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कश्मीर पर अमेरिका का बड़ा स्टैंड: शेयर किया भारत का 'अखंड' नक्शा; पाकिस्तान को लगी मिर्ची

India US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच हुई ट्रेड डील (Interim Trade Framework) ने न केवल आर्थिक बल्कि रणनीतिक चर्चाओं को भी जन्म दे दिया है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) द्वारा इस समझौते की घोषणा के लिए साझा किए गए एक पोस्ट ने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया। इस पोस्ट में भारत का जो आधिकारिक मानचित्र दिखाया गया है, वह नई दिल्ली के उस रुख का समर्थन करता नजर आ रहा है जिसे भारत दशकों से वैश्विक मंचों पर रखता आया है।

नक्शे में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को दिखाया अभिन्न अंग
USTR द्वारा साझा किए गए इन्फोग्राफिक में भारत के पूर्ण क्षेत्रीय दावे को प्रदर्शित किया गया है। इसमें केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को पूरी तरह से भारतीय सीमा के भीतर दिखाया गया है। खास बात यह है कि इस नक्शे में पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) या चीन प्रशासित अक्साई चिन के लिए कोई अलग सीमांकन, छायांकन या 'डॉटेड लाइन्स' (बिंदीदार रेखाएं) नहीं दी गई हैं। यह चित्रण बिल्कुल वैसा ही है जैसा भारत सरकार 2019 के पुनर्गठन के बाद अपने राजनीतिक मानचित्रों में उपयोग करती है।

ऐतिहासिक स्टैंड से अलग अमेरिका का नया संकेत
ऐतिहासिक रूप से अमेरिका आधिकारिक मानचित्रों और बयानों में जम्मू-कश्मीर को अक्सर एक 'विवादित क्षेत्र' के रूप में वर्णित करता आया है और भारत-पाकिस्तान संबंधों में तटस्थता बनाए रखने की कोशिश करता रहा है। हालांकि, इस बार एक महत्वपूर्ण व्यापारिक घोषणा के साथ भारत के पूर्ण मानचित्र का उपयोग करना इस्लामाबाद के लिए एक स्पष्ट और कड़ा संदेश माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि वाशिंगटन ने चुपचाप लेकिन स्पष्ट रूप से कश्मीर पर भारत की अखंडता को लेकर अपना समर्थन प्रदर्शित किया है।

समझौते से किसे क्या मिला?
6 फरवरी 2026 को घोषित इस अंतरिम फ्रेमवर्क के तहत अमेरिकी निर्यातकों को भारतीय बाजार में बड़ी राहत मिली है। इसके तहत अमेरिकी ड्राई फ्रूट्स, सोरघम और अनाज उत्पादकों को शुल्क मुक्त या कम शुल्क पर भारतीय बाजार तक पहुंच मिलेगी। इसके बदले में, भारतीय माल पर अमेरिकी टैरिफ को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने का निर्णय लिया गया है। इससे भारतीय निर्यातकों पर दबाव कम होगा और दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों का एक नया अध्याय शुरू होगा।

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विश्व पृथ्वी दिवस: एमआईटी-वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी पुणे में ग्रीन हाइड्रोजन के विकास पर हो रहा शोध, दुबई में कोप 28 सम्मेलन आयोजित 

मधुरिमा राजपाल, भोपाल: आज सम्पूर्ण विश्व में ग्लोबल वार्मिंग एक प्रमुख समस्या बन गया है। जिसमें अनुमान लगाया जा रहा है कि औसत वैश्विक तापमान बढ़ेगा, जिससे ग्लेशियर के पिघलने से समुद्र का जलस्तर बढ़ेगा और पृथ्वी पर रेगिस्तानों का विस्तार होगा, जिससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रुप से जन-धन हानि होगी। ग्लोबल वार्मिंग की इसी समस्या से निजात पाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कई शोध और अनुसंधान कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। जिसमें संयुक्त राष्ट्र द्वारा जलवायु परिवर्तन पर आयोजित ‘कॉप सम्मेलन’ भी महत्तवपूर्ण स्थान रखता हैं। इस सम्मेलन में दुनिया भर के देशों के प्रतिनिधि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए नीतियों और कार्रवाइयों पर चर्चा करते हैं। ऐसे ही जलवायु परिवर्तन पर शोध करने में पुणे में स्थित एमआईटी -वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी ग्रीन हाइड्रोजन के विस्तार पर प्रयासरत है।

गन्ने और गेंदे के फूल से ग्रीन हाइड्रोजन के विकास पर दिया रहा बल 
हरिभूमि से बातचीत में एमआईटी में पदस्थ डॉ. भरत काले, एमेरिटस प्रोफेसर और मैटेरियल साइंस [सीओई] के निदेशक ने कहा कि एमआईटी ग्रीन हाइड्रोजन के विकास पर कार्य कर रही है। जिसके अंतर्गत जहां एक ओर गन्ने के बायोमास का उपयोग करके ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि गन्ने को हाइड्रोजन में बदलने के लिए मीथेन पायरोलिसिस (क्रैकिंग) या थर्मोलिसिस जैसे तरीकों का उपयोग किया जाता है, जो ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने में मदद कर सकती है। गन्ने से ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन कम लागत वाला और टिकाऊ ऊर्जा स्रोत हो सकता है, वहीं हमारी रिसर्च गेंदे के फूल से भी ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन पर काम चल रहा है।

दुबई में आयोजित कोप 28 सम्मेलन में यूनिवर्सिटी के 15 छात्रों ने लिया भाग
वहीं उन्होंने बताया कि हाल ही में दुबई में आयोजित कॉप 28 सम्मेलन में हमारी यूनिवर्सिटी के एक दल को भाग लेने का मौका मिला। जिसमें डॉ. रत्नदीप आर जोशी के साथ यूनिवर्सिटी के 15 छात्रों के समूह ने डी-काबोर्नाइजेशन और जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों का मुकाबला करने के लिए ब्रांड का काम किया। स्टूडेंट्स ने कार्बन फुटप्रिंट को कम करने और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए दुनिया भर में सरकारों, संगठनों और उद्योगों द्वारा की गई पहलों के बारे में जानकारी प्राप्त की।

क्यों है ग्रीन हाइड्रोजन महत्तवपूर्ण
ग्रीन हाइड्रोजन पृथ्वी को संरक्षित रखने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है क्योंकि यह अक्षय ऊर्जा का उपयोग करके बनाया जाता है और कार्बन उत्सर्जन को कम करता है। ग्रीन हाइड्रोजन के उपयोग से विभिन्न उद्योगों और परिवहन क्षेत्रों में कार्बन मुक्त ऊर्जा प्रदान की जा सकती है।

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संजू सैमसन की वजह से चला अभिषेक शर्मा का बल्ला, काम कर गई गंभीर-सूर्या की चाल

T20 World Cup 2026: टीम इंडिया के विस्फोटक ओपनर अभिषेक शर्मा आखिरकार फॉर्म में लौट आए हैं. उन्होंने जिम्बाब्वे के खिलाफ खेले गए मुकाबले में एक अहम अर्धशतक जड़ा. उनकी इस पारी में संजू सैमसन का भी अहम योगदान रहा. Fri, 27 Feb 2026 14:03:10 +0530

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