भारतीय रेल ने इन्फ्रास्ट्रक्चर के आधुनिकीकरण के लिए 871 करोड़ रुपए की परियोजनाओं को मंजूरी दी
नई दिल्ली, 26 फरवरी (आईएएनएस)। भारतीय रेल ने भविष्य के लिए तैयार, उच्च क्षमता वाला रेल नेटवर्क बनाने के परिवर्तनकारी प्रयास जारी रखते हुए, उत्तरी, दक्षिणी और पूर्वी रेलवे जोन में 871 करोड़ रुपए की लागत वाली कई रणनीतिक इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को गुरुवार को मंजूरी दी है।
इन परियोजनाओं का उद्देश्य कोचिंग रखरखाव पारिस्थितिकी को आधुनिक बनाना, उच्च घनत्व गलियारों पर भीड़ कम करना, परिचालन रुकावटों को खत्म करना और यात्री एवं माल ढुलाई क्षमता को काफी बढ़ाना है।
मंजूर की हुई परियोजनाओं के तहत 174.26 करोड़ रुपए की लागत से राजस्थान के श्री गंगानगर स्टेशन पर फेज-I के तहत कोच रखरखाव सुविधा विकसित की जाएगी। यह परियोजना एलएचबी और वंदे भारत रेलगाड़ियों सहित आधुनिक रोलिंग स्टॉक के लिए रखरखाव इन्फ्रास्ट्रक्चर को उन्नत और विकसित करने की बड़ी पहल का हिस्सा है।
बीकानेर इलाके में वंदे भारत और एलएचबी सेवाओं के विस्तार से बढ़ती रखरखाव जरूरतों को पूरा करने के लिए, भारतीय रेल ने फेज-II के तहत 139.68 करोड़ रुपए की लागत से राजस्थान के लालगढ़ में कोचिंग रखरखाव सुविधाओं को बढ़ाने को मंजूरी दी है।
केरल में क्षमता बढ़ाने के तहत भारतीय रेल ने दक्षिणी रेलवे के 21.10 किलोमीटर लंबे तुरावुर–मरारीकुलम खंड को 450.59 करोड़ रुपए की लागत से डबल लाइन करने की मंजूरी दी है। यह खंड रणनीतिक रूप से जरूरी एर्णाकुलम–अलपुझा–कायांकुलम गलियारे पर है। यह गलियारा बंदरगाह से जुड़े कार्गो सहित काफी यात्री और माल ढुलाई का यातायात संभालता है।
भारतीय रेल ने आसनसोल इलाके में परिचालन समस्याओं को दूर करने के लिए पश्चिम बंगाल में पूर्वी रेलवे के तहत 107.10 करोड़ रुपए की लागत से 4.75 किमी लंबी कालीपहाड़ी बाईपास लाइन बनाने की भी मंजूरी दी है।
इस परियोजना से हर दिन लगभग नौ मालगाड़ियों के लिए लगभग 90 मिनट और आठ कोचिंग ट्रेनों के लिए लगभग 30 मिनट का समय बचने की उम्मीद है। यार्ड में जाम कम करके और परिचालन आसानी में सुधार करके, यह बाईपास लाइन की क्षमता बढ़ाएगी, टर्नअराउंड टाइम कम करेगी और पूर्वी भारत के सबसे व्यस्त रेलवे क्षेत्रों में से एक में दक्षता में काफी सुधार करेगी।
--आईएएनएस
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NCP में हुआ बड़ा बदलाव, सुनेत्रा पवार बनाई नई राष्ट्रीय अध्यक्ष
एनसीपी में नेतृत्व परिवर्तन के साथ एक नई राजनीतिक पारी की शुरुआत हो गई है. पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में सुनेत्रा पवार को सर्वसम्मति से राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया. वर्किंग प्रेसिडेंट प्रफुल्ल पटेल ने उनके नाम का प्रस्ताव रखा, जिसे महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष सुनील तत्कारे ने अनुमोदित किया. बैठक में मौजूद सदस्यों ने हाथ उठाकर उनके नेतृत्व पर भरोसा जताया.
भावनात्मक पृष्ठभूमि में आया फैसला
सुनेत्रा पवार का अध्यक्ष चुना जाना केवल संगठनात्मक बदलाव नहीं, बल्कि एक भावनात्मक क्षण भी माना जा रहा है. उनके पति और महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार का 28 जनवरी 2026 को बारामती में एक विमान हादसे में निधन हो गया था. इस दुखद घटना के बाद पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर चर्चाएं तेज थीं, जिनका समापन अब सुनेत्रा पवार के चयन के साथ हुआ.
राजनीतिक विरासत और पारिवारिक पृष्ठभूमि
18 अक्टूबर 1963 को महाराष्ट्र के ओसमानाबाद में जन्मी सुनेत्रा पवार एक राजनीतिक और कृषक परिवार से ताल्लुक रखती हैं. उनके पिता Padamsinh Patil पूर्व राज्य मंत्री और लोकसभा सांसद रह चुके हैं. परिवार का राजनीतिक प्रभाव लंबे समय से महाराष्ट्र की राजनीति में देखा जाता रहा है.
उनके बड़े भाई भी सक्रिय राजनीति में रहे हैं और विभिन्न दलों से जुड़े रहे हैं. इस तरह सुनेत्रा पवार का पारिवारिक नेटवर्क राज्य और राष्ट्रीय राजनीति में गहरी जड़ें रखता है.
नई जिम्मेदारी, नई चुनौती
पार्टी के भीतर यह बदलाव ऐसे समय आया है जब एनसीपी को संगठनात्मक मजबूती और राजनीतिक दिशा की जरूरत है. सुनेत्रा पवार के सामने पार्टी को एकजुट रखना, कार्यकर्ताओं में विश्वास बनाए रखना और आगामी चुनावी रणनीति को धार देना बड़ी चुनौती होगी.
परिवार की अगली पीढ़ी भी राजनीति में
सुनेत्रा पवार और अजित पवार के दो बेटे हैं जय पवार और पार्थ पवार. पार्थ पवार ने 2019 के लोकसभा चुनाव में मावल सीट से चुनाव लड़ा था, हालांकि उन्हें सफलता नहीं मिली. बावजूद इसके, पवार परिवार की अगली पीढ़ी भी राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने की कोशिश कर रही है.
एनसीपी में यह नेतृत्व परिवर्तन पार्टी के भविष्य की दिशा तय करेगा. अब सभी की नजरें इस बात पर होंगी कि सुनेत्रा पवार अपने अनुभव और पारिवारिक राजनीतिक विरासत के सहारे पार्टी को किस तरह नई ऊर्जा और रणनीति प्रदान करती हैं.
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