अंकिता भंडारी केस में न्याय दिलाना समाज और प्रशासन का कर्तव्य: CM Pushkar Dhami
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अंकिता भंडारी हत्या मामले में न्याय सुनिश्चित करने को प्राथमिकता देने पर रविवार को जोर दिया। ऋषिकेश के वनंतरा रिजॉर्ट में ‘रिसेप्शनिस्ट’ के रूप में काम करने वाली अंकिता की 18 सितंबर 2022 को हत्या कर दी गई थी। मुख्यमंत्री ने हल्द्वानी में एक कार्यक्रम के दौरान इस मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अंकिता को न्याय दिलाना समाज और प्रशासनिक व्यवस्था, दोनों की जिम्मेदारी है।
धामी ने कहा, ‘‘संवेदनशील मामले का राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल करने के बजाय इस पर होने वाली चर्चा तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए।’’ उन्होंने विपक्ष से सवाल किया कि किसी बेटी के दुख का राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल करना या बिना सबूत आरोप लगाना कितना उचित है। उन्होंने कहा कि इतने संवेदनशील मामले में न्यायिक प्रक्रिया, तथ्यों और साक्ष्यों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। अदालत द्वारा दोषियों को सजा सुनाए जाने और जमानत याचिकाओं पर न्यायिक कार्यवाही का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कानून की उचित प्रक्रिया का सम्मान किया जाना चाहिए।
धामी ने हल्द्वानी में ‘कुमाऊं द्वार महोत्सव’ को संबोधित करते हुए यह बात कही। वह इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे।
Jamia Millia Islamia में अनधिकृत प्रवेश पर Congress सांसदों इमरान मसूद और इमरान प्रतापगढ़ी पर FIR दर्ज
जामिया मिल्लिया इस्लामिया परिसर में कथित तौर पर अनधिकृत रूप से प्रवेश करने और छात्रसंघ चुनाव के लिए जारी आंदोलन के दौरान अशांति भड़काने के आरोप में कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और इमरान प्रतापगढ़ी तथा अन्य के खिलाफ एक प्राथमिकी दर्ज की गई है। सूत्रों ने रविवार को यह जानकारी दी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने कांग्रेस के लोकसभा सदस्य मसूद, राज्यसभा सदस्य प्रतापगढ़ी और अन्य के खिलाफ दिल्ली पुलिस में एक शिकायत दर्ज कराई थी।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने विश्वविद्यालय प्रशासन की शिकायत पर, अनधिकृत प्रवेश को लेकर इन सांसदों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है, जो प्रदर्शनकारी छात्रों से मिलने विश्वविद्यालय गए थे। आंदोलन कर रहे विद्यार्थी छात्र संघ को बहाल करने और अपने खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) ने आरोप लगाया है कि सैकड़ों पुलिसकर्मियों ने द्वार संख्या 7 के बाहर छात्रों को हिरासत में ले लिया और अधिकारी उन छात्रों को निशाना बना रहे हैं जो जामिया मिलिया इस्लामिया स्टूडेंट्स यूनियन (जेएमआईएसयू) को बहाल करने की मांग कर रहे हैं।
सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में, एसएफआई ने इस स्थिति को छात्रों के खिलाफ की गई सख्त कार्रवाई बताया। उन्होंने छात्रों की हिरासत खत्म करने और छात्र संघ को बहाल करने की मांग की। इन आरोपों पर पुलिस की ओर से फिलहाल कोई जवाब नहीं आया है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है, जब विश्वविद्यालय ने प्रदर्शन स्थल पर बढ़ते तनाव के बीच छात्रों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए सभी पाठ्यक्रमों की कक्षाएं ऑनलाइन कर दी हैं। शनिवार को कुलपति मजहर आसिफ और कुलसचिव मो. महताब आलम रिज़वी सहित 1,500 से अधिक शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों ने अंसारी सभागार के लॉन से द्वार संख्या 7 तक मार्च किया, ताकि वे प्रदर्शन कर रहे छात्रों को अपना आंदोलन वापस लेने के लिए मना सकें। इसने बताया कि कर्मचारियों ने लगभग दो घंटे तक कई आग्रह किया, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने वह स्थान खाली करने से इनकार कर दिया।
यह आरोप लगाया गया कि कुछ छात्रों ने सुरक्षा गार्डों, कर्मचारियों और शिक्षकों को धक्का दिया, जिसके बाद कर्मचारी वहां से हट गए। हालांकि, एसएफआई की जामिया इकाई ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय के अधिकारियों—जिनमें प्रॉक्टर, कुलसचिव और सुरक्षा सलाहकार शामिल हैं—ने भूख हड़ताल पर बैठे प्रदर्शनकारियों को जबरन हटाने की कोशिश की, उनके तंबू उखाड़ दिए और इस दौरान छात्राओं को घसीटा गया। वहां मौजूद एक विद्यार्थी ने यह भी आरोप लगाया कि परिसर के बाहर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे, जो छात्रों को अंदर जाने से रोक रहे थे।
कुछ छात्रों को घसीटकर ले जाया गया और हिरासत में ले लिया गया। इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। यह विरोध प्रदर्शन लगभग दो सप्ताह पहले छात्र संघ को बहाल करने की मांग को लेकर शुरू हुआ था।
छात्रों का कहना है कि 2006 से छात्र संघ चुनाव नहीं हुए हैं। एसएफआई के अनुसार, चार छात्र अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं, जबकि एक पीएचडी विद्यार्थी, गुलिस्तां-ए-ग़ालिब लॉन में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठी है।
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