PM मोदी का मलेशिया दौरा: एयरपोर्ट पर अनवर इब्राहिम ने प्रोटोकॉल तोड़ किया स्वागत, रक्षा-व्यापार पर फोकस
कुआलालंपुर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को अपनी दो दिवसीय राजकीय यात्रा पर मलेशिया पहुंचे। कुआलालंपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पीएम मोदी का भव्य और ऐतिहासिक स्वागत किया गया।
विशेष सम्मान के रूप में, मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम प्रोटोकॉल तोड़कर खुद पीएम मोदी की अगवानी करने एयरपोर्ट पहुंचे, जो दोनों देशों के बीच मजबूत होते व्यक्तिगत और कूटनीतिक संबंधों को दर्शाता है।
Celebrating the India-Malaysia people-to-people connect!
— Narendra Modi (@narendramodi) February 7, 2026
PM Anwar Ibrahim and I are heading to the community programme in Kuala Lumpur.@anwaribrahim pic.twitter.com/wkMCYuatB6
#LIVE: Prime Minister @narendramodi, accompanied by Malaysian PM Anwar Ibrahim, arrives at the venue to address members of the Indian diaspora shortly.
— DD News (@DDNewslive) February 7, 2026
Watch Live: https://t.co/SXcTEwIDfp#PMModiInMalaysia #IndiaMalaysia #KualaLumpur pic.twitter.com/tFU2OqS5oC
रक्षा और सुरक्षा सहयोग पर विशेष ध्यान
पीएम मोदी की इस यात्रा का मुख्य एजेंडा रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देना है। भारत और मलेशिया दक्षिण-पूर्व एशिया में सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर सहमत हुए हैं।
दोनों नेताओं के बीच होने वाली उच्च-स्तरीय बैठक में रक्षा तकनीक के आदान-प्रदान और संयुक्त युद्धाभ्यास पर चर्चा होने की संभावना है।
#Watch | Indian diaspora eagerly awaits Prime Minister @narendramodi’s arrival to address a community event in Kuala Lumpur, Malaysia.#PMModiInMalaysia #IndiaMalaysia @hcikl pic.twitter.com/i5vvzV2kR3
— DD News (@DDNewslive) February 7, 2026
आर्थिक और व्यापारिक रिश्तों को मिलेगी नई गति
आर्थिक मोर्चे पर, दोनों देश व्यापारिक बाधाओं को दूर करने और निवेश को बढ़ावा देने के लिए बड़े समझौतों पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। मलेशिया, भारत का एक महत्वपूर्ण व्यापारिक भागीदार है, और पीएम मोदी की इस यात्रा से डिजिटल इकोनॉमी, सेमीकंडक्टर और ग्रीन एनर्जी जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग बढ़ने की उम्मीद है।
भारतीय समुदाय से संवाद और सांस्कृतिक जुड़ाव
अपनी यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी मलेशिया में रहने वाले विशाल भारतीय समुदाय को भी संबोधित करेंगे। मलेशिया की संस्कृति और विकास में भारतीय मूल के लोगों के योगदान की सराहना करते हुए, वे दोनों देशों के बीच 'पीपल-टू-पीपल' कनेक्ट को मजबूत करने पर जोर देंगे।
कश्मीर पर अमेरिका का बड़ा स्टैंड: शेयर किया भारत का 'अखंड' नक्शा; पाकिस्तान को लगी मिर्ची
India US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच हुई ट्रेड डील (Interim Trade Framework) ने न केवल आर्थिक बल्कि रणनीतिक चर्चाओं को भी जन्म दे दिया है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) द्वारा इस समझौते की घोषणा के लिए साझा किए गए एक पोस्ट ने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया। इस पोस्ट में भारत का जो आधिकारिक मानचित्र दिखाया गया है, वह नई दिल्ली के उस रुख का समर्थन करता नजर आ रहा है जिसे भारत दशकों से वैश्विक मंचों पर रखता आया है।
नक्शे में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को दिखाया अभिन्न अंग
USTR द्वारा साझा किए गए इन्फोग्राफिक में भारत के पूर्ण क्षेत्रीय दावे को प्रदर्शित किया गया है। इसमें केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को पूरी तरह से भारतीय सीमा के भीतर दिखाया गया है। खास बात यह है कि इस नक्शे में पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) या चीन प्रशासित अक्साई चिन के लिए कोई अलग सीमांकन, छायांकन या 'डॉटेड लाइन्स' (बिंदीदार रेखाएं) नहीं दी गई हैं। यह चित्रण बिल्कुल वैसा ही है जैसा भारत सरकार 2019 के पुनर्गठन के बाद अपने राजनीतिक मानचित्रों में उपयोग करती है।
From tree nuts and dried distillers’ grains to red sorghum and fresh and processed fruit, the U.S.-India Agreement will provide new market access for American products. pic.twitter.com/mqpP10LJp1
— United States Trade Representative (@USTradeRep) February 6, 2026
ऐतिहासिक स्टैंड से अलग अमेरिका का नया संकेत
ऐतिहासिक रूप से अमेरिका आधिकारिक मानचित्रों और बयानों में जम्मू-कश्मीर को अक्सर एक 'विवादित क्षेत्र' के रूप में वर्णित करता आया है और भारत-पाकिस्तान संबंधों में तटस्थता बनाए रखने की कोशिश करता रहा है। हालांकि, इस बार एक महत्वपूर्ण व्यापारिक घोषणा के साथ भारत के पूर्ण मानचित्र का उपयोग करना इस्लामाबाद के लिए एक स्पष्ट और कड़ा संदेश माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वाशिंगटन ने चुपचाप लेकिन स्पष्ट रूप से कश्मीर पर भारत की अखंडता को लेकर अपना समर्थन प्रदर्शित किया है।
समझौते से किसे क्या मिला?
6 फरवरी 2026 को घोषित इस अंतरिम फ्रेमवर्क के तहत अमेरिकी निर्यातकों को भारतीय बाजार में बड़ी राहत मिली है। इसके तहत अमेरिकी ड्राई फ्रूट्स, सोरघम और अनाज उत्पादकों को शुल्क मुक्त या कम शुल्क पर भारतीय बाजार तक पहुंच मिलेगी। इसके बदले में, भारतीय माल पर अमेरिकी टैरिफ को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने का निर्णय लिया गया है। इससे भारतीय निर्यातकों पर दबाव कम होगा और दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों का एक नया अध्याय शुरू होगा।
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