कोलंबो में खेले गए मुकाबले ने सुपर एट्स ग्रुप-2 की दिशा बदल दी है। न्यूजीलैंड ने सह-मेजबान श्रीलंका को 61 रन से हराकर टूर्नामेंट से बाहर कर दिया। इस जीत का असर सिर्फ श्रीलंका तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पाकिस्तान की सेमीफाइनल उम्मीदें भी इससे जुड़ गई हैं।
169 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए श्रीलंका की टीम 107/8 तक ही पहुंच सकी। उन्हें बड़ी जीत की दरकार थी, लेकिन बल्लेबाजी पूरी तरह लड़खड़ा गई। बता दें कि 2014 में खिताब जीतने के बाद से यह लगातार पांचवां अवसर है जब श्रीलंका सेमीफाइनल में जगह बनाने में नाकाम रहा है।
दूसरी ओर न्यूजीलैंड की इस जीत से उसका नेट रन रेट +3.050 तक पहुंच गया है, जो उसे फिलहाल मजबूत स्थिति में रखता है। गौरतलब है कि इंग्लैंड पहले ही सेमीफाइनल के लिए क्वालीफाई कर चुका है। अब ग्रुप से दूसरे स्थान के लिए आखिरी दो मुकाबले निर्णायक साबित होंगे।
मौजूदा अंकतालिका के अनुसार इंग्लैंड के 4 अंक हैं और वह शीर्ष पर है। न्यूजीलैंड के 3 अंक हैं, जबकि पाकिस्तान के 1 अंक हैं। पाकिस्तान को अपना अंतिम मुकाबला श्रीलंका के खिलाफ कैंडी में खेलना है।
समीकरण साफ है। अगर न्यूजीलैंड अपने आखिरी मैच में इंग्लैंड को हरा देता है, तो वह 5 अंकों के साथ सीधे सेमीफाइनल में पहुंच जाएगा। उस स्थिति में पाकिस्तान का मैच अप्रासंगिक हो जाएगा।
हालांकि पाकिस्तान की उम्मीदें तब जिंदा रहेंगी जब इंग्लैंड न्यूजीलैंड को पराजित करे। उस हालात में न्यूजीलैंड 3 अंकों पर रहेगा और यदि पाकिस्तान श्रीलंका को हरा देता है, तो दोनों टीमों के 3-3 अंक हो जाएंगे। तब फैसला नेट रन रेट के आधार पर होगा।
मौजूद गणनाओं के अनुसार यदि इंग्लैंड न्यूजीलैंड को 50 रन से हराता है, तो पाकिस्तान को लगभग 20 रन से जीत दर्ज करनी होगी, बशर्ते पहली पारी का स्कोर 170 के आसपास हो। अगर पाकिस्तान लक्ष्य का पीछा करता है, तो उसे करीब 17.5 ओवर में जीत हासिल करनी होगी, अन्यथा नेट रन रेट में पीछे रह सकता है।
गौरतलब है कि सुपर एट्स में इंग्लैंड का प्रदर्शन प्रभावशाली रहा है, जिससे अंकतालिका काफी हद तक स्पष्ट हुई है। लेकिन श्रीलंका की विदाई ने अंतिम सेमीफाइनल स्थान की जंग को बेहद रोमांचक बना दिया है।
अब पाकिस्तान के सामने दोहरी चुनौती है, पहले श्रीलंका के खिलाफ बड़ी जीत दर्ज करना और फिर इंग्लैंड से अनुकूल परिणाम की उम्मीद करना। कुल मिलाकर सेमीफाइनल की आखिरी तस्वीर अंतिम मैचों के बाद ही साफ होगी और फिलहाल सभी की निगाहें कोलंबो और कैंडी में होने वाले मुकाबलों पर टिकी हुई हैं।
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चेन्नई का चेपॉक स्टेडियम एक बार फिर बड़े मुकाबले का गवाह बनने जा रहा है। भारतीय टीम गुरुवार को टी20 वर्ल्ड कप 2026 के सुपर एट्स चरण में जिम्बाब्वे से भिड़ेगा। यह मुकाबला भारत के लिए करो या मरो जैसा है, क्योंकि दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 76 रन की भारी हार के बाद टीम की सेमीफाइनल उम्मीदें कमजोर पड़ गई हैं।
मौजूद जानकारी के अनुसार सूर्यकुमार यादव की अगुवाई वाली टीम को न सिर्फ जिम्बाब्वे बल्कि वेस्टइंडीज के खिलाफ भी जीत दर्ज करनी होगी और साथ ही अन्य परिणामों पर भी नजर रखनी होगी। ऐसे में अब किसी भी तरह की चूक की गुंजाइश नहीं बची है।
गौरतलब है कि मुकाबला रात में खेला जाएगा और चेपॉक में इस समय दूसरी पारी के दौरान ओस बड़ा फैक्टर बनती है। मौसम विभाग के अनुसार मैच के दौरान ड्यू 80 से 90 प्रतिशत के बीच रह सकती है, जिससे दूसरी पारी में गेंद गीली और आउटफील्ड तेज हो सकता है।
इसी चुनौती से निपटने के लिए एमए चिदंबरम स्टेडियम में इस बार एक नया कदम उठाया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक ‘ड्यू क्योर’ नामक एक विशेष केमिकल का छिड़काव किया गया है, जिसे अमेरिका से मंगाया गया है। मंगलवार और बुधवार को मैदान पर इसका प्रयोग किया गया और गुरुवार दोपहर में भी इसे दोहराने की योजना है, ताकि रात में ओस का असर कम किया जा सके।
परंपरागत रूप से चेपॉक की पिच स्पिनरों के लिए मददगार मानी जाती है। यहां गेंद रुककर आती है और बल्लेबाजों को धैर्य दिखाना पड़ता है। लेकिन जब ओस पड़ती है तो गेंद फिसलने लगती है, जिससे स्पिनरों की पकड़ कमजोर हो जाती है और बल्लेबाजी आसान हो सकती है। ऐसे हालात में टॉस की भूमिका बेहद अहम हो जाती है और कप्तान अक्सर लक्ष्य का पीछा करना पसंद करते हैं।
दोनों टीमें अपने-अपने पिछले सुपर एट्स मुकाबले हारकर यहां पहुंची हैं। भारत को दक्षिण अफ्रीका ने पूरी तरह मात दी थी, जबकि जिम्बाब्वे को वेस्टइंडीज के खिलाफ 107 रन की करारी शिकस्त झेलनी पड़ी थी।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि भारत दबाव में किस तरह प्रदर्शन करता है। पिच, मौसम और ओस जैसे कारकों के बीच रणनीति और संयम ही इस मुकाबले का रुख तय करेंगे और फिलहाल सभी की निगाहें चेपॉक की इस निर्णायक जंग पर टिकी हुई हैं।
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