भारत के पोल्ट्री बिजनेस के लिए खाड़ी देशों से एक बुरी खबर आई है। सऊदी अरब ने भारत से आने वाले चिकन (Poultry) और अंडों के आयात पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी है। इस फैसले ने न केवल भारतीय निर्यातकों की नींद उड़ा दी है, बल्कि पोल्ट्री फार्म चलाने वाले किसानों के माथे पर भी चिंता की लकीरें खींच दी हैं।
सऊदी अरब के अधिकारियों ने इस कड़े कदम के पीछे मुख्य रूप से हेल्थ और सेफ्टी का हवाला दिया है। वहां की सरकार को डर है कि एवियन इन्फ्लूएंजा (बर्ड फ्लू) के चलते संक्रमण फैल सकता है। साथ ही सऊदी अरब अपने खाद्य सुरक्षा मानकों को लेकर काफी सख्त हो गया है, और फिलहाल भारतीय पोल्ट्री उत्पाद उन पैमानों पर खरे नहीं उतर पा रहे हैं।
किसानों और कारोबारियों पर क्या होगा असर?
सऊदी अरब भारत के लिए एक बहुत बड़ा मार्केट था। इस अचानक लगे ब्रेक के कई गहरे असर होने वाले हैं कि जो किसान एक्सपोर्ट के भरोसे अपनी आय बढ़ाने का सपना देख रहे थे, उन्हें भारी वित्तीय नुकसान झेलना पड़ सकता है। साथ ही जब माल बाहर नहीं जाएगा, तो वह देश के भीतर ही बिकेगा। इससे घरेलू बाजार में चिकन और अंडों की भरमार हो जाएगी, जिससे इनकी कीमतें काफी नीचे गिर सकती हैं। आम जनता के लिए तो यह अच्छी खबर हो सकती है, लेकिन पोल्ट्री फार्मर्स के लिए यह घाटे का सौदा होगा। इस कारण अब एक्सपोर्टर्स को मजबूरी में नए देशों के दरवाजे खटखटाने होंगे, लेकिन रातों-रात लॉजिस्टिक्स और मार्केटिंग स्ट्रैटेजी बदलना इतना आसान नहीं होता।
ग्लोबल ट्रेड का 'पेचीदा' खेल
सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई और देश भी इस समय आंशिक प्रतिबंधों का सामना कर रहे हैं। इससे इंटरनेशनल मार्केट में पोल्ट्री ट्रेड का पूरा ढांचा ही हिल गया है। यह स्थिति हमें याद दिलाती है कि ग्लोबल ट्रेड कितना नाजुक है—एक छोटी सी बीमारी या हेल्थ अलर्ट पूरे बिजनेस को चौपट कर सकता है।
अब गेंद भारत के पॉलिसी मेकर्स और एक्सपोर्टर्स के पाले में है। उन्हें न केवल अपने सेफ्टी स्टैंडर्ड्स सुधारने होंगे, बल्कि किसानों को इस आर्थिक झटके से उबारने के लिए ठोस कदम भी उठाने होंगे।
Continue reading on the app