हम मानते हैं कि न केवल हमें बल्कि पूरी दुनिया को इन लक्ष्यों का पालन करना चाहिए।
ईयू का सीबीएएम लोहा और इस्पात, एल्युमीनियम, सीमेंट, उर्वरक, बिजली और हाइड्रोजन सहित कुछ कार्बन-सघन वस्तुओं के आयात पर कार्बन कर लगाने के लिए तैयार किया गया है। भारतीय वाणिज्य मंत्री ने 22-27 अक्टूबर तक अपने छह दिवसीय दौरे के दौरान जर्मनी और नीदरलैंड का दौरा किया। वह 100 सदस्यीय व्यावसायिक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे थे।
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